भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एपल के भारत स्थित सप्लायर्स ने चीन को रिकॉर्ड कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट किया है। सरकारी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत, इन कंपनियों ने अब तक लगभग $2.5 बिलियन (करीब 20,000 करोड़) के पार्ट्स चीन भेजे हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पहले चीन से भारत को मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के पार्ट्स सप्लाई होते थे, जबकि अब यह ट्रेंड उल्टा होता दिख रहा है।इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट चीन को $3.5 बिलियन तक पहुंच सकता है, जिसमें जनवरी तक ही $2.8 बिलियन का आंकड़ा हासिल हो चुका है। वित्त वर्ष 25 में भारत से चीन को यह एक्सपोर्ट लगभग $920 मिलियन था। इस तेजी से साफ है कि भारत अब केवल असेंबली हब नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन रहा है। इसमें फोक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रोन, मदरसन ग्रुप, सालकॉम्प, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स टीआरआईएल बैंगलुरु और युझान टेक्नोलॉजी आदि कंपनियों को योगदान सबसे ज्यादा रहा है जो आमतौर पर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, मैकेनिकल पार्ट्स, मोबाइल केसिंग, फ्लेक्सिबल पीसीबी और ग्रेफाइट बटन जैसे कई जरूरी कंपोनेंट्स का उत्पादन कर रही हैं। पिछले पांच वर्ष में ईसीएमएस स्कीम के तहत एपल ने भारत में लगभग $70 बिलियन डॉलर के आईफोन बनाए, जिनमें से $51 बिलियन (करीब 73') एक्सपोर्ट हुए। मेड इन इंडिया आईफोन का ज्यादातर एक्सपोर्ट अमेरिका को किया जा रहा है।