गल्फ में चल रहे वॉर के कारण दुनियाभर में ऑइल और गैस की किल्लत हो गई है। लेकिन पानी की किल्लत वाले इस इलाके में तनाव के कारण भारत में पानी महंगा होने लगा है। देश के सबसे बड़े पैकेज्ड वॉटर ब्रांड बिसलेरी ने प्राइस में 11 परसेंट की बढ़ोतरी की है। होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्ट हो रही है जिसका असर तेल और गैस ही नहीं बल्कि कीटनाशनक केमिकल, फर्टिलाइजर बनाने के लिए जरूरी गैस, और प्लास्टिक व पैकेजिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। इसी नाकेबंदी की चपेट में भारत का बोतलबंद पानी का सेक्टर भी आ रहा है। भारत में इस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी ने हाल ही में कीमतों में 11 परसेंट की बढ़ोतरी की है, जिससे 12 एक-लीटर वाली बोतलों के एक बॉक्स की कीमत 24 रुपये बढ़ गई है। बैली और क्लियर प्रीमियम वाटर जैसे दूसरे ब्रांड्स ने भी प्राइस में बढ़ोतरी की है। बिसलेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज के अनुसार पैकेजिंग मैटीरियल की लागत में भारी बढ़ोतरी की वजह से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की कीमत बढक़र 20 रुपये/लीटर हो गई है। पिछले दो सप्ताह में ही पैकेजिंग मैटीरियल की कॉस्ट 70 परसेंट से भी ज्यादा बढ़ गई है। पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर इसलिए महंगा हो रहा है क्योंकि बोतलबंद पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली पैट बोतल बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल बनाने में तेल से बना पॉलिमर इस्तेमाल किया जाता है। प्रोडक्शन और सप्लाई चेन ठप हो जाने के चलते पॉलिमर की कीमतों में लगभग 50 परसेंट तक का उछाल आया है। इससे प्लास्टिक के दानों की कीमत 115 रुपये से बढक़र 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। एनेलिस्ट्स के अनुसार पैट प्रीफॉर्म की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरी पैकेजिंग इंडस्ट्री पर पड़ता है। पैट पैकेजिंग का इस्तेमाल बेवरेज (ड्रिंक्स), फूड डिलीवरी, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है। डेटा फॉर इंडिया की एक स्टडी के अनुसार लगभग 15 परसेंट शहरी परिवार और 6 परसेंट ग्रामीण परिवार अपनी पीने की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पैट बोतलों की सप्लाई के हालात बहुत गंभीर हैं और 20 परसेंट पैकेज्ड वॉटर प्लांट फिलहाल बंद हैं या बहुत कम कैपेसिटी पर काम कर रहे हैं।