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01-10-2026

होम बॉयर्स से ‘फ्रॉड’ मामले में वाटिका ग्रुप के 2 प्रमोटर्स गिरफ्तार

  •  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े धन-शोधन के मामले में गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी वाटिका समूह के दो प्रवर्तकों को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह जानकारी दी। एजेंसी ने एक बयान में बताया कि वाटिका लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनिल भल्ला और प्रवर्तक गौतम भल्ला को 28 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। उन्हें मंगलवार को गुरुग्राम में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए कंपनी या प्रवर्तकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। धन-शोधन का यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा वाटिका समूह और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें घर खरीदारों को धोखा देने, वादे के मुताबिक आवासीय भूखंड न आवंटित करने और इससे जुड़े अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। ईडी के अनुसार, जांच के दायरे में आए सौदों से जुड़े मुख्य फैसलों की अनिल भल्ला खुद देखरेख करते थे। वहीं गौतम भल्ला समूह के प्रमुख प्रवर्तक थे, जिन्होंने महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जमीन का स्वामित्व रखने वाली संस्थाओं में निदेशक का पद संभाला, उन पर नियंत्रण रखा और उनके कामकाज का प्रबंधन जारी रखा। एजेंसी ने कहा, एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि बड़े फैसले इन दोनों व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से लिए गए थे। ईडी के मुताबिक, साल 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने गुरुग्राम के सेक्टर 84/85 स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और सेक्टर 88ए स्थित 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' परियोजनाओं में भूखंड के लिए करीब 260 करोड़ रुपये की पूरी बिक्री राशि का भुगतान वाटिका लिमिटेड को पहले ही कर दिया था। एजेंसी ने बताया कि 2014 और 2015 में भूखंड वार एग्रीमेंट किए गए थे। इसके बाद परियोजना का नक्शा बदल दिया गया, मूल रूप से दिए गए भूखंडों के नंबर बदले गए या उनकी जगह बदल दी गई, और उस जमीन को लगातार दूसरे खरीदारों को आवंटित कर बेचा जाता रहा। ईडी ने आरोप लगाया कि वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए लगभग 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी भूखंड करीब 14 साल बीत जाने के बाद भी नहीं सौंपा गया है, जबकि वाटिका इंडिया नेक्स्ट में भी आंशिक रूप से ही भूखंड दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि इस तरह लगभग 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंडों का बड़ा हिस्सा आज भी खरीदारों को नहीं सौंपा गया है।

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होम बॉयर्स से ‘फ्रॉड’ मामले में वाटिका ग्रुप के 2 प्रमोटर्स गिरफ्तार

 प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े धन-शोधन के मामले में गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी वाटिका समूह के दो प्रवर्तकों को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह जानकारी दी। एजेंसी ने एक बयान में बताया कि वाटिका लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनिल भल्ला और प्रवर्तक गौतम भल्ला को 28 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। उन्हें मंगलवार को गुरुग्राम में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए कंपनी या प्रवर्तकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। धन-शोधन का यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा वाटिका समूह और उसके प्रवर्तकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें घर खरीदारों को धोखा देने, वादे के मुताबिक आवासीय भूखंड न आवंटित करने और इससे जुड़े अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। ईडी के अनुसार, जांच के दायरे में आए सौदों से जुड़े मुख्य फैसलों की अनिल भल्ला खुद देखरेख करते थे। वहीं गौतम भल्ला समूह के प्रमुख प्रवर्तक थे, जिन्होंने महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जमीन का स्वामित्व रखने वाली संस्थाओं में निदेशक का पद संभाला, उन पर नियंत्रण रखा और उनके कामकाज का प्रबंधन जारी रखा। एजेंसी ने कहा, एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि बड़े फैसले इन दोनों व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से लिए गए थे। ईडी के मुताबिक, साल 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने गुरुग्राम के सेक्टर 84/85 स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और सेक्टर 88ए स्थित 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' परियोजनाओं में भूखंड के लिए करीब 260 करोड़ रुपये की पूरी बिक्री राशि का भुगतान वाटिका लिमिटेड को पहले ही कर दिया था। एजेंसी ने बताया कि 2014 और 2015 में भूखंड वार एग्रीमेंट किए गए थे। इसके बाद परियोजना का नक्शा बदल दिया गया, मूल रूप से दिए गए भूखंडों के नंबर बदले गए या उनकी जगह बदल दी गई, और उस जमीन को लगातार दूसरे खरीदारों को आवंटित कर बेचा जाता रहा। ईडी ने आरोप लगाया कि वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए लगभग 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी भूखंड करीब 14 साल बीत जाने के बाद भी नहीं सौंपा गया है, जबकि वाटिका इंडिया नेक्स्ट में भी आंशिक रूप से ही भूखंड दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि इस तरह लगभग 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंडों का बड़ा हिस्सा आज भी खरीदारों को नहीं सौंपा गया है।


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