पैकेट वाले खाद्य पदार्थों पर चीनी, वसा या नमक की अधिक मात्रा को दर्शाने वाले चेतावनी लेबल पैकेट के सामने लगाए जाने से ग्राहकों को अस्वास्थ्यकर तत्वों से होने वाले नुकसान की पहचान आसानी से होगी और वे बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह बात कहते हुए ‘लेबलिंग’ के साथ-साथ पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के सामने वाले हिस्से पर लाल रंग का षट्कोणीय चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह निशान उन उत्पादों पर लगाया जाएगा जिनमें चीनी, नमक या वसा में कम से कम एक या उससे अधिक तत्व तय सीमा से अधिक पाया जाएगा। यह सीमा आइसीएमआर-एनआईएन (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की 2024 के पोषण संबंधी दिशानिर्देशों पर आधारित है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल के. विक्रम ने कहा कि प्रस्तावित चेतावनी लेबल ग्राहकों को खरीदारी के समय यह पहचानने में मदद करेंगे कि किस खाद्य पदार्थ में अत्यधिक चीनी, नमक या वसा मौजूद है। डॉ. विक्रम ने कहा, मोटापा और उपापचय (मेटाबॉलिक) से जुड़ी बीमारियां कई कारणों से होती हैं, लेकिन खान-पान का तरीका और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का बार-बार सेवन इसके मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर ग्राहकों के पास खरीदारी करते समय पीछे लिखे विस्तृत पोषण चार्ट को पढऩे या समझने का समय और ज्ञान नहीं होता। इसलिए, सामने दिया गया एक सरल और स्पष्ट चेतावनी लेबल इस जानकारी को आसान बनाएगा, जिससे लोग अलग-अलग उत्पादों की तुलना आसानी से कर सकेंगे। हालांकि, डॉ. विक्रम ने इस बात पर जोर दिया कि लेबलिंग के साथ-साथ पोषण संबंधी व्यापक शिक्षा भी दी जानी चाहिए, ताकि लोग समझ सकें कि इन पोषक तत्वों का अत्यधिक सेवन शरीर के लिए क्यों हानिकारक है। स्टेडफास्ट न्यूट्रिशन के संस्थापक अमन पुरी ने एफएसएसएआई के इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, भारत में मोटापे और खराब खान-पान से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर लाल षट्कोणीय चेतावनी चिन्ह लगाना जनस्वास्थ्य की दृष्टि से एक स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पोषण संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे एक तालिका में दी जाती है, जिससे मुख्य जानकारी पीछे दब जाती है और ग्राहकों को तुरंत दिखाई नहीं देती। स्वास्थ्य और कल्याण (वेलनेस) कंपनी आईथ्राइव की संस्थापक एवं सीईओ मुग्धा प्रधान ने कहा कि पैकेट के सामने लेबल होना बेहद जरूरी है क्योंकि खरीदारी के दौरान लोग पैकेट को पलटकर बारीक अक्षरों में लिखी बातें नहीं पढ़ते। उन्होंने कहा, अगर यह लेबल सामने होगा, तो आप तुरंत इसे देखकर विभिन्न ब्रांड की तुलना कर सकते हैं। आपको पता होना चाहिए कि आपके शरीर में क्या जा रहा है, खासकर चीनी, नमक और वसा के मामले में। मुग्धा ने यह भी कहा कि ग्राहकों को अधिक स्पष्ट लेबल की आवश्यकता है ताकि वे ‘उत्पाद के स्वास्थ्यवर्धक होने के झूठे दावों’ या आकर्षक शब्दों से भ्रमित न हों। उन्होंने उदाहरण दिया कि किसी उत्पाद पर ग्लूटेन-फ्री लिखा हो सकता है, लेकिन फिर भी उसमें चीनी या अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैली दत्ता ने कहा कि पैकेट के सामने लगे चेतावनी दर्शाने वाले लेबल का उद्देश्य ग्राहकों को डराना नहीं, बल्कि खरीदारी का फैसला लेते समय उन्हें स्पष्ट जानकारी देना है। डॉ. दत्ता ने कहा, भारत में, जहां पोषण संबंधी साक्षरता का स्तर काफी भिन्न है, वहां स्पष्टता और दृश्यता बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे लेबल खाद्य उत्पादक कंपनियों को भी अपने उत्पादों में सुधार करने और हानिकारक तत्वों की मात्रा घटाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने रेखांकित किया कि लेबलिंग एक व्यापक जनस्वास्थ्य रणनीति का हिस्सा होनी चाहिए, जिसमें पोषण शिक्षा, बेहतर खाद्य वातावरण और किफायती पोषाहार तक आसान पहुंच शामिल हो। डॉ. दत्ता ने कहा, इसका अंतिम मकसद सेहतमंद विकल्पों को चुनना आसान बनाना और लोगों को जागरूक करना होना चाहिए।