भारत ने संकेत दिया है कि यदि ब्रिटेन अपने प्रस्तावित स्टील इंपोर्ट प्रतिबंधों (रेस्ट्रिक्शन) का समाधान नहीं करता है तो भारत स्कॉच व्हिस्की जैसे प्रोडक्ट्स को दी गई रियायतों को रिव्यू कर सकता है। भारत और यूके के बीच एफटीए मई 2025 में हुआ था और इसके अगले कुछ महीने में लागू होने की उम्मीद है। लेकिन यूके ने अपनी घरेलू स्टील इंडस्ट्री की सुरक्षा के लिए स्टील इंपोर्ट कोटा घटाने और कुछ इंपोर्ट पर टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। एक भारतीय व्यापार अधिकारी ने कहा, अब गेंद उनके पाले में है। यदि वे एफटीए की भावना का सम्मान नहीं करते हैं, तो हम भी रियायतों पर पुनर्विचार कर सकते हैं। यूके के ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल की इंडिया के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के साथ दिल्ली में मंगलवार को मीटिंग तय है। एफटीए के तहत इंडिया ने स्कॉच व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी को 150' से घटाकर पहले 75' करने और अगले 10 वर्ष में घटाकर 40' तक लाने पर सहमति दी थी। एफटीए से वर्ष 2040 तक बाइलेटरल ट्रेड में लगभग 34 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। भारत के अलावा ब्राजील, तुर्की, जापान, साउथ कोरिया, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी डब्ल्यूटीओ में ब्रिटेन के नए स्टील उपायों को लेकर चिंता जताई है। यदि इंडिया और यूके के बीच स्टील को लेकर मतभेद बढ़ते हैं तो इसकी चपेट में स्कॉच व्हिस्की, ऑटोमोबाइल और अन्य प्रमुख प्रोडक्ट्स भी आ सकते हैं।