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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-06-2026

ऑटो सेल्स में हाई फ्लाई की हवा आई...

  •  साल के पहले पांच महीने (जनवरी-मई) के बीच कुल पीवी सेल्स में करीब 20 परसेंट की ग्रोथ...कोई आम बात नहीं है। इसलिए अमेरिकी इंवेस्टमेंट बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) की ग्लोबल रिसर्च एनेलिस्ट गुंजन पृथ्यानी का मानना है कि भारत का पीवी मार्केट ग्रोथ की हाई ट्रेजेक्टरी की ओर बढ़ रहा है। खासतौर पर ईवी सैक्टर में एक्टिविटी बहुत तेज है। साथ में लगी टेबल 1 के अनुसार पिछले वर्ष के पहले पांच महीनों में कुल 18.39 लाख पीवी की सेल्स हुई थी जो वर्ष 2026 के इन्हीं पांच महीनों में 19.90 परसेंट की ग्रोथ के साथ 22.04 लाख यूनिट्स तक पहुंच गए। इसी तरह टेबल 2 को देखें तो ईवी की फास्ट्रेक हो रही मेनस्ट्रीमिंग का अंदाजा हो जाता है। इसमें सेल्स करीब 50 हजार यूनिट्स से सीधे डबल होकर 1.07 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई है। हालांकि पृथ्यानी ने चेतावनी दी है कि स्टील और अन्य मेटल्स की प्राइस से ऑटोमोबाइल कंपनियों के मुनाफे पर शॉर्ट टर्म में दबाव बढ़ सकता है।  साथ ही प्राइस बढऩे से डिमांड डायनामिक्स पर डेंट भी आ सकता है। पृथ्यानी के अनुसार ईरान वॉर के कारण फ्यूल सप्लाई को लेकर हुई भयंकर बहस और फ्यूल प्राइस बढऩे का ईवी मार्केट को फायदा मिल रहा है। साथ ही कंपनियों के ईवी मॉडल लॉइनअप का विस्तार करने से भी ईवी नए कस्टमर कैचमेंट तक पहुंच पा रहे हैं।  उन्होंने कहा, साफ है कि ईवी को लेकर इंटरेस्ट में तेज रिवाइवल हुआ है। पिछले कुछ महीनों के दौरान न केवल ईवी बल्कि सीएनजी वेहीकल्स की बुकिंग और इनक्वायरी में तेज उछाल आया है। पृथ्यानी के अनुसार सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस समय ऑटो इंडस्ट्री में डिमांड के नहीं बल्कि सप्लाई के चैलेंज हैं। ज्यादातर बड़ी कंपनियां डिमांड पूरी नहीं कर पा रही हैं। प्लांट फुलकैपेसिटी पर चल रहे हैं और बैकलॉग बढ़ रहा है। इसलिए सभी प्रमुख ऑटो कंपनियां अब कैपेसिटी बढ़ाने पर इंवेस्ट कर रही हैं। उनका मानना है कि ईवी को लेकर बढ़ता उत्साह केवल पेट्रोल और डीजल की प्राइस बढऩे के कारण नहीं है। बड़ा कारण बाजार में बड़ी संख्या में नए इलेक्ट्रिक मॉडल्स का आना है। अमूमन हर लिस्टेड ऑटोमेकर के पास कोई न कोई ईवी मॉडल मौजूद है। बेहतर फीचर, नई तकनीक और ग्राहकों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होने से ईवी कैटेगरी अब प्राइम मूवर यानी शुरुआती बायर के दायरे से बाहर निकलकर अपने कस्टमर बेस का विस्तार कर रही है। लेकिन अभी इसे कॉमन मैन का मार्केट समझ लेना ठीक नहीं है। पीवी सैगमेंट में ईवी का दखल ज्यादातर प्रीमियम एसयूवी में बढ़ रहा है वहीं टू-व्हीलर में इलेक्ट्रिक स्कूटर लोकप्रिय बने हुए हैं। अभी ईवी का जनसामान्यीकरण नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल निश्चित रूप से इंटरेस्ट रिवाइव हुआ है। उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में कॉस्टिंग और बायर की परचेज पावर का चैलेंज सामने आ सकता है। गाड़ी के साथ ही फ्यूल भी महंगा होना सेंटिमेंट पर दोहरा असर डाल सकता है और डिमांड पर प्रेशर शुरू हो सकता है। खासकर कई साल बाद रिवाइव हुआ एंट्री लेवल पीवी सैगमेंट और टू-व्हीलर प्राइस सेंसिटिव कैटेगरी हैं।

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ऑटो सेल्स में हाई फ्लाई की हवा आई...

 साल के पहले पांच महीने (जनवरी-मई) के बीच कुल पीवी सेल्स में करीब 20 परसेंट की ग्रोथ...कोई आम बात नहीं है। इसलिए अमेरिकी इंवेस्टमेंट बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) की ग्लोबल रिसर्च एनेलिस्ट गुंजन पृथ्यानी का मानना है कि भारत का पीवी मार्केट ग्रोथ की हाई ट्रेजेक्टरी की ओर बढ़ रहा है। खासतौर पर ईवी सैक्टर में एक्टिविटी बहुत तेज है। साथ में लगी टेबल 1 के अनुसार पिछले वर्ष के पहले पांच महीनों में कुल 18.39 लाख पीवी की सेल्स हुई थी जो वर्ष 2026 के इन्हीं पांच महीनों में 19.90 परसेंट की ग्रोथ के साथ 22.04 लाख यूनिट्स तक पहुंच गए। इसी तरह टेबल 2 को देखें तो ईवी की फास्ट्रेक हो रही मेनस्ट्रीमिंग का अंदाजा हो जाता है। इसमें सेल्स करीब 50 हजार यूनिट्स से सीधे डबल होकर 1.07 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई है। हालांकि पृथ्यानी ने चेतावनी दी है कि स्टील और अन्य मेटल्स की प्राइस से ऑटोमोबाइल कंपनियों के मुनाफे पर शॉर्ट टर्म में दबाव बढ़ सकता है।  साथ ही प्राइस बढऩे से डिमांड डायनामिक्स पर डेंट भी आ सकता है। पृथ्यानी के अनुसार ईरान वॉर के कारण फ्यूल सप्लाई को लेकर हुई भयंकर बहस और फ्यूल प्राइस बढऩे का ईवी मार्केट को फायदा मिल रहा है। साथ ही कंपनियों के ईवी मॉडल लॉइनअप का विस्तार करने से भी ईवी नए कस्टमर कैचमेंट तक पहुंच पा रहे हैं।  उन्होंने कहा, साफ है कि ईवी को लेकर इंटरेस्ट में तेज रिवाइवल हुआ है। पिछले कुछ महीनों के दौरान न केवल ईवी बल्कि सीएनजी वेहीकल्स की बुकिंग और इनक्वायरी में तेज उछाल आया है। पृथ्यानी के अनुसार सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस समय ऑटो इंडस्ट्री में डिमांड के नहीं बल्कि सप्लाई के चैलेंज हैं। ज्यादातर बड़ी कंपनियां डिमांड पूरी नहीं कर पा रही हैं। प्लांट फुलकैपेसिटी पर चल रहे हैं और बैकलॉग बढ़ रहा है। इसलिए सभी प्रमुख ऑटो कंपनियां अब कैपेसिटी बढ़ाने पर इंवेस्ट कर रही हैं। उनका मानना है कि ईवी को लेकर बढ़ता उत्साह केवल पेट्रोल और डीजल की प्राइस बढऩे के कारण नहीं है। बड़ा कारण बाजार में बड़ी संख्या में नए इलेक्ट्रिक मॉडल्स का आना है। अमूमन हर लिस्टेड ऑटोमेकर के पास कोई न कोई ईवी मॉडल मौजूद है। बेहतर फीचर, नई तकनीक और ग्राहकों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होने से ईवी कैटेगरी अब प्राइम मूवर यानी शुरुआती बायर के दायरे से बाहर निकलकर अपने कस्टमर बेस का विस्तार कर रही है। लेकिन अभी इसे कॉमन मैन का मार्केट समझ लेना ठीक नहीं है। पीवी सैगमेंट में ईवी का दखल ज्यादातर प्रीमियम एसयूवी में बढ़ रहा है वहीं टू-व्हीलर में इलेक्ट्रिक स्कूटर लोकप्रिय बने हुए हैं। अभी ईवी का जनसामान्यीकरण नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल निश्चित रूप से इंटरेस्ट रिवाइव हुआ है। उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में कॉस्टिंग और बायर की परचेज पावर का चैलेंज सामने आ सकता है। गाड़ी के साथ ही फ्यूल भी महंगा होना सेंटिमेंट पर दोहरा असर डाल सकता है और डिमांड पर प्रेशर शुरू हो सकता है। खासकर कई साल बाद रिवाइव हुआ एंट्री लेवल पीवी सैगमेंट और टू-व्हीलर प्राइस सेंसिटिव कैटेगरी हैं।


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