अक्षय तृतीया का त्योहार इस बार भी बाजार में उत्साह लेकर आया है, लेकिन सोना खरीदने का अंदाज बदलता नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच ग्राहक अब सोच-समझकर और रणनीतिक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में ‘स्मार्ट शिफ्ट’ का ट्रेंड उभरकर सामने आया है। इस साल ज्वेलरी स्टोर्स पर ग्राहकों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन बड़े और भारी गहनों की खरीद में कमी देखी जा रही है। ऊंचे दामों के चलते ग्राहक अब हल्के वजन की ज्वेलरी, डिजाइनर पीस और छोटे टिकट साइज में खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोग परंपरा निभाने के लिए सीमित खरीद कर रहे हैं, जबकि निवेश के लिए वैकल्पिक रास्ते अपना रहे हैं। ज्वेलर्स के मुताबिक, इस बार फुटफॉल अच्छा है, लेकिन ग्राहकों का बजट पहले की तुलना में नियंत्रित है। एक ज्वेलरी कारोबारी ने बताया कि जहां पहले ग्राहक एकमुश्त बड़ी खरीद करते थे, अब वे कम रकम में ज्यादा वैल्यू तलाश रहे हैं। इसका असर कुल वॉल्यूम पर पड़ रहा है, हालांकि ऊंची कीमतों के कारण कुल बिक्री मूल्य पर ज्यादा असर नहीं दिख रहा। रिपोर्ट के अनुसार, कॉइन और बार सेगमेंट में इस बार अच्छी मांग देखी जा रही है, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज कम होता है और निवेश के लिहाज से इन्हें ज्यादा आकर्षक माना जाता है। इसके साथ ही डिजिटल गोल्ड और गोल्ड श्वञ्जस्न जैसे विकल्पों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है, खासकर शहरी और युवा निवेशकों के बीच। ग्राहकों की राय भी इस बदलाव को दर्शाती है। कई निवेशक अब सोने को केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो का हिस्सा मान रहे हैं। एक युवा प्रोफेशनल के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए सोने में निवेश करना अधिक सुविधाजनक और लिक्विड है, जबकि एक गृहिणी का कहना है कि इस बार उन्होंने गहनों की बजाय निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, ग्रामीण और छोटे शहरों में पारंपरिक मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, जहां सोना खरीदना सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए ज्वेलरी की खरीद वहां अभी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।इस बदलते ट्रेंड को देखते हुए ज्वेलर्स भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। हल्के वजन के गहने, आकर्षक ऑफर्स, आसान भुगतान विकल्प और डिजिटल बुकिंग जैसे उपायों से ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार वॉल्यूम ग्रोथ सीमित रह सकती है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण वैल्यू ग्रोथ मजबूत रह सकती है। साथ ही, बाजार में अनिश्चितता के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनी पकड़ बनाए हुए है। कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया 2026 यह संकेत दे रही है कि परंपरा बरकरार है, लेकिन निवेश का तरीका बदल चुका है। सोना अब केवल शुभ खरीद का प्रतीक नहीं, बल्कि समझदारी और रणनीति के साथ किया गया निवेश बनता जा रहा है।