गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा है कि सूरत डायमंड बोर्स आने वाले दो वर्षों में केमिकल वेपर डिपोजिशन (सीवीडी) हीरों का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा। केमिकल वेपर डिपोजिशन (सीवीडी) एक आधुनिक तकनीक है, जिसके जरिए प्रयोगशाला में हीरे बनाए जाते हैं। संघवी ने सूरत डायमंड बोर्स के दौरे के दौरान कहा कि जिस तेजी से यहां विकास हो रहा है, उसे देखते हुए लैब में तैयार हीरे और प्राकृतिक हीरों का प्रमुख केंद्र मुंबई से सूरत की ओर स्थानांतरित हो सकता है। संघवी ने कहा कि सूरत डायमंड बोर्स अगले दो वर्षों में हीरों का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा। बहुत कम समय में व्यापारी यहां अपने दफ्तर खोलने लगे हैं। अगले एक साल में करीब 1,500 कार्यालय चालू होने की उम्मीद है, जिनमें से 500 कार्यालय अगले पांच महीनों में शुरू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि रोजाना औसतन 2,800 से 3,200 लोग सूरत डायमंड बोर्स में पंजीकरण कर रहे हैं, जो बढ़ती व्यापारिक गतिविधियों का संकेत है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि कच्चे हीरों के व्यापारी भी अगले चार महीनों में यहां अपने दफ्तर शुरू कर सकेंगे, जिससे कच्चे से लेकर पॉलिश किए गए हीरों तक का पूरा कारोबार एक ही स्थान पर संभव हो सकेगा।