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17-04-2026

इंडिया में E-Cycle से बदलता

  •  देश में ई-साइकिल अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ मोबिलिटी सेगमेंट बनती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कम लागत, आसान उपयोग और बदलती शहरी जरूरतों के चलते ई-साइकिल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह बाजार नए स्तर पर पहुंच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ई-साइकिल की कीमतें इसे बड़े वर्ग तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बाजार में एंट्री-लेवल मॉडल करीब 25,000 रु. से शुरू होकर 30,000-40,000 रु. के दायरे में उपलब्ध हैं, जबकि प्रीमियम मॉडल्स की कीमत 30,000 रुपये  से 38,000 रुपये और उससे ऊपर तक जाती है। यही कारण है कि यह उत्पाद अब स्टूडेंट्स, मिडिल क्लास और कामकाजी लोगों के लिए सुलभ बन गया है। कीमत के साथ-साथ इसकी कम ऑपरेटिंग कॉस्ट भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। जहां पेट्रोल आधारित दोपहिया वाहनों में रोजाना खर्च होता है, वहीं ई-साइकिल को चलाने का खर्च बेहद कम है और मेंटेनेंस भी सीमित रहता है—यही इसे रोजमर्रा के छोटे सफर के लिए आकर्षक बनाता है। बिक्री के आंकड़े भी इस सेगमेंट की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। उपलब्ध इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, भारत में ई-साइकिल बाजार का आकार 2025 में करीब 1.4 बिलियन डॉलर (11,000 करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी स्तर पर भी इस ग्रोथ के संकेत साफ दिखते हैं। एक प्रमुख ब्रांड ने शुरुआती दौर में ही करीब 35,000 यूनिट्स की बिक्री हासिल की थी और कुछ वर्षों में यह संख्या बढक़र 1 लाख यूनिट्स के आसपास पहुंच गई, जो इस सेगमेंट में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मांग को बढ़ाने में शहरीकरण और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की जरूरत बड़ी भूमिका निभा रही है। ई-कॉमर्स और डिलीवरी सेक्टर में भी ई-साइकिल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जहां कंपनियां लागत कम करने और तेज डिलीवरी के लिए इसे अपना रही हैं। ग्राहकों के बीच भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। युवा और स्टूडेंट्स इसे किफायती और ट्रैफिक-फ्रेंडली साधन मान रहे हैं, वहीं कामकाजी लोग इसे रोजमर्रा के छोटे सफर के लिए सुविधाजनक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस तेजी के बावजूद कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी से जुड़ी चिंताएं इस सेगमेंट के विस्तार को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और जागरूकता बढ़ेगी, ये बाधाएं धीरे-धीरे कम होंगी।कुल मिलाकर, ई-साइकिल अब देश में माइक्रो मोबिलिटी की नई पहचान बनती जा रही है। किफायती कीमत, बढ़ती बिक्री और बदलती जरूरतों के बीच यह साफ है कि आने वाले समय में यह ‘छोटी सवारी’ एक बड़े बाजार में बदल सकती है।

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इंडिया में E-Cycle से बदलता

 देश में ई-साइकिल अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ मोबिलिटी सेगमेंट बनती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कम लागत, आसान उपयोग और बदलती शहरी जरूरतों के चलते ई-साइकिल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह बाजार नए स्तर पर पहुंच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ई-साइकिल की कीमतें इसे बड़े वर्ग तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बाजार में एंट्री-लेवल मॉडल करीब 25,000 रु. से शुरू होकर 30,000-40,000 रु. के दायरे में उपलब्ध हैं, जबकि प्रीमियम मॉडल्स की कीमत 30,000 रुपये  से 38,000 रुपये और उससे ऊपर तक जाती है। यही कारण है कि यह उत्पाद अब स्टूडेंट्स, मिडिल क्लास और कामकाजी लोगों के लिए सुलभ बन गया है। कीमत के साथ-साथ इसकी कम ऑपरेटिंग कॉस्ट भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। जहां पेट्रोल आधारित दोपहिया वाहनों में रोजाना खर्च होता है, वहीं ई-साइकिल को चलाने का खर्च बेहद कम है और मेंटेनेंस भी सीमित रहता है—यही इसे रोजमर्रा के छोटे सफर के लिए आकर्षक बनाता है। बिक्री के आंकड़े भी इस सेगमेंट की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। उपलब्ध इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, भारत में ई-साइकिल बाजार का आकार 2025 में करीब 1.4 बिलियन डॉलर (11,000 करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी स्तर पर भी इस ग्रोथ के संकेत साफ दिखते हैं। एक प्रमुख ब्रांड ने शुरुआती दौर में ही करीब 35,000 यूनिट्स की बिक्री हासिल की थी और कुछ वर्षों में यह संख्या बढक़र 1 लाख यूनिट्स के आसपास पहुंच गई, जो इस सेगमेंट में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मांग को बढ़ाने में शहरीकरण और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की जरूरत बड़ी भूमिका निभा रही है। ई-कॉमर्स और डिलीवरी सेक्टर में भी ई-साइकिल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जहां कंपनियां लागत कम करने और तेज डिलीवरी के लिए इसे अपना रही हैं। ग्राहकों के बीच भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। युवा और स्टूडेंट्स इसे किफायती और ट्रैफिक-फ्रेंडली साधन मान रहे हैं, वहीं कामकाजी लोग इसे रोजमर्रा के छोटे सफर के लिए सुविधाजनक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस तेजी के बावजूद कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी से जुड़ी चिंताएं इस सेगमेंट के विस्तार को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और जागरूकता बढ़ेगी, ये बाधाएं धीरे-धीरे कम होंगी।कुल मिलाकर, ई-साइकिल अब देश में माइक्रो मोबिलिटी की नई पहचान बनती जा रही है। किफायती कीमत, बढ़ती बिक्री और बदलती जरूरतों के बीच यह साफ है कि आने वाले समय में यह ‘छोटी सवारी’ एक बड़े बाजार में बदल सकती है।


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