TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-10-2026

आरबीआई की रेपो रेट बढ़ोतरी से महंगे हो सकते हैं होम लोन, ईएमआई का बढ़ेगा बोझ

  •  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की कर्ज लागत बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन आमतौर पर रेपो रेट और अन्य बाजार आधारित बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव का सीधा असर ऐसे कर्जों पर पड़ता है। भारत में अधिकांश खुदरा होम लोन ग्राहक फ्लोटिंग रेट विकल्प को चुनते हैं क्योंकि यह आमतौर पर फिक्स्ड रेट लोन की तुलना में 1 से 2.5 प्रतिशत तक सस्ता होता है। वहीं, जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक आमतौर पर ऋण दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं और बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल देते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में वृद्धि या चुकौती अवधि में वृद्धि हो सकती है। यदि कोई ग्राहक अभी 8 प्रतिशत ब्याज दर पर होम लोन चुका रहा है, तो पूर्ण प्रभाव पास होने की स्थिति में उसकी ब्याज दर बढक़र लगभग 8.25 प्रतिशत हो सकती है। ऐसी स्थिति में बैंकों के पास आम तौर पर दो विकल्प होते हैं। वे या तो ग्राहक की मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ा सकते हैं या फिर ईएमआई को समान रखते हुए ऋण अवधि (टेन्योर) बढ़ा सकते हैं। अंतिम प्रभाव बैंक की नीति और ग्राहक के लोन समझौते पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या बैंक से प्राप्त सूचनाओं पर नजर रखें, क्योंकि अलग-अलग बैंक दरों में संशोधन और उसके प्रभाव को अलग तरीके से लागू कर सकते हैं। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं। आरबीआई ने इस बैठक में सिर्फ रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ही नहीं किया, बल्कि अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी ‘संतुलित सख्ती’ भी कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट कहा है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। आगे की नीतिगत कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार या तो दरों में और बढ़ोतरी या फिर यथास्थिति के रूप में हो सकती है।

Share
आरबीआई की रेपो रेट बढ़ोतरी से महंगे हो सकते हैं होम लोन, ईएमआई का बढ़ेगा बोझ

 भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की कर्ज लागत बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन आमतौर पर रेपो रेट और अन्य बाजार आधारित बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव का सीधा असर ऐसे कर्जों पर पड़ता है। भारत में अधिकांश खुदरा होम लोन ग्राहक फ्लोटिंग रेट विकल्प को चुनते हैं क्योंकि यह आमतौर पर फिक्स्ड रेट लोन की तुलना में 1 से 2.5 प्रतिशत तक सस्ता होता है। वहीं, जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक आमतौर पर ऋण दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं और बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल देते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में वृद्धि या चुकौती अवधि में वृद्धि हो सकती है। यदि कोई ग्राहक अभी 8 प्रतिशत ब्याज दर पर होम लोन चुका रहा है, तो पूर्ण प्रभाव पास होने की स्थिति में उसकी ब्याज दर बढक़र लगभग 8.25 प्रतिशत हो सकती है। ऐसी स्थिति में बैंकों के पास आम तौर पर दो विकल्प होते हैं। वे या तो ग्राहक की मासिक किस्त (ईएमआई) बढ़ा सकते हैं या फिर ईएमआई को समान रखते हुए ऋण अवधि (टेन्योर) बढ़ा सकते हैं। अंतिम प्रभाव बैंक की नीति और ग्राहक के लोन समझौते पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या बैंक से प्राप्त सूचनाओं पर नजर रखें, क्योंकि अलग-अलग बैंक दरों में संशोधन और उसके प्रभाव को अलग तरीके से लागू कर सकते हैं। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं। आरबीआई ने इस बैठक में सिर्फ रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ही नहीं किया, बल्कि अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी ‘संतुलित सख्ती’ भी कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट कहा है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। आगे की नीतिगत कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार या तो दरों में और बढ़ोतरी या फिर यथास्थिति के रूप में हो सकती है।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news