कपड़ा बाजार का आकार 2024 में संचयी आधार पर सालाना 8.3' की दर से बढक़र 14.95 लाख करोड़ रुपये हो गया जो 2010 में 4.89 लाख करोड़ रुपये था। वस्त्र मंत्रालय की जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह कहा गया है। कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। ‘‘कपड़ों की घरेलू मांग, वस्त्र और परिधान बाजार: राष्ट्रीय घरेलू सर्वेक्षण 2024’’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में घरेलू क्षेत्र में वस्त्र और परिधान की घरेलू मांग का अनुमान लगाया गया है। कृत्रिम रेशा और मिश्रित रेशा आधारित उत्पादों का योगदान 52.2' है। इसके बाद कपास आधारित उत्पादों का योगदान 41.2' है। दूसरी ओर, रेशम और ऊनी रेशा आधारित उत्पादों का योगदान क्रमश: 5.2' और 1.3' है। कुल मिलाकर, कृत्रिम रेशा और मिश्रित वस्त्रों की मांग में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यह संचयी रूप से 8.28' की सालाना वृद्धि के साथ 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गई जो 2010 में 1.47 लाख करोड़ रुपये थी। वस्त्र मंत्रालय ने कहा, ‘‘जहां कपास आधारित उत्पाद उपभोक्ताओं की पसंद के प्रतिरूप में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए हैं, वहीं कृत्रिम रेशा आधारित उत्पादों के प्रति पसंद में इस अवधि के दौरान काफी वृद्धि हुई है।’’ यह व्यापक अध्ययन नीति निर्माताओं के अलावा व्यापार और उद्योग से जुड़े संबंधित पक्षों के लिए इस क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी रणनीति विकसित करने को एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में कार्य करता है। कुल बाजार में, परिवारों का योगदान बढक़र 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है जो 2010 में 4.18 लाख करोड़ रुपये था। इस क्षेत्र ने देश में वस्त्रों की घरेलू मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान, प्रति व्यक्ति मांग संचयी रूप से सालाना 7.8 प्रतिशत की दर से बढक़र 2024 में 6,066 रुपये हो गई, जो 2010 में 2,119 रुपये थी। अनुमान के अनुसार, इस अवधि के दौरान व्यक्तियों द्वारा वस्त्रों की प्रति व्यक्ति मांग में मजबूत वृद्धि हुई है। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि महिला उपभोक्ता वस्त्र उत्पादों की प्रमुख खरीदार हैं। उनका वस्त्र खरीद में 55.5 प्रतिशत का योगदान है, जबकि पुरुषों का योगदान 44.5 प्रतिशत है।