भारत का दवा एक्सपोर्ट पिछले वित्त वर्ष के फरवरी तक सालाना आधार पर पांच प्रतिशत की वृद्धि के साथ 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। भारतीय दवा एक्सपोर्ट संवर्धन परिषद के महानिदेशक के राजा भानु ने कहा कि वर्तमान में लगभग 60 बिलियन डॉलर वाले इस क्षेत्र के 2030 तक बढक़र 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। उन्होंने ‘चिंतन शिविर: औषधि एक्सपोर्ट में वृद्धि’ के उद्घाटन सत्र में कहा, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दवा एक्सपोर्ट ने अपनी वृद्धि की गति बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान एक्सपोर्ट 28.29 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.6' अधिक है। इस वृद्धि में तैयार दवाएं, जैविक उत्पाद, टीके और आयुष उत्पादों का प्रमुख योगदान रहा। भानु ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में दवा एक्सपोर्ट 30.47 बिलियन डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 9.4' की वृद्धि को दर्शाता है, जबकि उस समय वैश्विक कीमतों का दबाव और व्यापार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था। भविष्य की योजना के बारे में भानु ने कहा कि वर्ष 2030 तक 65 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नीतियों को प्राथमिकता देना, पारंपरिक बाजारों से आगे नए बाजारों में विस्तार करना, विदेशी निवेश बढ़ाना और नियमों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक होगा। दवा उत्पादन के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है और उसका एक्सपोर्ट 200 से अधिक देशों तक पहुंचता है। भारत के 60' से अधिक दवा एक्सपोर्ट कड़े नियमों वाले बाजारों में होता है, जो इस उद्योग की गुणवत्ता और मानकों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत और यूरोप की 19 प्रतिशत है।