प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य और एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारत को हर एक से दो साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए और भू-राजनीतिक तनाव में मौजूदा विराम का उपयोग लंबे समय से लंबित संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि मौजूदा विराम विद्युतीकरण, आवास, शहरी अवसंरचना और पर्यटन में सुधारों को गति देकर विकास में लचीलापन लाने का अवसर है। विश्लेषक ने कहा कि अस्थिरता अब छिटपुट नहीं बल्कि संरचनात्मक है, लेकिन साथ ही कहा कि भारत इतिहास के पिछले दौरों की तुलना में अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है। कोटक प्राइवेट की एक प्रेस रिलीज में मिश्रा ने कहा, इतिहास में किसी भी अन्य समय की तुलना में, हम इससे निपटने के लिए कहीं बेहतर तरीके से तैयार हैं। उन्होंने एक वरिष्ठ नीति निर्माता के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए कहा, जिन्होंने आज के माहौल की तुलना 1989-93 की अशांत अवधि से की थी। हालांकि, मिश्रा ने कहा कि भारत के पास अब अधिक गहन पूंजी बाजार, अधिक मजबूत बाह्य संतुलन और अधिक नीतिगत विश्वसनीयता है। मिश्रा ने तर्क दिया कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के आह्वान के बाद तत्काल तनाव बढऩे की आशंकाएं भले ही कम हो गई हों, लेकिन व्यापक आर्थिक संकटों का चक्र अभी समाप्त होने की संभावना नहीं है।