TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-04-2026

‘अपनी ही प्रक्रियागत लापरवाही से प्रॉफिट नहीं कमा सकता है बैंक’

  •  महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को फटकार लगाते हुए कहा है कि बैंक अपनी ही प्रक्रियागत लापरवाही से लाभ नहीं कमा सकता है और ऐसे धन पर ब्याज नहीं वसूल सकता जो असल में ग्राहक को मिला ही नहीं। इसके साथ ही आयोग ने दक्षिण मुंबई जिला आयोग के उस आदेश के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का दोषी ठहराया गया था। आयोग ने कहा कि बैंक आरबीआई के नियामकीय मानकों का पालन न करने की अपनी विफलता का लाभ नहीं उठा सकता है और इसके लिए उपभोक्ता को दंडित नहीं किया जा सकता है। यह मामला 2012 का है, जब एक धागा प्रसंस्करण इकाई ने बैंक ऑफ इंडिया  से मिली ओवरड्राफ्ट सुविधा को स्टैंडर्ड चार्टर्ड में स्थानांतरित करने की कोशिश की थी। हालांकि, आरबीआई दिशानिर्देशों के पालन में कमी के चलते यह लेनदेन पूरा नहीं हो सका था। इसके बावजूद स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने कथित क्रेडिट राशि पर फर्म से ब्याज वसूला और 6.5 लाख रुपये का प्रसंस्करण शुल्क लौटाने से इनकार कर दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने 2018 में बैंक को यह राशि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, 2.7 लाख रुपये ब्याज को वापस करने और मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। इस आदेश को राज्य आयोग ने सही ठहराया।

Share
‘अपनी ही प्रक्रियागत लापरवाही से प्रॉफिट नहीं कमा सकता है बैंक’

 महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को फटकार लगाते हुए कहा है कि बैंक अपनी ही प्रक्रियागत लापरवाही से लाभ नहीं कमा सकता है और ऐसे धन पर ब्याज नहीं वसूल सकता जो असल में ग्राहक को मिला ही नहीं। इसके साथ ही आयोग ने दक्षिण मुंबई जिला आयोग के उस आदेश के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का दोषी ठहराया गया था। आयोग ने कहा कि बैंक आरबीआई के नियामकीय मानकों का पालन न करने की अपनी विफलता का लाभ नहीं उठा सकता है और इसके लिए उपभोक्ता को दंडित नहीं किया जा सकता है। यह मामला 2012 का है, जब एक धागा प्रसंस्करण इकाई ने बैंक ऑफ इंडिया  से मिली ओवरड्राफ्ट सुविधा को स्टैंडर्ड चार्टर्ड में स्थानांतरित करने की कोशिश की थी। हालांकि, आरबीआई दिशानिर्देशों के पालन में कमी के चलते यह लेनदेन पूरा नहीं हो सका था। इसके बावजूद स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने कथित क्रेडिट राशि पर फर्म से ब्याज वसूला और 6.5 लाख रुपये का प्रसंस्करण शुल्क लौटाने से इनकार कर दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने 2018 में बैंक को यह राशि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, 2.7 लाख रुपये ब्याज को वापस करने और मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। इस आदेश को राज्य आयोग ने सही ठहराया।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news