इंवेस्टमेंट के बाजारों से 3-4 साल पहले यानि कोविड संकट के बाद जुड़े लाखों करोड़ों इंवेस्टरों ने पहली बार शेयर-बाजारों की गिरावट या मंदी को करीब से महसूस किया है जो मानते थे कि जल्दी-जल्दी पैसा बनाने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं होता। शाायद यह सही भी है पर इतिहास बताता है कि शेयर बाजारों से वहीं अच्छी वैल्थ कमा पाया है जिसका खरीदने का समय सही रहा हो या जो लम्बे समय तक अपना इंवेस्टमेंट बनाए रखने में कामयाब रहा हो। इन दोनों फार्मूलो को अपने निर्णयों में फिट बैठाकर आज की मंदी में भी अपने इंवेस्टमेंट पर कितने लोग अच्छी रिटर्न हासिल कर पा रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है। वैसे तो यह सच है कि बाजारों में एंट्री करने और बाहर निकलने के टाइम का सही अंदाजा कोई नहीं लगा सकता लेकिन जब शानदार कारोबार करने वाली अच्छी कंपनियों के शेयर अपनी पीक रेटो से 50-60 प्रतिशत कम पर उपलब्ध हो तो घबराहट में सोच-विचार करने की बजाए इस Opportunity को हासिल करने पर ध्यान लगाया जा सकता है। दुनियाभर में शेयर बाजारों से शानदार रिटर्न हासिल करने वाले लगभग सभी इंवेस्टरों ने ऐसे समय में ही खरीददारी की थी जब ज्यादातर लोग बाजारों से दूरी बना रहे थे या कहें तो घाटे की चिंता में डूबे हुए थे। इंवेस्टरों को अपना ज्यादातर समय व एनर्जी यह जानने में लगाना चाहिए कि किसी माहौल में व उसके बाद कौनसे कारोबार अच्छा परर्फोम कर सकते हैं लेकिन सचाई यह है कि खुद ऐसा करने की इच्छाशक्ति रखने वाले इंवेस्टर आजकल ज्यादा नहीं रहे। यही नहीं युद्ध के माहौल में आज मौजूद Opportunities को हासिल करने की पॉवर यानि Liquidity के साथ बैठे इंवेस्टर ढूंढने से भी बहुत कम संख्या में मिलने लगे है क्योंकि ज्यादातर इंवेस्टर अपनी पूरी ताकत के साथ हमेशा बाजारों में Invested रहते है।
बाजारों में आज ऐसी कंपनियों के शेयर अच्छी कीमतों पर उपलब्ध है जो कम्पीटिशन से दूर है, मार्केट लीडर है, जिनका प्रोफिट मार्जिन अच्छा है, जिनका मैनेजमेंट शेयर होल्डर का ध्यान रखता है, जो अपने प्रोफिट को कंपनी की ग्रोथ के लिए कंपनी में ही इंवेस्ट करती है, जिनके कारोबार पर युद्ध या आपदा जैसी घटनाएं ज्यादा असर नहीं डालती और जिनके आने वाले 8-10 सालों का फ्यूचर अच्छा लगता है। चुनौती यह है कि ऐसी कंपनियों का पता कैसे लगाया जाए? इसके लिए पढऩा व जानने की इच्छा रखना जरूरी है और इस काम को नफा नुकसान कई वर्षों से आसान बनाता आ रहा है। पिछले सोमवार को नफा नुकसान में ऐसे शेयरों की लिस्ट छपी थी जो आज के माहौल में भी 52 वीक के उच्च लेवल के आस-पास ट्रेड कर रहे हैं। इनमें से कौनसी कंपनियां उपर दिए गए फार्मूलो पर फिट बैठती है यह पता लगाने का काम वही इंवेस्टर कर सकता है जो बाजारों में ट्रेडिंग का खतरनाक खेल खेलने की बजाए इंवेस्टमेंट से कमाने की इच्छा रखता है। इसी तरह नफा नुकसान के मंगलवार के अंक में एक रिपोर्ट छपी थी जो बता रही थी कि 42 प्रतिशत शेयर 52 वीक के न्यूनतम लेवल पर ट्रेड कर रहे हैं लेकिन इनमें से भी कई शेयर ऐसे है जो आने वाले समय में अच्छी परर्फोमेंस दिखा सकते है बशर्ते वे कंपनियां उपर दिए गए फार्मूलों के अनुसार व्यवहार कर रही हो। इंवेस्टमेंट का एक नियम है जिसे बहुत कम इंवेस्टर फॉलो करते हैं जो है “Know What You Own” यानि जो आपके पास है उसे जानना व समझना। ट्रेडिंग की टिप्स पर दांव लगाने वाले ज्यादातर लोग इस नियम को स्वीकार नहीं कर पाते लेकिन ऐसे ही 2-4 शानदार नियमों के दम पर शेयर बाजार कई इंवेस्टरों के लिए वैल्थ बनाने का जरिया बना है जिनकी उपयोगिता को व्यवहार में लाने की जरूरत है। ऐसा कहा जा सकता है कि अभी बाजारों में कई जगह Sale लग चुकी है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी कारोबार किसी भी कीमत पर खरीदने लायक पॉवर नहीं रखता यानि उसकी कोई न कोई सही कीमत जरूर होती है और पिछले कई महीनों में चल रही गिरावट सही कीमत पर इंवेस्ट करने के मौके दे रही है।जब शानदार कंपनियों के शेयर डुबकी लगाते है तो उनमें ऊपर आने की छटपटाहट भी ज्यादा डवलप होने लगती है और युद्ध के बीच अब जो माहौल बन रहा है उसमें तेजी से ऊपर आने के कई उदाहरण हमें आने वाले समय में दिखाई देंगे, ऐसा कहा जा सकता है।