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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

12-05-2026

FMCG कम्पनियां इसेंशियल प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की फिराक में

  •  कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बीच साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और पेय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश की प्रमुख रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियां बढ़ती लागत से मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। एफएमसीजी कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के दौरान संकेत दिया है कि वे पहले ही तीन से पांच प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं और लागत का दबाव जारी रहने पर आगे भी मूल्य वृद्धि की जा सकती है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत बढ़ी है। रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है। इसका असर खाद्य उत्पादों, व्यक्तिगत देखभाल, पेय पदार्थ और घरेलू उपयोग के सामान सहित कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने के साथ पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा कम करने की रणनीति भी अपना रही हैं। हालांकि पांच, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि बिक्री पर असर कम पड़े। कंपनियां लागत कम करने के लिए छूट और प्रचार खर्चों में कटौती, भंडार प्रबंधन को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का कुछ बोझ पडऩे की संभावना है। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी विभिन्न कारोबार खंडों में औसतन चार प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी है और लागत नियंत्रण के उपाय भी कर रही है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी संकेत दिया है कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि के कारण जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ने कहा कि कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैक के वजन में कमी, दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। ब्रिटानिया के पास गुड डे, मेरी गोल्ड, मिल्क बिकीज और टाइगर जैसे ब्रांड हैं। उन्होंने कहा कि बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट की बढ़ती कीमतें परिचालन लागत को प्रभावित कर रही हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने भी संकेत दिए हैं कि यदि जिंसों की कीमतों में दबाव बना रहा तो कंपनी आगे और कीमतें बढ़ा सकती है। एचयूएल के प्रमुख ब्रांड में सर्फ एक्सल, बु्रक बॉन्ड, लाइफबॉय, डव, क्लिनिक प्लस, सनसिल्क, लैक्मे जैसे ब्रांड हैं। एचयूएल के मुख्य वित्त अधिकारी ने कहा कि अभी तक हमारे ऊपर महंगाई का आठ से 10 प्रतिशत का बोझ पड़ा है। हमने पोर्टफोलियो दर पोर्टफोलियो आधार पर कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की वृद्धि की है।

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FMCG कम्पनियां इसेंशियल प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की फिराक में

 कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बीच साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और पेय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश की प्रमुख रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियां बढ़ती लागत से मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। एफएमसीजी कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के दौरान संकेत दिया है कि वे पहले ही तीन से पांच प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं और लागत का दबाव जारी रहने पर आगे भी मूल्य वृद्धि की जा सकती है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत बढ़ी है। रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है। इसका असर खाद्य उत्पादों, व्यक्तिगत देखभाल, पेय पदार्थ और घरेलू उपयोग के सामान सहित कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने के साथ पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा कम करने की रणनीति भी अपना रही हैं। हालांकि पांच, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि बिक्री पर असर कम पड़े। कंपनियां लागत कम करने के लिए छूट और प्रचार खर्चों में कटौती, भंडार प्रबंधन को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का कुछ बोझ पडऩे की संभावना है। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी विभिन्न कारोबार खंडों में औसतन चार प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी है और लागत नियंत्रण के उपाय भी कर रही है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी संकेत दिया है कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि के कारण जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ने कहा कि कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैक के वजन में कमी, दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। ब्रिटानिया के पास गुड डे, मेरी गोल्ड, मिल्क बिकीज और टाइगर जैसे ब्रांड हैं। उन्होंने कहा कि बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट की बढ़ती कीमतें परिचालन लागत को प्रभावित कर रही हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने भी संकेत दिए हैं कि यदि जिंसों की कीमतों में दबाव बना रहा तो कंपनी आगे और कीमतें बढ़ा सकती है। एचयूएल के प्रमुख ब्रांड में सर्फ एक्सल, बु्रक बॉन्ड, लाइफबॉय, डव, क्लिनिक प्लस, सनसिल्क, लैक्मे जैसे ब्रांड हैं। एचयूएल के मुख्य वित्त अधिकारी ने कहा कि अभी तक हमारे ऊपर महंगाई का आठ से 10 प्रतिशत का बोझ पड़ा है। हमने पोर्टफोलियो दर पोर्टफोलियो आधार पर कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की वृद्धि की है।


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