उद्योग संगठनों ने संसद में जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह व्यवसायों पर अनुपालन के बोझ को काफी कम कर देगा, विवाद निपटान में तेजी लाएगा और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में मदद करेगा। संसद ने कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने तथा लोगों के उत्पीडऩ को रोकने के लिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन करने और लगभग 1,000 छोटे अपराधों को फौजदारी की श्रेणी से बाहर करने के लिए बृहस्पतिवार को जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा, एक हजार से अधिक अपराधों को गैर-आपराधिक बनाकर और दंड को संतुलित करके यह सुधार नियमों में अधिक स्पष्टता, भरोसेमंद व्यवस्था और संतुलन लाता है। गोयनका ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से कारोबार करना आसान होगा, नए उद्यम और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारत की वैश्विक निवेश स्थल के रूप में स्थिति और मजबूत होगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘सीआईआई जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने का स्वागत करता है जो एक बड़ी उपलब्धि है। यह विधेयक निवेश तथा वृद्धि के अनुकूल आधुनिक, विश्वास आधारित नियामक परिवेश बनाने के भारत के संकल्प की पुष्टि करता है।’’ उन्होंने कहा कि विधेयक के जरिये सार्थक संरचनात्मक सुधार किए गए हैं, जो व्यवसायों पर अनुपालन के बोझ को काफी कम करेंगे, विवाद समाधान में तेजी लाएंगे और पहले से ही दबाव झेल रही न्यायिक प्रणाली पर मुकदमों के बोझ को कम करेंगे। बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि व्यवसाय अब अधिक आत्मविश्वास के साथ काम कर सकते हैं और उद्यमी बिना किसी डर के निर्णय ले सकते हैं।