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20-04-2026

ग्लोबल पीसी शिपमेंट में हुई चार प्रतिशत की ग्रोथ

  •  एक रिपोर्ट में बुधवार को कहा गया कि 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में दुनिया भर में पीसी शिपमेंट सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढक़र 62.8 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया। गार्टनर द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी पूरी तरह वास्तविक उपभोक्ता मांग को नहीं दर्शाती है। इसके बजाय, कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दूसरी तिमाही में कंपोनेंट्स की कीमतें बढऩे की आशंका के चलते पहले से ज्यादा स्टॉक जमा कर लिया। गार्टनर के रिसर्च प्रिंसिपल ऋषि पाधी ने कहा कि सालाना वृद्धि कृत्रिम रूप से बढ़ी, क्योंकि यह मेमोरी की बढ़ती कीमतों (जिसे आमतौर पर मेमफ्लेशन कहा जाता है) और डीआरएएम व नैंड फ्लैश जैसे कंपोनेंट्स के महंगे होने के डर से पहले ही स्टॉक करने की वजह से हुई है। उन्होंने बताया कि यह ट्रेंड खासकर कम मुनाफे वाले पीसी सेगमेंट में ज्यादा देखा गया। इसके अलावा, तुलना का आधार भी इस ग्रोथ को प्रभावित करता है, क्योंकि 2025 की पहली तिमाही में अमेरिकी टैरिफ के डर से पहले ही ज्यादा शिपमेंट कर दिए गए थे, जिससे इस साल का आंकड़ा ज्यादा दिख रहा है। कंपनियों के प्रदर्शन की बात करें तो टॉप चार वैश्विक पीसी कंपनियों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। लेनोवो ने अपनी नंबर-1 पोजीशन बरकरार रखी, जबकि एचपी इंक. दूसरे स्थान पर रही, हालांकि इसका मार्केट शेयर थोड़ा घटा है। वहीं डेल टेक्नोलॉजीज ने इस तिमाही में अपना मार्केट शेयर बढ़ाया है। इन सबके बीच एप्पल सबसे तेजी से बढऩे वाली कंपनी रही, जिसकी शिपमेंट में सालाना आधार पर 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह ग्रोथ खासकर इसके मैकबुक नियो सीरीज की मजबूत मांग की वजह से हुई, जिसमें नए यूजर्स और शिक्षा क्षेत्र के खरीदारों की बड़ी भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल की रणनीति ने कम कीमत में बेहतर परफॉर्मेंस वाले डिवाइस चाहने वाले ग्राहकों को आकर्षित किया, जिससे कंपनी की बाजार में पकड़ और मजबूत हुई। वहीं, इस तिमाही में एसस आसुस ने एसर को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया।

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ग्लोबल पीसी शिपमेंट में हुई चार प्रतिशत की ग्रोथ

 एक रिपोर्ट में बुधवार को कहा गया कि 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में दुनिया भर में पीसी शिपमेंट सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढक़र 62.8 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया। गार्टनर द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी पूरी तरह वास्तविक उपभोक्ता मांग को नहीं दर्शाती है। इसके बजाय, कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दूसरी तिमाही में कंपोनेंट्स की कीमतें बढऩे की आशंका के चलते पहले से ज्यादा स्टॉक जमा कर लिया। गार्टनर के रिसर्च प्रिंसिपल ऋषि पाधी ने कहा कि सालाना वृद्धि कृत्रिम रूप से बढ़ी, क्योंकि यह मेमोरी की बढ़ती कीमतों (जिसे आमतौर पर मेमफ्लेशन कहा जाता है) और डीआरएएम व नैंड फ्लैश जैसे कंपोनेंट्स के महंगे होने के डर से पहले ही स्टॉक करने की वजह से हुई है। उन्होंने बताया कि यह ट्रेंड खासकर कम मुनाफे वाले पीसी सेगमेंट में ज्यादा देखा गया। इसके अलावा, तुलना का आधार भी इस ग्रोथ को प्रभावित करता है, क्योंकि 2025 की पहली तिमाही में अमेरिकी टैरिफ के डर से पहले ही ज्यादा शिपमेंट कर दिए गए थे, जिससे इस साल का आंकड़ा ज्यादा दिख रहा है। कंपनियों के प्रदर्शन की बात करें तो टॉप चार वैश्विक पीसी कंपनियों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। लेनोवो ने अपनी नंबर-1 पोजीशन बरकरार रखी, जबकि एचपी इंक. दूसरे स्थान पर रही, हालांकि इसका मार्केट शेयर थोड़ा घटा है। वहीं डेल टेक्नोलॉजीज ने इस तिमाही में अपना मार्केट शेयर बढ़ाया है। इन सबके बीच एप्पल सबसे तेजी से बढऩे वाली कंपनी रही, जिसकी शिपमेंट में सालाना आधार पर 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह ग्रोथ खासकर इसके मैकबुक नियो सीरीज की मजबूत मांग की वजह से हुई, जिसमें नए यूजर्स और शिक्षा क्षेत्र के खरीदारों की बड़ी भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल की रणनीति ने कम कीमत में बेहतर परफॉर्मेंस वाले डिवाइस चाहने वाले ग्राहकों को आकर्षित किया, जिससे कंपनी की बाजार में पकड़ और मजबूत हुई। वहीं, इस तिमाही में एसस आसुस ने एसर को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया।


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