आरबीआई ने कहा है कि वह डिजिटल रुपये का कल्याणकारी भुगतान योजनाओं और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए इस्तेमाल करने के प्लान पर काम कर रहा है। आरबीआई ने अपनी 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 26 के दौरान उसने केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के कई कल्याणकारी ट्रायल किए हैं। इनमें गुजरात, पुडुच्चेरी और चंडीगढ़ में लाभार्थियों को डिजिटल रुपये के माध्यम से राशन सब्सिडी दी गई। आरबीआई ने कहा संस्थागत स्तर पर कई सरकारी एजेंसियों ने विभिन्न डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजनाओं के ट्रायल किए हैं ताकि सार्वजनिक धन का उत्पादक इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके। भारत देशभर में कम से कम 10 केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा प्रायोगिक परियोजनाएं चला रहा है। इनका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या ई-रुपये का इस्तेमाल कल्याणकारी भुगतान अधिक कुशल तरीके से करने में किया जा सकता है। यह पहल ऐसे समय हो रही है जब खुदरा ई-रुपये का प्रचलन घटा है। वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक खुदरा ई-रुपये का प्रचलन 7.71 बिलियन रुपये रहा, जो एक साल पहले 10.16 बिलियन रुपये था। क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को आगे बढ़ाने के लिए आरबीआई ने सिंगापुर की मॉनिटरी अथॉरिटी के साथ डिजिटल असैट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सिंगापुर और यूएई के साथ ट्रायल पर भी चर्चा चल रही है। आरबीआई के अनुसार वित्तीय संस्थानों के लिए उसके क्लाउड प्लेटफॉर्म का नौ यूजर के साथ ट्रायल शुरू हो गया है। आरबीआई ने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र क्लाउड सर्विसेस के पहले चरण पर काम एडवांस्ड स्टेज तक पहुंच चुका है।