जापान की दिग्गज ऑटोमेकर होंडा मोटर कं. और निसान मोटर कं. एक बार फिर विलय की संभावनाओं की चर्चाओं के केंद्र में आ गई हैं। पिछले वर्ष दोनों कंपनियों के बीच मर्जर की बातचीत अचानक टूट गई थी, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। उस समय निसान गंभीर वित्तीय संकट में थी और होंडा को व्हाइट नाइट यानी बचाने वाली कंपनी माना जा रहा था। हालांकि बातचीत इसलिए विफल हो गई क्योंकि होंडा चाहती थी कि निसान उसकी फुली ओन्ड सब्सिडियरी कंपनी बने, जबकि निसान अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना चाहती थी। आप जानते हैं निसान और फ्रेंच दिग्गज रेनो के बीच भी कुछ इसी तर्ज पर भयंकर घमासान हुआ था और जेवी के सीईओ कार्लोस गोन को जापान में अरेस्ट कर लिया गया था फिर बड़े आश्चर्यजनक रूप से धुरंधर की तरह एक चार्टर्ड फ्लाइट से वे जापान से गायब हो गये थे। निसान और होंडा के लिए एक साल बाद स्थिति लगभग उलट चुकी है। निसान ने फिर ऑपरेटिंग प्रोफिट दर्ज किया है, जबकि होंडा इतिहास में पहली बार बड़े ऑपरेटिंग लॉस में फिसल गई। एनेलिस्ट कहते हैं कि इससे दोनों कंपनियों के बीच अधिक समान शर्तों पर दोबारा बातचीत की संभावना बढ़ गई है। टोकाई टोक्यो इंटेलिजेंस लेबोरेटरी के सीनियर एनेलिस्ट सेइजी सुगिउरा के अनुसार, उन्हें फिर से कोशिश करनी ही पड़ेगी। उनका मानना है कि दोनों कंपनियां चीनी ईवी कंपनियों के अटैक, बढ़ती टेक्नोलॉजी कॉस्ट और इलेक्ट्रिफिकेशन की तेज दौड़ में पिछड़ रही हैं। होंडा ने मार्च 2026 तक समाप्त वित्त वर्ष में 414.3 बिलियन येन यानी करीब 2.6 बिलियन डॉलर का ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया। यह 1940 के दशक में कंपनी की स्थापना के बाद पहला वार्षिक घाटा है। कंपनी को अमेरिका में इलेक्ट्रिक वेहीकल्स पर गलत दांव लगाने के कारण लगभग 9 बिलियन का भारी राइटडाउन करना पड़ा।
होंडा का ऑटोमोबाइल बिजनस लगातार पांच तिमाहियों से घाटे में है। कंपनी अमेरिका और चीन जैसे बड़े मार्केट्स में पुराने मॉडल लाइनअप के कारण कमजोर पड़ रही है। हालांकि उसका मोटरसाइकल बिजनस अब भी मजबूत है, लेकिन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी जहां होंडा कभी ग्लोबल लीडर थी अब वहां भी प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ती दिख रही है। दूसरी ओर, निसान ने भी अपनी शुरुआती ईवी बढ़त गंवा दी थी। अमेरिका और चीन में कमजोर प्रोडक्ट के कारण उसकी सेल्स घट गई नतीजतन कंपनी को पिछले वित्त वर्ष में पैनिक बटन दबाते हुए बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग करनी पड़ी। सात प्लांट्स बंद करने के साथ ही कंपनी को 20 हजार नौकरियां खत्म करनी पड़ीं। लेकिन नए सीईओ ईवान एस्पिनोसा की अगुवाई में कंपनी रीस्ट्रक्चरिंग कर रही है धीरे-धीरे सुधार के संकेत दे रही है।निसान ताईवान की ईएमएस (इलेक्ट्रोनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस) दिग्गज फोक्सकॉन के साथ भी ईवी जेवी पर बात कर रही है। चर्चा है कि दोनों के बीच निसान के जापान स्थित ओपामा प्लांट को लेकर बातचीत चल रही है। इस प्लांट में फोक्सकॉन ईवी बनाने पर विचार कर रही है। भारत और मेक्सिको जैसे एमरजिंग ऑटो मार्केट्स में होंडा और निसान दोनों क्राइसिस में हैं। जबकि इन मार्केट्स में जापान की ही टोयोटा और सुजुकी, कोरिया की ह्यूंदे और किआ व बीच की बीवाईडी व एमजी आदि कंपनियां अपने मार्केट शेयर को बढ़ा रही हैं। एनेलिस्ट्स के अनुसार यदि होंडा और निसान का मर्जर होता है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल समूहों में से एक बन सकता है। इससे पार्ट्स खरीद, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीक में इंवेस्टमेंट की लागत कम हो सकती है। साथ ही हाइब्रिड, सॉफ्टवेयर और ऑटोनोमस ड्राइविंग तकनीकों में साझा इंवेस्टमेंट से दोनों कंपनिया ग्लोबल कंपीटिशन में फिर से मजबूती से जम सकती हैं। हालांकि बराबरी के विलय अक्सर सफल नहीं होते। सीएलएसए सिक्योरिटीज जापान के एनेलिस्ट क्रिस्टोफर रिक्टर के अनुसार, होंडा का ईगो बराबरी की डील की संभावनाओं के पर कतर सकता है। ऐसे में किसी एक कंपनी की लीडरशिप नहीं होगी और बराबरी वाले विलय अक्सर बुरी तरह विफल होते हैं।
