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09-04-2026

इस वर्ष गोल्ड-सिल्वर में बड़े उछाल की संभावना कम

  •  घरेलू बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में मध्यम रूप से तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध का डर और वैश्विक स्तर पर मंदी का बढ़ता जोखिम ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग को बढ़ा सकता है, भले ही ऊंची ब्याज दरें कीमतों में तेज़ उछाल को सीमित कर सकती हैं। घरेलू मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, चांदी के वायदा भाव एक अप्रैल, 2025 को दर्ज 99,461 रुपये प्रति किलोग्राम से बढक़र 1,41,431 रुपये, या 142.2 प्रतिशत बढ़ गए; जबकि सोना इसी अवधि के दौरान दर्ज 90,503 रुपये प्रति 10 ग्राम से 60,258 रुपये या 67 प्रतिशत बढ़ गया।  यह दृष्टिकोण दशकों में कीमती धातुओं के लिए सबसे मज़बूत वर्षों में से एक के बाद आया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चांदी में 142 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी आई, जबकि सोने में लगभग 67 प्रतिशत की तेज़ी आई। जिसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रशासन का शुल्क युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी, आपूर्ति की तंग स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही। चॉइस ब्रोकिंग में जिंस और मुद्रा विश्लेषक आमिर मकदा ने बताया, ‘‘वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सोने और चांदी का दृष्टिकोण मध्यम रूप से तेज़ी वाला रहेगा। चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और वैश्विक मंदी के डर के कारण एक मुश्किल दौर से गुजऱ रही है, इसलिए ‘सेफ-हेवन’ संपत्तियों की मांग बढ़ेगी।’’ मज़बूत बढ़त के बावजूद, वित्त वर्ष के अंत में सर्राफा की कीमतों में तेज़ गिरावट या तकनीकी सुधार देखने को मिला। अकेले मार्च में, सोने की कीमतें 11,343 रुपये, या सात प्रतिशत नीचे आ गईं, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में चांदी 41,752 रुपये, या 15 प्रतिशत टूट गई। हालांकि, मकदा ने आगाह किया कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने से सर्राफा कीमतों में तेज़ उछाल सीमित हो सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी के शानदार प्रदर्शन के बारे में बताते हुए मकदा ने इसका श्रेय लगातार पांच साल से बनी हुई आपूर्ति की कमी, सोलर फोटोवोल्टिक और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से रिकॉर्ड मांग, और ईटीएफ में संस्थागत निवेश में तेज़ी को दिया। इन सबने मिलकर चांदी के अपेक्षाकृत छोटे बाज़ार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा दिया। आगे के बारे में मकदा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में चांदी में मध्यम तेज़ी बनी रहेगी। घरेलू बाज़ार में कीमतें मुद्रा में उतार-चढ़ाव के आधार पर, 2.75 लाख से 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है। अमेरिकी डॉलर के संबंध में, मकदा को उम्मीद है कि फेडरल रिज़र्व की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण इसमें उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कुल मिलाकर उन्होंने ने कहा कि 2026-27 में बीच-बीच में आने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद, भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंकों की मांग और औद्योगिक खपत सोने-चांदी की कीमतों को सहारा देते रहेंगे।

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इस वर्ष गोल्ड-सिल्वर में बड़े उछाल की संभावना कम

 घरेलू बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में मध्यम रूप से तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध का डर और वैश्विक स्तर पर मंदी का बढ़ता जोखिम ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग को बढ़ा सकता है, भले ही ऊंची ब्याज दरें कीमतों में तेज़ उछाल को सीमित कर सकती हैं। घरेलू मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, चांदी के वायदा भाव एक अप्रैल, 2025 को दर्ज 99,461 रुपये प्रति किलोग्राम से बढक़र 1,41,431 रुपये, या 142.2 प्रतिशत बढ़ गए; जबकि सोना इसी अवधि के दौरान दर्ज 90,503 रुपये प्रति 10 ग्राम से 60,258 रुपये या 67 प्रतिशत बढ़ गया।  यह दृष्टिकोण दशकों में कीमती धातुओं के लिए सबसे मज़बूत वर्षों में से एक के बाद आया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चांदी में 142 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी आई, जबकि सोने में लगभग 67 प्रतिशत की तेज़ी आई। जिसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रशासन का शुल्क युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी, आपूर्ति की तंग स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रही। चॉइस ब्रोकिंग में जिंस और मुद्रा विश्लेषक आमिर मकदा ने बताया, ‘‘वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सोने और चांदी का दृष्टिकोण मध्यम रूप से तेज़ी वाला रहेगा। चूंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और वैश्विक मंदी के डर के कारण एक मुश्किल दौर से गुजऱ रही है, इसलिए ‘सेफ-हेवन’ संपत्तियों की मांग बढ़ेगी।’’ मज़बूत बढ़त के बावजूद, वित्त वर्ष के अंत में सर्राफा की कीमतों में तेज़ गिरावट या तकनीकी सुधार देखने को मिला। अकेले मार्च में, सोने की कीमतें 11,343 रुपये, या सात प्रतिशत नीचे आ गईं, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में चांदी 41,752 रुपये, या 15 प्रतिशत टूट गई। हालांकि, मकदा ने आगाह किया कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने से सर्राफा कीमतों में तेज़ उछाल सीमित हो सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी के शानदार प्रदर्शन के बारे में बताते हुए मकदा ने इसका श्रेय लगातार पांच साल से बनी हुई आपूर्ति की कमी, सोलर फोटोवोल्टिक और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से रिकॉर्ड मांग, और ईटीएफ में संस्थागत निवेश में तेज़ी को दिया। इन सबने मिलकर चांदी के अपेक्षाकृत छोटे बाज़ार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा दिया। आगे के बारे में मकदा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में चांदी में मध्यम तेज़ी बनी रहेगी। घरेलू बाज़ार में कीमतें मुद्रा में उतार-चढ़ाव के आधार पर, 2.75 लाख से 3.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है। अमेरिकी डॉलर के संबंध में, मकदा को उम्मीद है कि फेडरल रिज़र्व की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण इसमें उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कुल मिलाकर उन्होंने ने कहा कि 2026-27 में बीच-बीच में आने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद, भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंकों की मांग और औद्योगिक खपत सोने-चांदी की कीमतों को सहारा देते रहेंगे।


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