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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

13-05-2026

हेरा फेरी के माल आने से अखरोट में तेजी समाप्त

  •  बाजार में चीन के बिना बिल के माल वाया नेपाल भारी मात्रा में बिहार के रास्ते आने से जीएसटी सहित अन्य राजस्व में सरकार को लाखों रुपए का चूना लग रहा है, ऐसी बाजारों में चर्चा है। इस वजह से अमेरिकन व चिल्ली का अखरोट बिकना काफी कम रह गया है तथा जम्मू कश्मीर का माल आना बंद हो गया है। स्थानीय मेवा बाजार में अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर व्यापारी बता रहे हैं कि अखरोट का व्यापार बाजार में पहले जम्मू कश्मीर, अमेरिकन एवं चिल्ली का आकर बिकता था तथा इसका आयात अधिकृत रूप में आयातकों द्वारा किया जाता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से चीन का माल पहले काठमांडू एवं बीरगंज आ रहा है, उसके बाद पटना व रक्सौल आने के बाद दिल्ली आगरा जयपुर आदि मंडियों में पहुंच रहा है। यह माल भारतीय सीमा वाली मंडियों में 210/230 रुपए प्रति किलो ट्रक लोड में पड़ रहा है, जो यहां आकर 300/310 रुपए प्रति किलो कारोबारी खरीद कर 15/20 रुपए के मुनाफा में ही माल  बेच रहे हैं। इस माल के आने से जम्मू कश्मीर से जो माल सस्ता आकर बिकता था तथा सरकार को जीएसटी के रूप में राजस्व  मिलता था, उसका नुकसान होने लगा है। दूसरी ओर चिल्ली व अमेरिकन माल का व्यापार भी काफी घट गया है। इस समय चिली के भाव 600/625 रुपए एवं अमेरिकन 550/570 रुपए प्रति किलो के बीच यहां बिक रहा है। गौरतलब है कि अखरोट का उत्पादन देश में 22 प्रतिशत के करीब इस बार अधिक हुआ है, जबकि चीन के माल ने 60 प्रतिशत बिक्री पर कब्जा कर लिया है, इससे घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर जो आयातक चिल्ली एवं अमेरिकन अखरोट का आयात करके यहां माल बेचते थे, उनका भी रुझान अब कम हो गया है, क्योंकि पिछले 6 महीने से देखने में आ रहा है कि चीन के माल के चलते कम से कम 50 प्रतिशत बिक्री अन्य अखरोट की घट गई है। हम मानते हैं कि जिसको चिली खाना है, वह चिल्ली ही खरीदेगा, लेकिन रेट सस्ता होने से अधिकतर थोक कारोबारी वितरक मंडियों में चीन के ही माल को बेचना बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अत: सीमावर्ती मंडियों पर हेराफेरी के माल को सख्ती करनी चाहिए।

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हेरा फेरी के माल आने से अखरोट में तेजी समाप्त

 बाजार में चीन के बिना बिल के माल वाया नेपाल भारी मात्रा में बिहार के रास्ते आने से जीएसटी सहित अन्य राजस्व में सरकार को लाखों रुपए का चूना लग रहा है, ऐसी बाजारों में चर्चा है। इस वजह से अमेरिकन व चिल्ली का अखरोट बिकना काफी कम रह गया है तथा जम्मू कश्मीर का माल आना बंद हो गया है। स्थानीय मेवा बाजार में अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर व्यापारी बता रहे हैं कि अखरोट का व्यापार बाजार में पहले जम्मू कश्मीर, अमेरिकन एवं चिल्ली का आकर बिकता था तथा इसका आयात अधिकृत रूप में आयातकों द्वारा किया जाता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से चीन का माल पहले काठमांडू एवं बीरगंज आ रहा है, उसके बाद पटना व रक्सौल आने के बाद दिल्ली आगरा जयपुर आदि मंडियों में पहुंच रहा है। यह माल भारतीय सीमा वाली मंडियों में 210/230 रुपए प्रति किलो ट्रक लोड में पड़ रहा है, जो यहां आकर 300/310 रुपए प्रति किलो कारोबारी खरीद कर 15/20 रुपए के मुनाफा में ही माल  बेच रहे हैं। इस माल के आने से जम्मू कश्मीर से जो माल सस्ता आकर बिकता था तथा सरकार को जीएसटी के रूप में राजस्व  मिलता था, उसका नुकसान होने लगा है। दूसरी ओर चिल्ली व अमेरिकन माल का व्यापार भी काफी घट गया है। इस समय चिली के भाव 600/625 रुपए एवं अमेरिकन 550/570 रुपए प्रति किलो के बीच यहां बिक रहा है। गौरतलब है कि अखरोट का उत्पादन देश में 22 प्रतिशत के करीब इस बार अधिक हुआ है, जबकि चीन के माल ने 60 प्रतिशत बिक्री पर कब्जा कर लिया है, इससे घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर जो आयातक चिल्ली एवं अमेरिकन अखरोट का आयात करके यहां माल बेचते थे, उनका भी रुझान अब कम हो गया है, क्योंकि पिछले 6 महीने से देखने में आ रहा है कि चीन के माल के चलते कम से कम 50 प्रतिशत बिक्री अन्य अखरोट की घट गई है। हम मानते हैं कि जिसको चिली खाना है, वह चिल्ली ही खरीदेगा, लेकिन रेट सस्ता होने से अधिकतर थोक कारोबारी वितरक मंडियों में चीन के ही माल को बेचना बेचना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अत: सीमावर्ती मंडियों पर हेराफेरी के माल को सख्ती करनी चाहिए।


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