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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

07-10-2026

काम पर आने-जाने में कर्मचारी हर महीने खर्च करते हैं एवरेज 785 रुपये

  •  कर्मचारी तय कार्यस्थल पर आने-जाने के लिए हर महीने औसतन 785 रुपये खर्च करते हैं। शहरी क्षेत्रों में यह खर्च 1,044 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 612 रुपये है। सरकार के एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने पहली बार किए गए राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (एनएचटीएस) के प्रमुख आंकड़े और निष्कर्ष जारी किए। यह सर्वेक्षण जुलाई, 2025 से जून, 2026 के बीच किया गया था। सर्वेक्षण में एक यात्रा की परिभाषा एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के रूप में की गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, तय कार्यस्थल पर आने-जाने के लिए पुरुष कर्मचारी हर महीने औसतन 835 रुपये खर्च करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों का औसत खर्च 533 रुपये है। शहरी विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने के लिए हर महीने औसतन 617 रुपये खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह खर्च 361 रुपये है। लगभग 57.6 प्रतिशत कर्मचारी काम पर जाने के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के आधे से अधिक कर्मचारी एक दिन के भीतर तय या गैर-तय कार्यस्थल तक आने-जाने की यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 54.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 64.1 प्रतिशत है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में औसत यात्रा समय करीब 20 से 23 मिनट है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यात्रा का समय अधिक है। देशभर में करीब 61.9 प्रतिशत पुरुष कर्मचारी रोजाना काम के लिए एक किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों के मामले में यह अनुपात 41.9 प्रतिशत है। सर्वेक्षण के अनुसार, देशभर में कर्मचारियों के आने-जाने के लिए दोपहिया वाहन सबसे प्रमुख साधन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 37.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 52.3 प्रतिशत कर्मचारी दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। शहरी क्षेत्रों में मोनोरेल, मेट्रो, उपनगरीय रेल और ट्रॉम से होने वाली यात्राओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर पर पांच प्रतिशत है। महाराष्ट्र में यह 20.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 16.5 प्रतिशत और दिल्ली में 14.4 प्रतिशत है। लगभग 83.4 प्रतिशत कर्मचारी 30 मिनट से कम समय में काम पर पहुंच जाते हैं। तय कार्यस्थल तक आधे घंटे के भीतर पहुंचने वाले कर्मचारियों का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 86.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 79.3 प्रतिशत है। करीब 13.7 प्रतिशत कर्मचारियों को 30 से 60 मिनट लगते हैं। घर से तय कार्यस्थल तक पहुंचने में कर्मचारियों को औसतन 25 मिनट लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समय 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 27 मिनट है। विद्यार्थियों के लिए औसत यात्रा समय 23 मिनट है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 22 मिनट है। लगभग 66.4 प्रतिशत विद्यार्थी रोजाना एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। छह वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब दो-तिहाई विद्यार्थी अपने मूल पाठ्यक्रम वाले शिक्षण संस्थान तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 65.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 68.1 प्रतिशत है।  स्कूली विद्यार्थियों में करीब 37 प्रतिशत पैदल स्कूल जाते हैं। इसके बाद बस से जाने वाले विद्यार्थियों की हिस्सेदारी 29.5 प्रतिशत और साइकिल से जाने वालों की 15.8 प्रतिशत है। तिपहिया का इस्तेमाल 10.5 प्रतिशत विद्यार्थी करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 14.4 प्रतिशत है। दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल 6.7 प्रतिशत विद्यार्थी करते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में 11.5 प्रतिशत है।  रातभर की यात्राओं में करीब 73.5 प्रतिशत परिवार बस और रेल पर निर्भर रहते हैं।

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काम पर आने-जाने में कर्मचारी हर महीने खर्च करते हैं एवरेज 785 रुपये

 कर्मचारी तय कार्यस्थल पर आने-जाने के लिए हर महीने औसतन 785 रुपये खर्च करते हैं। शहरी क्षेत्रों में यह खर्च 1,044 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 612 रुपये है। सरकार के एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने पहली बार किए गए राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (एनएचटीएस) के प्रमुख आंकड़े और निष्कर्ष जारी किए। यह सर्वेक्षण जुलाई, 2025 से जून, 2026 के बीच किया गया था। सर्वेक्षण में एक यात्रा की परिभाषा एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के रूप में की गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, तय कार्यस्थल पर आने-जाने के लिए पुरुष कर्मचारी हर महीने औसतन 835 रुपये खर्च करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों का औसत खर्च 533 रुपये है। शहरी विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने के लिए हर महीने औसतन 617 रुपये खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह खर्च 361 रुपये है। लगभग 57.6 प्रतिशत कर्मचारी काम पर जाने के लिए एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के आधे से अधिक कर्मचारी एक दिन के भीतर तय या गैर-तय कार्यस्थल तक आने-जाने की यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 54.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 64.1 प्रतिशत है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में औसत यात्रा समय करीब 20 से 23 मिनट है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यात्रा का समय अधिक है। देशभर में करीब 61.9 प्रतिशत पुरुष कर्मचारी रोजाना काम के लिए एक किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों के मामले में यह अनुपात 41.9 प्रतिशत है। सर्वेक्षण के अनुसार, देशभर में कर्मचारियों के आने-जाने के लिए दोपहिया वाहन सबसे प्रमुख साधन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 37.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 52.3 प्रतिशत कर्मचारी दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। शहरी क्षेत्रों में मोनोरेल, मेट्रो, उपनगरीय रेल और ट्रॉम से होने वाली यात्राओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर पर पांच प्रतिशत है। महाराष्ट्र में यह 20.7 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 16.5 प्रतिशत और दिल्ली में 14.4 प्रतिशत है। लगभग 83.4 प्रतिशत कर्मचारी 30 मिनट से कम समय में काम पर पहुंच जाते हैं। तय कार्यस्थल तक आधे घंटे के भीतर पहुंचने वाले कर्मचारियों का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में 86.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 79.3 प्रतिशत है। करीब 13.7 प्रतिशत कर्मचारियों को 30 से 60 मिनट लगते हैं। घर से तय कार्यस्थल तक पहुंचने में कर्मचारियों को औसतन 25 मिनट लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समय 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 27 मिनट है। विद्यार्थियों के लिए औसत यात्रा समय 23 मिनट है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 23 मिनट और शहरी क्षेत्रों में 22 मिनट है। लगभग 66.4 प्रतिशत विद्यार्थी रोजाना एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके शिक्षण संस्थानों तक पहुंचते हैं। छह वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब दो-तिहाई विद्यार्थी अपने मूल पाठ्यक्रम वाले शिक्षण संस्थान तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 65.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 68.1 प्रतिशत है।  स्कूली विद्यार्थियों में करीब 37 प्रतिशत पैदल स्कूल जाते हैं। इसके बाद बस से जाने वाले विद्यार्थियों की हिस्सेदारी 29.5 प्रतिशत और साइकिल से जाने वालों की 15.8 प्रतिशत है। तिपहिया का इस्तेमाल 10.5 प्रतिशत विद्यार्थी करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 14.4 प्रतिशत है। दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल 6.7 प्रतिशत विद्यार्थी करते हैं, जो शहरी क्षेत्रों में 11.5 प्रतिशत है।  रातभर की यात्राओं में करीब 73.5 प्रतिशत परिवार बस और रेल पर निर्भर रहते हैं।


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