अभी पिछले दिनों ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की अटकी गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत हुई थी। लेकिन अमेरिका ने भारत से इंपोर्ट होने वाले गुड्स पर 12.5 परसेंट टैरिफ बढ़ा दिया है। अमेरिका का कहना है कि भारत उन 60 देशों में शामिल है जो फोस्र्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने इंपोर्ट पर लगाम लगाने में विफल रहे हैं। हालांकि ट्रंप एडिमिनिस्ट्रेश का यह कदम दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत को पटरी से उतार सकता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 92 पन्नों की रिपोर्ट में कहा कि भारत जबरन मजदूरी से जुड़े इंपोर्ट पर लगाम लगाने केे नियम बनाने और प्रभावी ढंग से लागू कराने में विफल रहा है। रिपोर्ट में भारत की नीतियों को अनुचित और अमेरिकी व्यापार पर बोझ बताया गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन मजदूरी से बने सामानों के इंपोर्ट पर लगाम लगाने में विफलता अस्वीकार्य है। हालांकि भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित टैरिफ अभी अंतिम नहीं हैं। मंत्रालय ने कहा कि यूएसटीआर इन उपायों पर निर्णय लेने से पहले सार्वजनिक राय पर विचार करेगा। आप जानते हैं 20 फरवरी को अमेरिका के फेडरल सुप्रीम कोर्ट ट्रंप टैरिफ को खारिज कर दिया था इसके बदले में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के एमरजेंसी पावर के तहत जो 10 परसेंट अस्थायी टैरिफ लगाया था उसकी मियाद 24 जुलाई को खत्म हो रही है। मंत्रालय ने बयान में कहा, भारत इस मामले पर सेक्शन 301 कार्यवाही के तहत अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही यह भी कहा गया कि भारत फरवरी में घोषित फ्रेमवर्क डील (ट्रेड डील) को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। यह प्रस्ताव सेक्शन 301 की अनुचित व्यापार प्रथाओं (अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिसेस) की जांच के बाद आया है। ट्रंप प्रशासन फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए गए टैरिफ को नए नाम और नई पैकेजिंग के साथ लागू करने की कोशिश कर रहा है। इस रिपोर्ट में भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में रखा गया है जिनके पास जबरन मजदूरी से जुड़े इंपोर्ट को रोकने का कोई कानून नहीं है।
कनाडा, इक्वेडोर, ईयू, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान सहित छह अन्य देशों में ऐसे नियम मौजूद हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से लागू न करने के कारण उन पर 12.5 परसेंट के बजाय 10 परसेंट के रियायती टैरिफ का प्रस्ताव है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के अनुसार अमेरिका सरकार के इस फैसले को चैलेंज किया जा सकता है क्योंकि यूएसटीआर की जांच भारतीय एक्सपोर्ट में जबरन मजदूरी के इस्तेमाल पर नहीं थी। बल्कि इसके दायरे में उन देशों को रखा गया है जिन पर आरोप लगाया जा रहा है कि इन्होंने जिन देशों से इंपोर्ट किया वहां जबरन मजदूरी से बनने वाले प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट को रोका नहीं गया। श्रीवास्तव के अनुसार यह 12.5 परसेंट टैरिफ दरअसल ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की प्रेशर टेक्टिक (दबाव डालने की रणनीति) है और सेक्शन 301 की यह कार्रवाई और इंडिया-यूएस ट्रेड डील को अलग-अलग तरीके से देखना चाहिए। यूएसटीआर रिपोर्ट के अनुसार चीन में जबरन मजदूरी से बने कॉटन रॉ-मैटीरियल को प्रोसेस कर भारत गारमेंट और टेक्सटाइल के रूप में अमेरिका को एक्सपोर्ट करता है। जबकि भारत को चीन की जबरन मजदूरी पर कड़े नियम लागू करने चाहिएं। इस मामले पर यूएसटीआर ने 6 जुलाई तक आमजन की राय मांगी है और 7 जुलाई को इसकी सुनवाई होगी। भारत सरकार के अनुसार सेक्शन 232 टैरिफ के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स व कुछ अन्य प्रोडक्ट्स को इन नए टैरिफ से बाहर रखा गया है। टेक्सटाइल और गारमेंट्स के लिए स्पेशल सिस्टम दिया गया है, जिसके तहत कुछ देशों के तय कोटा को कम टैरिफ पर एक्सपोर्ट की अनुमति मिल सकती है। यूएसटीआर ने कहा है कि वह एनर्जी, रेअर अर्थ मीनरल, कुछ मेटल, बीफ, कॉफी, कुछ फ्रूट्स एंड वेजीटेबल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स और एयरक्राफ्ट कंपोनेंट्स सहित कई प्रोडक्ट्स को टैरिफ के दायरे से बाहर रखेगा।