भारत की रखरखाव अर्थव्यवस्था उपकरणों में खराबी, अनियोजित कामबंदी, संपत्तियों के कम उपयोग और समय से पहले उन्हें बदलने से होने वाली उत्पादकता के नुकसान की भरपाई कर देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक प्रतिशत तक का अवसर पैदा कर सकती है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने यह बात कही। उद्योग मंच ‘एमआरएएम (मेंटेनेंस, रिलायबिलिटी एंड एसेट मैनेजमेंट) एक्सपो 2026’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उद्योगपतियों ने बेहतर परिसंपत्ति प्रबंधन पर बढ़ते नीतिगत जोर का उल्लेख किया। नीति आयोग की ‘विकसित भारत के लिए एआई’ रिपोर्ट में अधिक भरोसेमंद और मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित पूर्वानुमानित रखरखाव, डिजिटल ट्विन, सबस्टेशन का स्वचालित संचालन और दूरस्थ निगरानी की सिफारिश की गई है। ‘एमआरएएम एक्सपो 2026’ में उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कहा कि खराबी आने पर प्रतिक्रियात्मक रखरखाव करने की मौजूदा व्यवस्था से हटकर पूर्वानुमानित, आंकड़ों पर आधारित और विश्वसनीयता-केंद्रित रखरखाव अपनाने से औद्योगिक उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, परिसंपत्तियों की उम्र बढ़ाई जा सकती है, परिचालन लागत घटाई जा सकती है तथा विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत की जा सकती है। सरकार ने भी परिसंपत्ति प्रबंधन के महत्व को लगातार स्वीकार किया है। इस अवसर पर एबीबी इंडिया के मोशन सर्विसेज विभाग के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा, ‘‘अध्ययन के निष्कर्ष यह स्पष्ट करते हैं कि हमारा उद्योग अक्सर बिना योजना के काम बंद होने के वास्तविक प्रभाव को कम करके आंकता है और सर्वेक्षण इस वास्तविकता की मजबूत पुष्टि करता है।’’ एमआरएएम 2026 की संयोजक और विर्गो कम्युनिकेशंस की संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक अनीता रघुनाथ ने कहा कि भारत रखरखाव, विश्वसनीयता और परिसंपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में तेजी से परिपक्व हो रहे बाजार के रूप में उभर रहा है। बिना योजना के काम बंद होने से उत्पादकता पर पडऩे वाले प्रभाव का अंदाजा इसके आंकड़ों से लगाया जा सकता है। एबीबी के वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की 88 प्रतिशत औद्योगिक कंपनियों को महीने में कम से कम एक बार बिना योजना के काम बंद होने का सामना करना पड़ा, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 69 प्रतिशत था। अमेरिका के आईआरआईएसएस समूह के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मार्टिन रॉबिन्सन ने कहा, ‘‘बेहतर रखरखाव उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि का सीधा चालक है। इससे काम बंद रहने का समय कम होता है, खराबियां घटती हैं, परिसंपत्तियों की उम्र बढ़ती है, परिचालन लागत कम होती है और बर्बादी घटती है।’’