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17-04-2026

AI से बदल रही है पढ़ाई की दुनिया

  •  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) भारत की शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदल रहा है। अब पढ़ाई केवल किताबों या वीडियो तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ्रढ्ढ की मदद से हर छात्र अपनी जरूरत और गति के अनुसार सीख सकता है। पहले अगर कोई छात्र किसी विषय में फँस जाता था, तो उसे बार-बार वही वीडियो देखना पड़ता था या इंटरनेट पर समाधान ढूंढना पड़ता था, जो अक्सर उसकी समस्या के अनुसार नहीं होता था। लेकिन अब एआई आधारित टूल्स तुरंत समाधान देते हैं और छात्र की समझ के स्तर के अनुसार मार्गदर्शन करते हैं। इस बदलाव को आगे बढ़ाने में कई बड़ी कंपनियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिजिक्सवाला, कार्सेरा और स्केलर जैसे प्लेटफॉर्म अपने सिस्टम में एआई को शामिल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, फिजिक्सवाला ने "्रह्यद्म ्रढ्ढ" नाम का टूल शुरू किया है, जो छात्रों के सवालों का 24 घंटे जवाब देता है और लाखों सवालों का समाधान कर चुका है। इसके अलावा, इसका ्रढ्ढ सिस्टम छात्रों के लिखित उत्तरों की जांच भी करता है, जिससे समय की बचत होती है। वहीं, कार्सेरा का एआई ट्यूटर छात्रों को उसी कोर्स की सामग्री के आधार पर जवाब देता है, जिससे गलत जानकारी मिलने की संभावना कम हो जाती है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े कई छात्रों ने बताया है कि इससे उनकी पढ़ाई बेहतर हुई है। इसी तरह, स्केलर का मानना है कि एआई छात्रों को तुरंत फीडबैक देकर उनकी सीखने की गति बढ़ाता है, जिससे वे जल्दी सुधार कर पाते हैं। एक और उदाहरण नेक्स्टवेव (हृ3ह्लङ्खड्ड1द्ग) का है, जो भारत के सैकड़ों जिलों में क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म एआई की मदद से छात्रों को उनकी भाषा और स्तर के अनुसार पढ़ाई का अवसर देता है, जिससे छोटे शहरों के छात्रों को भी बराबरी का मौका मिलता है। एआई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हर छात्र को अलग-अलग तरीके से पढऩे का अवसर देता है। जहाँ पहले सभी छात्रों को एक जैसा पाठ पढ़ाया जाता था, अब ्रढ्ढ यह समझ सकता है कि कौन सा छात्र किस स्तर पर है और उसे उसी हिसाब से अभ्यास और कठिनाई स्तर प्रदान करता है। हालांकि, इस बदलाव के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या एआई शिक्षकों की जगह ले लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा पूरी तरह संभव नहीं है। शिक्षक छात्रों को प्रेरित करते हैं, उनकी भावनाओं को समझते हैं और उन्हें सही दिशा देते हैं, जो एआई नहीं कर सकता। लेकिन वे शिक्षक जो केवल रिकॉर्डेड वीडियो पर निर्भर हैं, उनके लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। कुल मिलाकर, एआई ने शिक्षा को अधिक पर्सनलाइज्ड, तेज और सुलभ बना दिया है। आने वाले समय में यह तकनीक शिक्षा के क्षेत्र को और भी बदल सकती है, जहाँ एआई और शिक्षक मिलकर छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करेंगे।

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AI से बदल रही है पढ़ाई की दुनिया

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) भारत की शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदल रहा है। अब पढ़ाई केवल किताबों या वीडियो तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ्रढ्ढ की मदद से हर छात्र अपनी जरूरत और गति के अनुसार सीख सकता है। पहले अगर कोई छात्र किसी विषय में फँस जाता था, तो उसे बार-बार वही वीडियो देखना पड़ता था या इंटरनेट पर समाधान ढूंढना पड़ता था, जो अक्सर उसकी समस्या के अनुसार नहीं होता था। लेकिन अब एआई आधारित टूल्स तुरंत समाधान देते हैं और छात्र की समझ के स्तर के अनुसार मार्गदर्शन करते हैं। इस बदलाव को आगे बढ़ाने में कई बड़ी कंपनियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिजिक्सवाला, कार्सेरा और स्केलर जैसे प्लेटफॉर्म अपने सिस्टम में एआई को शामिल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, फिजिक्सवाला ने "्रह्यद्म ्रढ्ढ" नाम का टूल शुरू किया है, जो छात्रों के सवालों का 24 घंटे जवाब देता है और लाखों सवालों का समाधान कर चुका है। इसके अलावा, इसका ्रढ्ढ सिस्टम छात्रों के लिखित उत्तरों की जांच भी करता है, जिससे समय की बचत होती है। वहीं, कार्सेरा का एआई ट्यूटर छात्रों को उसी कोर्स की सामग्री के आधार पर जवाब देता है, जिससे गलत जानकारी मिलने की संभावना कम हो जाती है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े कई छात्रों ने बताया है कि इससे उनकी पढ़ाई बेहतर हुई है। इसी तरह, स्केलर का मानना है कि एआई छात्रों को तुरंत फीडबैक देकर उनकी सीखने की गति बढ़ाता है, जिससे वे जल्दी सुधार कर पाते हैं। एक और उदाहरण नेक्स्टवेव (हृ3ह्लङ्खड्ड1द्ग) का है, जो भारत के सैकड़ों जिलों में क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म एआई की मदद से छात्रों को उनकी भाषा और स्तर के अनुसार पढ़ाई का अवसर देता है, जिससे छोटे शहरों के छात्रों को भी बराबरी का मौका मिलता है। एआई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हर छात्र को अलग-अलग तरीके से पढऩे का अवसर देता है। जहाँ पहले सभी छात्रों को एक जैसा पाठ पढ़ाया जाता था, अब ्रढ्ढ यह समझ सकता है कि कौन सा छात्र किस स्तर पर है और उसे उसी हिसाब से अभ्यास और कठिनाई स्तर प्रदान करता है। हालांकि, इस बदलाव के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या एआई शिक्षकों की जगह ले लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा पूरी तरह संभव नहीं है। शिक्षक छात्रों को प्रेरित करते हैं, उनकी भावनाओं को समझते हैं और उन्हें सही दिशा देते हैं, जो एआई नहीं कर सकता। लेकिन वे शिक्षक जो केवल रिकॉर्डेड वीडियो पर निर्भर हैं, उनके लिए चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। कुल मिलाकर, एआई ने शिक्षा को अधिक पर्सनलाइज्ड, तेज और सुलभ बना दिया है। आने वाले समय में यह तकनीक शिक्षा के क्षेत्र को और भी बदल सकती है, जहाँ एआई और शिक्षक मिलकर छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करेंगे।


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