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11-04-2026

New-Age कस्टमर्स दे रहे ऑनलाइन रिटेल मार्केट को रफ्तार

  •  देश का रिटेल मार्केट शिफ्ट से गुजर रहा है। एक समय नेबरहुड किराना स्टोर की विजिट हमारी डेली लाइफ का हिस्सा होती थी लेकिन अब स्क्रीन को टैप करने से ही दस मिनट में ग्रॉसरी आदि चीजों की डिलीवरी हो जाती है। क्विक कॉमर्स का कमाल ऐसा है कि चीजों की डिलीवरी दस मिनट में सम्भव हो रही है। न्यू ऐज कस्टमर्स के लिये तो कन्वीनियंस, स्पीड और डिजिटल सरलता ने एक अनुभव सैट कर दिया है।  अबरन इन्डिया में यह टेक ड्रिवन मॉडल पैर पसार रहा है। यह प्लेटफॉर्म केवल स्पीड ही ऑफर नहीं कर रहा बल्कि किराना इको-सिस्टम को रीडिफाइन करने का काम कर रहा है। सेक्टर ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में 64,000 ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू नोटिस की है और 2028 में यह बढक़र 2 लाख करोड़ रुपये हो जाने की सम्भावना है। डिजिटल रिवोल्यूशन इस काम में सहयोग करेगी। क्विक कॉमर्स में रैपिड ग्रोथ ने एक बड़ी गिग वर्कफोर्स को जन्म दे दिया है। क्यू कॉमर्स वैल्यू चेन में डिलीवरी रोल्स काफी इंटीगे्रटेड हैं। देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भी तेजी से वृद्धि की है। वर्तमान में करीब 1.12 बिलियन मोबाइल कनेक्शंस हैं और 806 मिलियन इंटरनेट यूजर्स का बेस है। कोविड ने डिजिटल वल्र्ड से कन्ज्यूमर्स को बेहतर रूबरू करवा दिया और अब तो यह उनकी डेली लाइफ में शामिल हो गया है। क्विक कॉमर्स ने प्लेयर्स को डार्क स्टोर्स इन्फ्रास्ट्रक्चर सैट करने के लिये तैयार किया है। रेजीडेंशियल जोंस में स्मॉल फॉर्मेट वेयरहाउसेज सैट किये जा रहे हैं ताकि डिलीवरी जल्दी से सम्भव हो। फाइनेंशियल ईयर 2024 और 2025 में डार्क स्टोर्स की संख्या में 70 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह वृद्धि निरंतर जारी है। क्विक कॉमर्स का विस्तार केवल डिजिटल ही नहीं है, बल्कि साइकोलॉजिकल और लॉजिसटीकल भी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार 75 प्रतिशत क्विक कॉमर्स शॉपर्स अनप्लांड परचेज करते हैं। इसका कारण प्रमोशंस, ऑन डिमांड ऑर्डरिंग की कन्वीनियंस है। करीब पचास प्रतिशत प्रतिमाह करीब 5 ऑर्डर प्लेस कर ही देते हैं। एवरेंज वैल्यू 400 रुपये प्रति परचेज हो सकती है। इससे यह पता चलता है कि प्लेटफॉर्म एंगेजमेंट और ब्राण्ड स्टिकनैस बढ़ रही है। हालांकि किराना स्टोर अभी भी देश के 617 बिलियन डॉलर के ग्रॉसरी मार्केट में 92.2 प्रतिशत हिस्सा रख रहे हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2024 का है। किराना स्टोर्स ट्रस्ट, फ्लेक्जीबिलिटी और पर्सनेलाइजेशन जैसी मजबूत रिश्ते को बनाये रखने के लिये प्रयास में लगे हुए हैं। एक सर्वे में 46 प्रतिशत कन्ज्यूमर्स ने कहा कि उन्होंने किराना शॉपिंग से ड्रॉप ले लिया है, 82 प्रतिशत ने कहा कि वे एक तियाही ग्रॉसरी शॉपिंग ऑनलाइन करते हैं।  क्विक कॉमर्स सेगमेंट में ब्लिंकइट, जेप्टो, स्विगी इन्स्टामार्ट, डुंजो, बिगबास्केट ने पैर पसारे हैं। मार्केट अभी अकोमोडेटिव मोड में है, लेकिन जैसे ही सैच्यूरेशन की एंट्री होगी, उस समय का यूनिट इकोनॉमिक्स देखने वाली बात रहेगी।

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New-Age कस्टमर्स दे रहे ऑनलाइन रिटेल मार्केट को रफ्तार

 देश का रिटेल मार्केट शिफ्ट से गुजर रहा है। एक समय नेबरहुड किराना स्टोर की विजिट हमारी डेली लाइफ का हिस्सा होती थी लेकिन अब स्क्रीन को टैप करने से ही दस मिनट में ग्रॉसरी आदि चीजों की डिलीवरी हो जाती है। क्विक कॉमर्स का कमाल ऐसा है कि चीजों की डिलीवरी दस मिनट में सम्भव हो रही है। न्यू ऐज कस्टमर्स के लिये तो कन्वीनियंस, स्पीड और डिजिटल सरलता ने एक अनुभव सैट कर दिया है।  अबरन इन्डिया में यह टेक ड्रिवन मॉडल पैर पसार रहा है। यह प्लेटफॉर्म केवल स्पीड ही ऑफर नहीं कर रहा बल्कि किराना इको-सिस्टम को रीडिफाइन करने का काम कर रहा है। सेक्टर ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में 64,000 ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू नोटिस की है और 2028 में यह बढक़र 2 लाख करोड़ रुपये हो जाने की सम्भावना है। डिजिटल रिवोल्यूशन इस काम में सहयोग करेगी। क्विक कॉमर्स में रैपिड ग्रोथ ने एक बड़ी गिग वर्कफोर्स को जन्म दे दिया है। क्यू कॉमर्स वैल्यू चेन में डिलीवरी रोल्स काफी इंटीगे्रटेड हैं। देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भी तेजी से वृद्धि की है। वर्तमान में करीब 1.12 बिलियन मोबाइल कनेक्शंस हैं और 806 मिलियन इंटरनेट यूजर्स का बेस है। कोविड ने डिजिटल वल्र्ड से कन्ज्यूमर्स को बेहतर रूबरू करवा दिया और अब तो यह उनकी डेली लाइफ में शामिल हो गया है। क्विक कॉमर्स ने प्लेयर्स को डार्क स्टोर्स इन्फ्रास्ट्रक्चर सैट करने के लिये तैयार किया है। रेजीडेंशियल जोंस में स्मॉल फॉर्मेट वेयरहाउसेज सैट किये जा रहे हैं ताकि डिलीवरी जल्दी से सम्भव हो। फाइनेंशियल ईयर 2024 और 2025 में डार्क स्टोर्स की संख्या में 70 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह वृद्धि निरंतर जारी है। क्विक कॉमर्स का विस्तार केवल डिजिटल ही नहीं है, बल्कि साइकोलॉजिकल और लॉजिसटीकल भी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार 75 प्रतिशत क्विक कॉमर्स शॉपर्स अनप्लांड परचेज करते हैं। इसका कारण प्रमोशंस, ऑन डिमांड ऑर्डरिंग की कन्वीनियंस है। करीब पचास प्रतिशत प्रतिमाह करीब 5 ऑर्डर प्लेस कर ही देते हैं। एवरेंज वैल्यू 400 रुपये प्रति परचेज हो सकती है। इससे यह पता चलता है कि प्लेटफॉर्म एंगेजमेंट और ब्राण्ड स्टिकनैस बढ़ रही है। हालांकि किराना स्टोर अभी भी देश के 617 बिलियन डॉलर के ग्रॉसरी मार्केट में 92.2 प्रतिशत हिस्सा रख रहे हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2024 का है। किराना स्टोर्स ट्रस्ट, फ्लेक्जीबिलिटी और पर्सनेलाइजेशन जैसी मजबूत रिश्ते को बनाये रखने के लिये प्रयास में लगे हुए हैं। एक सर्वे में 46 प्रतिशत कन्ज्यूमर्स ने कहा कि उन्होंने किराना शॉपिंग से ड्रॉप ले लिया है, 82 प्रतिशत ने कहा कि वे एक तियाही ग्रॉसरी शॉपिंग ऑनलाइन करते हैं।  क्विक कॉमर्स सेगमेंट में ब्लिंकइट, जेप्टो, स्विगी इन्स्टामार्ट, डुंजो, बिगबास्केट ने पैर पसारे हैं। मार्केट अभी अकोमोडेटिव मोड में है, लेकिन जैसे ही सैच्यूरेशन की एंट्री होगी, उस समय का यूनिट इकोनॉमिक्स देखने वाली बात रहेगी।


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