कमजोर डिमांड, प्राइसिंग का दबाव ऐसा है कि फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्ज कम्पनियां एडवरटाइजिंग बजट को कट करने लगी हैं। लगातार दूसरे क्वार्टर में मार्केटिंग स्पेंड को कम किया जा रहा है। सावधानी का परिचय देते हुए मैरिको, डाबर, गोदरेज कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स, हिंदुस्तान यूनीलीवर जैसी दिग्गज कम्पनियों ने एडवरटाइजिंग एंड प्रमोशनल एक्सपेंडीचर को तिमाही के दौरान कम किया है। गत कुछ तिमाहियों से एफएमसीजी एड स्पेंड कम हुआ है। वॉल्यूम ग्रोथ पर असर आ जाने के कारण ऐसा करना पड़ा है। विशेष रूप से ग्रामीण बाजार में गैर जरूरी खर्च पर लगाम कसी है। हंसा रिसर्च गु्रप के एक अधिकारी ने कहा है कि कुछ कम्पनियों के लिये एडवरटाइजिंग रीइंटीगे्रशन जैसी बन रही है। मिडिया मिक्स चैनल को अपनाया जा रहा है। जैसे कि एचयूएल टेलीविजन, आउटडोर पर यह फॉर्मूला अपना रही है। सोशियल और डिजिटल प्लेटफॉम्र्स पर इन्फ्लूएंसर लैड इको-सिस्टम मजबूत किया जा रहा है। एचयूएल की सीईओ ने कहा है कि वे करीब तीस हजार क्रिएटर्स के नेटवर्क के साथ काम कर रहे हैं। ईयर-ऑन ईयर लेवल पर यह संख्या दोगुनी हो गई है। कम्पनी हाई रीच प्लेटफॉम्र्स जैसे स्पोर्ट्स आदि पर एआई लैड कैम्पेन चला रही है। ब्राण्ड को बढ़ावा देने का मकसद है। मैरिको भी डिजिटल मीडिया पर सीधे तौर पर 55 प्रतिशत कोर एड स्पेंड कर रही है। डाबर के सीईओ के अनुसार जब मार्केट में गिरावट हो, तब एडवरटाइजिंग पर काफी ज्यादा स्पेंड करना बेमानी है। दूसरी ओर ब्रिटानिया और नेस्ले इन्डिया ने मार्च क्वार्टर में एडवरटाइजिंग बजट को बढ़ाया है। नेस्ले ने पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। सूत्रों के अनुसार जीएसटी के लाभ के कारण एफएमसीजी कम्पनियों और ड्यूरेबल ब्राण्ड्स ने उत्साह के साथ प्रमोशंस किये थे लेकिन बाजार की स्थिति विपरीत बन रही है। रॉ मैटीरियल, पैकेजिंग मैटीरियल आदि पर जियो-पॉलिटीकल कारणों से मार पड़ रही है। ऐसे में कम्पनियां डिजिटल कैम्पेन पर ज्यादा फोकस कर रही है।