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22-04-2026

लाइव इवेंट लगा रहे एडवरटाइजिंग को डेंट

  •  इन दिनों आईपीएल चल रहा है और इसमें हर मैच के दौरान टाटा की यैलो सिएरा के साथ चुहल करते प्लेयर दिख जाएंगे। अब आप खुद देखिए माना एक मैच को 40 करोड़ लोग भी देख रहे हैं तो कुल 74 मैचों में सिएरा कितने घरों तक पहुंच जाएगी। इसे कह सकते हैं इमर्सिव मार्केटिंग। भारत में लाइव इवेंट्स का फास्ट ग्रोइंग मार्केट ब्रांड्स के लिए पावरफुल मार्केटिंग इंजन इंजन बनता जा रहा है। अन्स्र्ट एंड यंग-पार्थेनॉन और बुकमाईशो की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां पारंपरिक विज्ञापन के बजाय इमर्सिव कंज्यूमर एक्सपीरिएंस पर फोकस बढ़ा रही हैं। बियॉन्ड अटेंशन, इनटू  इमर्शन नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत का लाइव इवेंट्स इकोसिस्टम लगभग 13 हजार करोड़ का हो चुका है। लाइव इवेंट्स में कॉन्सर्ट, फेस्टिवल, कॉमेडी टूर और कल्चरल प्रोग्राम को शामिल किया जाता है। ब्रांड अब इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल यूजर कनेक्ट के लिए कर रहे हैं। भारत के 78 परसेंट कंज्यूमर अब प्रोडक्ट की बजाय एक्सपीरियंस पर पैसा लुटाना पसंद करते हैं। डिजिटल फटीग (थकान) और भटके हुए ध्यान के दौर में मार्केटरों के लिए लाइव अनुभव अब हाई इंपैक्ट वाले एंगेजमेंट चैनल बनकर उभर रहे हैं। कुल 7,450 प्रतिभागियों पर किए गए सर्वे के अनुसार 59 परसेंट लोगों को उन ब्रांडों की याद रही जिनसे उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर इंटरैक्ट किया जबकि 55 परसेंट ने बताया कि ऐसे एक्सपीरियंस के बाद उनकी खरीदने की इच्छा बढ़ी। ईवाई-पार्थेनॉन इंडिया के राघव आनंद के अनुसार, इंटरप्शन-आधारित एडवरटाइजिंग का असर घट रहा है। यानी किसी यूजर के चल रहे काम या कंटेंट के बीच में अचानक विज्ञापन दिखाया जाना है, ताकि उसका ध्यान तुरंत आकर्षित किया जा सके। इसे अटेंंशन कैप्चर मॉडल भी कहते हैं। पहले कंपनियां केवल कॉन्सर्ट या फेस्टिवल को स्पॉन्सर करती थीं, लेकिन अब वे ऐसे एक्सपीरियंस तैयार कर रही हैं जो पूरे इवेंट जर्नी का हिस्सा बनते हैं—जैसे अर्ली टिकट एक्सेस, वीआईपी जोन, इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन और प्रोडक्ट ट्रायल। बैंकिंग और फाइनेंस (बीएफएसआई) कंपनियां जैसे रुपे और वीजा कॉन्सर्ट में प्री-सेल टिकट एक्सेस और प्रीमियम लाउंज की सुविधा दे रही हैं, जबकि फैशन और ब्यूटी ब्रांड फेस्टिवल को प्रोडक्ट डिस्कवरी और सोशल मीडिया एंगेजमेंट के प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एनेलिस्ट कहते हैं कि ब्रांड्स अब एक्सपीरियंस के साथ मैमोरेबल मॉमेंट्स (यादगार) और ऐसे रिजल्ट चाहते हैं जिससे डेटा जेनरेट हो सके। लाइव एंटरटेनमेंट में इमोशन, अटेंशन और पार्टनरशिप एक साथ मिलते हैं। सर्वे के अनुसार 56 परसेंट कंपनियों ने पिछले वर्ष एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग एक्टिविटी की जबकि जबकि 88 परसेंट ने कहा कि वे आगे और स्ट्रक्चर्ड तरीके से ऐसी एक्टिविटी करना चाहती हैं। पिछले तीन वर्ष में 44 परसेंट ब्रांड्स ने एक्सपीरिएंशियल केंपेन पर खर्च बढ़ाया है। 63 परसेंट इवेंट प्रतिभागियों ने कहा कि ब्रांड एक्टिवेशन से एक्सपीरियंस बेहतर हुआ, जबकि 29 परसेंट ने बताया कि ब्रांड के साथ इंटरैक्शन के बाद उनकी ब्रांड धारणा (परसैप्शन) सुधरी। एक्सपीरियंस मार्केटिंग अब केवल ब्रांड विजिबिलिटी तक सीमित नहीं है, यह ब्रांड अवेयरनैस से लेकर ट्रायल, लॉयल्टी और ब्रांड सपोर्टर बनने तक के पूरे फनल पर असर डाल रही है।

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लाइव इवेंट लगा रहे एडवरटाइजिंग को डेंट

 इन दिनों आईपीएल चल रहा है और इसमें हर मैच के दौरान टाटा की यैलो सिएरा के साथ चुहल करते प्लेयर दिख जाएंगे। अब आप खुद देखिए माना एक मैच को 40 करोड़ लोग भी देख रहे हैं तो कुल 74 मैचों में सिएरा कितने घरों तक पहुंच जाएगी। इसे कह सकते हैं इमर्सिव मार्केटिंग। भारत में लाइव इवेंट्स का फास्ट ग्रोइंग मार्केट ब्रांड्स के लिए पावरफुल मार्केटिंग इंजन इंजन बनता जा रहा है। अन्स्र्ट एंड यंग-पार्थेनॉन और बुकमाईशो की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियां पारंपरिक विज्ञापन के बजाय इमर्सिव कंज्यूमर एक्सपीरिएंस पर फोकस बढ़ा रही हैं। बियॉन्ड अटेंशन, इनटू  इमर्शन नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत का लाइव इवेंट्स इकोसिस्टम लगभग 13 हजार करोड़ का हो चुका है। लाइव इवेंट्स में कॉन्सर्ट, फेस्टिवल, कॉमेडी टूर और कल्चरल प्रोग्राम को शामिल किया जाता है। ब्रांड अब इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल यूजर कनेक्ट के लिए कर रहे हैं। भारत के 78 परसेंट कंज्यूमर अब प्रोडक्ट की बजाय एक्सपीरियंस पर पैसा लुटाना पसंद करते हैं। डिजिटल फटीग (थकान) और भटके हुए ध्यान के दौर में मार्केटरों के लिए लाइव अनुभव अब हाई इंपैक्ट वाले एंगेजमेंट चैनल बनकर उभर रहे हैं। कुल 7,450 प्रतिभागियों पर किए गए सर्वे के अनुसार 59 परसेंट लोगों को उन ब्रांडों की याद रही जिनसे उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर इंटरैक्ट किया जबकि 55 परसेंट ने बताया कि ऐसे एक्सपीरियंस के बाद उनकी खरीदने की इच्छा बढ़ी। ईवाई-पार्थेनॉन इंडिया के राघव आनंद के अनुसार, इंटरप्शन-आधारित एडवरटाइजिंग का असर घट रहा है। यानी किसी यूजर के चल रहे काम या कंटेंट के बीच में अचानक विज्ञापन दिखाया जाना है, ताकि उसका ध्यान तुरंत आकर्षित किया जा सके। इसे अटेंंशन कैप्चर मॉडल भी कहते हैं। पहले कंपनियां केवल कॉन्सर्ट या फेस्टिवल को स्पॉन्सर करती थीं, लेकिन अब वे ऐसे एक्सपीरियंस तैयार कर रही हैं जो पूरे इवेंट जर्नी का हिस्सा बनते हैं—जैसे अर्ली टिकट एक्सेस, वीआईपी जोन, इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन और प्रोडक्ट ट्रायल। बैंकिंग और फाइनेंस (बीएफएसआई) कंपनियां जैसे रुपे और वीजा कॉन्सर्ट में प्री-सेल टिकट एक्सेस और प्रीमियम लाउंज की सुविधा दे रही हैं, जबकि फैशन और ब्यूटी ब्रांड फेस्टिवल को प्रोडक्ट डिस्कवरी और सोशल मीडिया एंगेजमेंट के प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एनेलिस्ट कहते हैं कि ब्रांड्स अब एक्सपीरियंस के साथ मैमोरेबल मॉमेंट्स (यादगार) और ऐसे रिजल्ट चाहते हैं जिससे डेटा जेनरेट हो सके। लाइव एंटरटेनमेंट में इमोशन, अटेंशन और पार्टनरशिप एक साथ मिलते हैं। सर्वे के अनुसार 56 परसेंट कंपनियों ने पिछले वर्ष एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग एक्टिविटी की जबकि जबकि 88 परसेंट ने कहा कि वे आगे और स्ट्रक्चर्ड तरीके से ऐसी एक्टिविटी करना चाहती हैं। पिछले तीन वर्ष में 44 परसेंट ब्रांड्स ने एक्सपीरिएंशियल केंपेन पर खर्च बढ़ाया है। 63 परसेंट इवेंट प्रतिभागियों ने कहा कि ब्रांड एक्टिवेशन से एक्सपीरियंस बेहतर हुआ, जबकि 29 परसेंट ने बताया कि ब्रांड के साथ इंटरैक्शन के बाद उनकी ब्रांड धारणा (परसैप्शन) सुधरी। एक्सपीरियंस मार्केटिंग अब केवल ब्रांड विजिबिलिटी तक सीमित नहीं है, यह ब्रांड अवेयरनैस से लेकर ट्रायल, लॉयल्टी और ब्रांड सपोर्टर बनने तक के पूरे फनल पर असर डाल रही है।


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