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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

05-06-2026

कमज़ोर डिमांड के दौर में इंडियन आईटी कंपनियों की सतर्क चाल

  •  वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और क्लाइंट्स की घटती टेक्नोलॉजी खर्च क्षमता के बीच भारत की बड़ी आईटी कंपनियां फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए 2 प्रतिशत तक राजस्व गिरावट का अनुमान जताया है। यह संकेत केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय आईटी सेक्टर की मौजूदा चुनौतीपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में आर्थिक दबाव, ऊंची ब्याज दरें और कंपनियों द्वारा खर्च में कटौती का सीधा असर भारतीय आईटी उद्योग पर पड़ रहा है। यही वजह है कि इंफोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां भी फिलहाल आक्रामक ग्रोथ की बजाय ‘सावधानी के साथ स्थिरता’ की रणनीति अपना रही हैं। विप्रो ने स्पष्ट किया है कि उसके कई बड़े क्लाइंट्स अभी भी नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने में हिचकिचा रहे हैं। खासकर यूरोप के कुछ सेक्टर्स और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में आईटी खर्च लगातार दबाव में है। हालांकि कंपनी का कहना है कि रिटेल और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में डिमांड बनी हुई है, लेकिन यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि पूरे कारोबार को गति दे सके। आईटी उद्योग के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश के बाद अब कंपनियां अपने खर्च का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं। ऐसे माहौल में आईटी सर्विस प्रोवाइडर्स को नए बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में अधिक समय लग रहा है। इसके बावजूद बाजार में उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एनालिस्ट्स का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ), ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में आने वाले समय में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कई कंपनियां अब पारंपरिक आईटी सेवाओं से आगे बढक़र ्रढ्ढ आधारित सॉल्यूशंस और डिजिटल इंजीनियरिंग पर फोकस बढ़ा रही हैं। एचसीएल टेक ने हाल ही में अपने सालाना ग्रोथ अनुमान को 3 से 5 प्रतिशत के बीच रखा, जबकि इंफोसिस ने भी सीमित दायरे में गाइडेंस जारी की। इससे साफ संकेत मिलता है कि उद्योग फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में है। कंपनियां तब तक आक्रामक विस्तार से बचना चाहती हैं, जब तक वैश्विक बाजारों में स्थिरता के स्पष्ट संकेत नहीं मिल जाते। बाजार विशेषज्ञ सिद्धार्थ रस्तोगी के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। कंपनियां कमजोर डिमांड के बावजूद अपनी लाभप्रदता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि यदि वैश्विक आर्थिक हालात सुधरते हैं, तो अगले कुछ क्वार्टर्स में स्थिति बेहतर हो सकती है। निवेशकों की नजर अब आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, यूरोपीय बाजार की रिकवरी और ्रढ्ढ आधारित टेक्नोलॉजी निवेश पर टिकी हुई है। फिलहाल इतना तय है कि भारतीय आईटी कंपनियां जोखिम लेने की बजाय सतर्क रणनीति के साथ आगे बढऩा चाहती हैं।

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कमज़ोर डिमांड के दौर में इंडियन आईटी कंपनियों की सतर्क चाल

 वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और क्लाइंट्स की घटती टेक्नोलॉजी खर्च क्षमता के बीच भारत की बड़ी आईटी कंपनियां फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए 2 प्रतिशत तक राजस्व गिरावट का अनुमान जताया है। यह संकेत केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय आईटी सेक्टर की मौजूदा चुनौतीपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में आर्थिक दबाव, ऊंची ब्याज दरें और कंपनियों द्वारा खर्च में कटौती का सीधा असर भारतीय आईटी उद्योग पर पड़ रहा है। यही वजह है कि इंफोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां भी फिलहाल आक्रामक ग्रोथ की बजाय ‘सावधानी के साथ स्थिरता’ की रणनीति अपना रही हैं। विप्रो ने स्पष्ट किया है कि उसके कई बड़े क्लाइंट्स अभी भी नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने में हिचकिचा रहे हैं। खासकर यूरोप के कुछ सेक्टर्स और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में आईटी खर्च लगातार दबाव में है। हालांकि कंपनी का कहना है कि रिटेल और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में डिमांड बनी हुई है, लेकिन यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि पूरे कारोबार को गति दे सके। आईटी उद्योग के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश के बाद अब कंपनियां अपने खर्च का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं। ऐसे माहौल में आईटी सर्विस प्रोवाइडर्स को नए बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में अधिक समय लग रहा है। इसके बावजूद बाजार में उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एनालिस्ट्स का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ), ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में आने वाले समय में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कई कंपनियां अब पारंपरिक आईटी सेवाओं से आगे बढक़र ्रढ्ढ आधारित सॉल्यूशंस और डिजिटल इंजीनियरिंग पर फोकस बढ़ा रही हैं। एचसीएल टेक ने हाल ही में अपने सालाना ग्रोथ अनुमान को 3 से 5 प्रतिशत के बीच रखा, जबकि इंफोसिस ने भी सीमित दायरे में गाइडेंस जारी की। इससे साफ संकेत मिलता है कि उद्योग फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में है। कंपनियां तब तक आक्रामक विस्तार से बचना चाहती हैं, जब तक वैश्विक बाजारों में स्थिरता के स्पष्ट संकेत नहीं मिल जाते। बाजार विशेषज्ञ सिद्धार्थ रस्तोगी के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। कंपनियां कमजोर डिमांड के बावजूद अपनी लाभप्रदता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि यदि वैश्विक आर्थिक हालात सुधरते हैं, तो अगले कुछ क्वार्टर्स में स्थिति बेहतर हो सकती है। निवेशकों की नजर अब आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, यूरोपीय बाजार की रिकवरी और ्रढ्ढ आधारित टेक्नोलॉजी निवेश पर टिकी हुई है। फिलहाल इतना तय है कि भारतीय आईटी कंपनियां जोखिम लेने की बजाय सतर्क रणनीति के साथ आगे बढऩा चाहती हैं।


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