रिकॉर्ड तेजी के बाद इंडियन स्टॉक मार्केट में सितम्बर 2024 से ट्रेंड रिवर्सल देखने को मिला जो अब तक जारी है। इस दौरान मिड व स्मॉल कैप शेयरों के साथ ही लार्ज कैप के अलावा बेंचमार्क इंडेक्सों में भी गिरावट देखने को मिली है। 18-19 महीनों के इस कंसोलिडेशन के दौर को कई इंवेस्टर Time Correction व Price Correction मान कर चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अब आगे क्या? अब तक के डाटा को देखें तो जब भी निफ्टी-50 इंडेक्स में 18 महीनों तक का कंसोलिडेशन देखा गया है उसके अगले 1 वर्ष व 3 वर्ष के दौरान अधिकतर मामलों में बेंचमार्क इंडेक्सों द्वारा डबल डिजिट रिटर्न देते देखा गया है। उदाहरण के तौर पर देखें तो 31 अक्टूबर 2001 से 31 मार्च 2003 के बीच के कंसोलिडेशन के दौर में निफ्टी-50 इंडेक्स में 0.65' की ही बढ़त दर्ज की गई थी जिसके बाद अगले 1 वर्ष में निफ्टी-50 ने 81 प्रतिशत व 3 वर्ष में 248' का रिटर्न दिया। 31 जनवरी 2007 से 30 जून 2008 व 30 अप्रेल 2011 से 30 सितम्बर 2012 के 18 महीनों के कंसोलिडेशन के 2 मामलों में ही अगले 1 वर्ष के दौरान निफ्टी-50 का रिटर्न 10' से कम रहा। वर्तमान स्थिति का एनालिसिस करें तो ईरान क्राइसिस के कारण इंडियन शेयर बाजारों में आई व्यापक गिरावट के चलते वेल्यूएशन भी रीजनेबल लेवल्स पर आ गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्तमान वोलेटिलिटी का दौर लांग-टर्म इंवेस्टरों के लिए इंवेस्टमेंट की एक अपॉर्चुनिटी है व क्या पूर्व के समान अगले 1 व 3 वर्ष के पीरियड में इंडियन स्टॉक मार्केट डबल-डिजिट रिटर्न दे सकते हैं?