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08-05-2026

वैलनैस सेगमेंट में व्यापक बदलाव की जरूरत

  • प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने देश में देखभाल क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा है कि वर्ष 2050 तक इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक कर्मियों की मांग हो सकती है। ईएसी-पीएम ने अपने एक कार्यपत्र में देखभाल क्षेत्र के लिए अलग कोष बनाने, कुशल एवं उचित वेतन पाने वाले कर्मियों की संख्या बढ़ाने तथा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के पैसे को इस क्षेत्र की योजनाओं में लगाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में ‘केयरप्रेन्योर कोष’ बनाकर देखभाल उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं को रियायती वित्त उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही वित्त मंत्रालय के तहत ‘परिवार सेवा कोष’ स्थापित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को अभिभावक अवकाश में चरणबद्ध तरीके से सुधार करने की सलाह भी दी गई है। इसके तहत निजी क्षेत्र में वेतन सहित पितृत्व अवकाश से शुरुआत कर संतुलित अभिभावक अवकाश नीति लागू करने की सिफारिश की गई है। सलाहकार परिषद ने कहा है कि इस क्षेत्र में निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, परिवारों पर देखभाल का बोझ कम होगा और यह जिम्मेदारी सरकार एवं बाजार के बीच साझा हो सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों की जनसंख्या में बढ़ोतरी, घटती जन्म दर और तेज शहरीकरण के कारण पारंपरिक पारिवारिक ढांचे के कमजोर होते जाने से देखभाल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं के बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्य देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 15-17 प्रतिशत के बराबर है।

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वैलनैस सेगमेंट में व्यापक बदलाव की जरूरत

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने देश में देखभाल क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा है कि वर्ष 2050 तक इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक कर्मियों की मांग हो सकती है। ईएसी-पीएम ने अपने एक कार्यपत्र में देखभाल क्षेत्र के लिए अलग कोष बनाने, कुशल एवं उचित वेतन पाने वाले कर्मियों की संख्या बढ़ाने तथा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के पैसे को इस क्षेत्र की योजनाओं में लगाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में ‘केयरप्रेन्योर कोष’ बनाकर देखभाल उद्यमियों और सहकारी संस्थाओं को रियायती वित्त उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही वित्त मंत्रालय के तहत ‘परिवार सेवा कोष’ स्थापित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को अभिभावक अवकाश में चरणबद्ध तरीके से सुधार करने की सलाह भी दी गई है। इसके तहत निजी क्षेत्र में वेतन सहित पितृत्व अवकाश से शुरुआत कर संतुलित अभिभावक अवकाश नीति लागू करने की सिफारिश की गई है। सलाहकार परिषद ने कहा है कि इस क्षेत्र में निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा, परिवारों पर देखभाल का बोझ कम होगा और यह जिम्मेदारी सरकार एवं बाजार के बीच साझा हो सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों की जनसंख्या में बढ़ोतरी, घटती जन्म दर और तेज शहरीकरण के कारण पारंपरिक पारिवारिक ढांचे के कमजोर होते जाने से देखभाल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं के बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्य देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 15-17 प्रतिशत के बराबर है।


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