सरकार ने ‘ईज ऑफ डूईंग बिजनेस’ के तहत, रेवेन्यू और पर्यावरण विभागों को इंडस्ट्री के विस्तार को सुविधाजनक बनाने के लिए फॉरेस्ट और नॉन-फॉरेस्ट लैंड को मिलाकर एक लैंड बैंक बनाने का कार्य सौंपा गया है। सरकार का उद्देश्य फॉरेस्ट और नॉन-फॉरेस्ट लैंड को सम्मलित करके उद्योगों को विस्तार के लिए प्लॉट उपलब्ध कराना है, जिससे लैंड आवंटन में वर्षों से चली आ रही ‘बोटलनेक’ बाधाओं को दूर किया जा सके। उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लैंड कन्वर्जन नियमों को आसान और लाइसेंसिंग प्रोसेस को सुव्यवस्थित करना भी हमारी प्राथमिकता है। अधिकारी ने पारदर्शिता और शीघ्रता से काम करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘निवेशकों की सुविधा के लिए चिन्हित प्लॉट्स को निर्धारित टाइम लिमिट के भीतर ‘परिवेश’ पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।’ अधिकारी ने बताया कि ये सुधार केवल लैंड संबंधी सरकारी नियमों तक ही सीमित नहीं है, कई अन्य सेक्टर्स के लिए भी सरकारी नियमों को आसान बनाने का प्रोसेस पाइपलाइन में है। होमस्टे रजिस्ट्रेशन नियमों में ढील देकर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और बुनियादी ढांचागत क्लीयरेंस प्राप्त करने की आसान प्रक्रियाओं द्वारा एजुकेशन सेक्टर को सपोर्ट किया जा रहा है। इंवेस्टर्स की शिकायतों को अफसरों की पेचीदगियों से बचाने के लिए ऑटो-अपील सिस्टम शुरू किया जा रहा है, इस सिस्टम द्वारा पूरी जिम्मेदारी के साथ तेजी से ग्रीवेन्सेज का निपटारा किया जायेगा। इस सारे बदलाव में टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी भूमिका है। विभाग कंप्लायंस संबंधी आवश्यकताओं को डिजिटाइज करने, कागजी कार्रवाई कम करने और मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। पारदर्शिता और स्किल पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि निवेशकों और उद्यमियों को कम से कम बाधाओं का सामना करना पड़े। उद्योग, राजस्व, शिक्षा, ऊर्जा और कानून विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आपसी समन्वय स्थापित कर रहे हैं, जिससे अंतर-विभागीय तालमेल बन रहा है। इंन्वेस्टर्स को उपयोगी जानकारी प्रदान करने के लिए क्षेत्रवार डेटा विकसित किया जा रहा है, साथ ही फायर सेफ्टी नियमों और दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के कामकाज में सुधार भी जारी हैं।