करीब एक साल के इंतजार के बाद टेस्ला वाले एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने पिछले दिनों आईपीओ के लिए फाइल किया। एलन मस्क कहते हैं कि इस फंड का इस्तेमाल रॉकेटमेकर कंपनी स्पेसएक्स को एआई पावरहाउस में बदलने के लिए किया जाएगा। रिपोर्ट कहती हैं कि स्पेसएक्स इस आईपीओ के जरिए 75 बिलियन डॉलर जुटाना चाहती है। स्पेसएक्स का प्लान 10 लाख तक सैटेलाइट ऑर्बिट में लॉन्च करने का है। डेटासेंटर दुनियाभर के ग्रीन मिशन के लिए सबसे बड़ा चैलेंज साबित हो रहे हैं क्योंकि इन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली चाहिए और ठंडा रखने के लिए बेतहाशा पानी। स्पेसएक्स इस चैलेंज को पार करने के लिए धरती की सीमा से बाहर स्पेस में जाना चाहती है वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने भी 2015 में लैंड-बेस्ड कंप्यूटिंग की लिमिटेशन को पार करने के लिए समुद्र की गहराई को चुना था। माइक्रोसॉफ्ट ने स्कॉटलैंड के पास समुद्र की गहराई में एक शिपिंग-कंटेनर आकार का डेटा सेंटर उतारा था। कंपनी का प्लान समुद्र की गहराई में कम तापमान का इस्तेमाल कर बिजली बचाना था। और ऑफशोर विंड तथा टाइडल पावर का उपयोग करना था। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने प्रोजेक्ट नैटिक को कभी डेटा-सेंटर इंडस्ट्री के लिए एक बड़े ब्रेकथ्रू के रूप में पेश किया गया था। कंपनी का दावा था कि यह प्रोजेक्ट सभी तकनीकी पैमानों पर कामयाब रहा। लेकिन पानी के नीचे डेटा सेंटरों को दो साल से अधिक के इंतजार के बाद भी कोई कस्टमर नहीं मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार इकोनॉमिक वायबिलिटी के मामले में भी कमजोर साहित हुआ। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार कंपनी के पास अभी कोई अंडरवॉटर डेटा सेंटर नहीं है। कंपनी डेटा सेंटर की विश्वसनीयता और स्थिरता पर फोकस करते हुए नए कॉन्सेप्ट्स पर काम कर रही है। डेटा सेंटर एनेलिस्ट कहते हैं कि माइक्रोसॉफ्ट से अंडरवॉटर डेटासेंटर के रूप में जो चूक हुई वह स्पेसएक्स के लिए एक चेतावनी है। हालांकि स्पेसएक्स और माइक्रोसॉफ्ट दोनों के प्रोजेक्ट्स भौगोलिक रूप दो अलग दुनिया में है लेकिन इनमें कॉन्सेप्ट के लिहाज से बहुत सी समानताएं हैं। दोनों डेटा सेंटर मॉड्यूलर यूनिट्स वाले हैं जिन्हें तैनात करने की लागत बहुत ज्यादा होगी। इनका साइज बढ़ाना, रिपेयर करना या अपग्रेड करना संभव नहीं है। जबकि पूरी आईटी इंडस्ट्री के लिए ये बहुत अहम होते हैं। इंडस्ट्री रिसर्च फर्म एविडथिंक के फाउंडर रॉय चुआ कहते हैं कि समुद्र के नीचे फिर भी यह सुविधा जुटाई जा सकती है लेकिन स्पेस के चैलेंज तो बहुत ही गंभीर हैं। क्योंकि अभी स्पेस में डेटा सेंटरों की कूलिंग का कोई तरीका डवलप नहीं किया गया है। साथ ही बार-बार रॉकेट लॉन्च की कॉस्ट बहुत ज्यादा होती है। इनके अलावा स्पेस का वातावरण बहुत कठोर है ऐसे में कहा नहीं जा सकता है कि इसका एआई चिप्स पर असर कैसा होगा। स्पेसएक्स ने फरवरी मस्क के ही एआई स्टार्टअप एक्सएआई को खरीद लिया था। एक्सएआई की होल्डिंग्स में सोशल मीडिया कंपनी एक्स (पूर्व में ट्विटर) और एआई चैटबॉट ग्रोक भी शामिल हैं। भले ही माइक्रोसॉफ्ट अंडरवॉटर डेटा सेंटर के लिए कोई कस्टमर नहीं तलाश कर पाई लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि अंडरवॉटर डेटा सेंटर तकनीकी रूप से कामयाब था। चूंकि लैंड-बेस्ड डेटा सेंटर का कम लागत और बहुत कम समय में विस्तार, रिपेयर और और अपग्रेड किया जा सकता है इसलिए एआई कंपनियां अभी कोई रिस्क नहीं लेना चाहतीं। स्पेसएक्स सील्ड, लॉक्ड-फॉर-लाइफ डिजाइन वाले डेटासेंटर स्पेस में बनाना चाहता है लेकिन इसमें लचीलापन बहुत कम रहेगा। वैसे भी एआई चिप्स हर साल बहुत तेजी से बेहतर हो रही हैं, जबकि स्पेस सैटेलाइट या अंडरवॉटर डेटा सेंटर को पांच से सात साल में बदला जा सकता है।
इसके अलावा समुद्र के नीचे डेटा सेंटर तैनात करने की लागत जमीन पर डेटा सेंटर बनाने के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है। भले ही मास स्केल पर अंडरवॉटर डेटा सेंटर बनाने से लागत घट सकती थी लेकिन फिर भी दसियों बिलियन डॅलर का इंवेस्टमेंट तो करना ही पड़ता। स्पेस के मामले में तो यह गणित और भी उलझी हुई है। मोफेटनैथनसन के एनेलिस्ट्स ने एक रिसर्च नोट में कहा कि एलन मस्क स्पेस में 10 लाख सैटेलाइट स्थापित करना चाहते हैं जिसकी लागत ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। स्पेस में डेटा सेंटर को व्यावसायिक रूप से वायबल बनाने के लिए रॉकेट लॉन्च की कॉस्ट को प्रति किलोग्राम हजारों डॉलर (वर्तमान) से घटाकर सैकड़ों डॉलर तक लाना होगा। टीएमएफ एसोसिएट्स के सैटेलाइट एनेलिस्ट टिम फरार के अनुसार समस्या तकनीक की कामयाबी नहीं बल्कि आर्थिक समझदारी की है। जितनी तेजी से डेटा प्रोसेसिंग की डिमांड बढ़ रही है उससे जमीन पर डेटा सेंटर कैपेसिटी बढ़ाने की ज्यादा जरूरत है। हालांकि मस्क का दावा है कि तकनीकी और वित्तीय चैलेंज को साधा जा सकता है। रेडिएशन से संपर्क, वैक्यूम में हीट मैनेजमेंट और हार्डवेयर के बार-बार बदलने जैसे मामलों को मैनेज किया जा सकता है। लॉन्च की कॉस्ट यदि बहुत ज्यादा घटाकर और एआई चिप्स को ज्यादा टिकाऊ बनाकर स्पेस डेटा सेंटर के रास्ते के तकनीकी चैलेंज साधे जा सकते है। मस्क कहते हैं कि डिमांड की भी कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि धरती पर बिजली की किल्लत होने लगी है। वैसे भी उस दुनिया के लिए प्लान कर रहे हैं जिसमें इंसानों से ज्यादा रोबोट होंगे, सभी कारें खुद चलेंगी और स्पेस ट्रेवल बहुत सामान्य हो जाएगा। मस्क का पूरा फोकस स्टारशिप है। स्टारशिप स्पेसएक्स का नेक्सजेन रॉकेट है। यह भी फाल्कन रॉकेट्स की तरह बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है और इसकी पेलोड कैपेसिटी भी बहुत ज्यादा होगी। लेकिन स्टारशिप बहुत स्लो चल रहा है। वर्ष 2023 के बाद से इसकी 11 सबऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट फेल हो चुकी हैं। मोफेटनैथनसन का मानना है कि 10 लाख सैटेलाइट के टार्गेट तक पहुंचने के लिए मस्क को हर साल 3 हजार स्टारशिप लॉन्च करने होंगे यानी रोजाना आठ। हालांकि स्पेस डेटासेंटर की दौड़ में मस्क के साथ ही अमेजन वाले जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन भी लगी हुई है। कंपनी ने कहा कि प्रोजेक्ट सनराइज कॉन्सेप्ट ऑर्बिट में सोलर एनर्जी से पावर लेने वाली एआई कंप्यूटिंग कैपेसिटी जोड़ेगा। एनालिसिस मेसन के रिसर्च डायरेक्टर क्लॉड रूसो का मानना है कि स्पेस डेटा सेंटर बन सकते हैं लेकिन ये लैंड बेस्ड डेटा सेंटर का हाथ बंटाएंगे, उनकी जगह नहीं ले पाएंगे। यह एक नीश इंडस्ट्री होगी जो स्पेस में मिलिटरी सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशनों की मदद करेगी। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में पहले से ही डेटा प्रोसेस करने और डाउनलिंक बैंडविड्थ पर निर्भरता कम करने के लिए डिजाइन किए गए कई सिस्टम पहले से हैं। फरवरी में एनविडिया के सीईओ जेनसन हुआंग ने कहा कि स्पेस बेस्ड एआई डेटा सेंटर का गणित ठीक नहीं है। यह शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन के बजाट लॉन्ग टर्म इंजीनियरिंग चैलेंज है।
