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16-04-2026

‘पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण मार्च में भारत का रत्न एवं ज्वैलरी निर्यात 35% घटा’

  • इस साल मार्च में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 35.23 प्रतिशत घटकर 2,771.74 करोड़ डॉलर (2,44,827.26 करोड़ रुपये) रह गया। इस मुख्य कारण पश्चिम एशिया संघर्ष है। रत्न एवं आभूषण उद्योग के शीर्ष निकाय जीजेईपीसी ने मंगलवार यह जानकारी दी। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2025 में कुल रत्न और आभूषण निर्यात 2,866 करोड़ 95.3 लाख डॉलर (2,42,559.39 करोड़ रुपये) का हुआ था। जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया, ‘‘पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से मार्च में रत्न और आभूषण निर्यात पर असर पड़ा, क्योंकि लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ा। हीरा निर्यात के पार्सल भी नहीं जा सके। ज़्यादा जोखिम वाली स्थिति की वजह से, बीमा प्रीमियम आसमान छू गए, जिससे निर्यात क्षेपों पर और असर पड़ा।’’हालांकि, भंसाली ने कहा कि नीतिगत समर्थन से, यह स्थिति भारत के लिए एक मौका बन सकती है, जिससे देश अनगढ़ हीरा कारोबार का केंद्र बन सकता है। भंसाली ने कहा, ‘‘संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कंपनियां भारत में अनगढ़ हीरा कारोबार शुरू करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रही हैं। मुझे लगता है कि सरकार के समर्थन से, हम भारत को एक कारोबारी केंद्र बना सकते हैं, क्योंकि हम पहले से ही पॉलिशिंग के मामले में एक प्रमुख केंद्र हैं।’’वर्ष 2020 से, संयुक्त अरब अमीरात, भारत तक आसान पहुंच की वजह से एक अनगढ़ हीरा कारोबार का मुख्य केंद्र (हब) बन गया है। इस बीच, वर्ष 2025-26 में रत्न और आभूषण का कुल निर्यात 3.32 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,771.74 करोड़ (2,44,827.26 करोड़ रुपये) रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 2,866 करोड़ 95.3 लाख डॉलर (2,42,559.39 करोड़ रुपये) था। भंसाली ने कहा कि अमेरिका के शुल्क लगाने का असर कम हो गया है, क्योंकि जीजेईपीसी ने दूसरे बाजार तलाशे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस बीच, तराशे और पॉलिश किए गए हीरों (सीपीडी) का कुल निर्यात मार्च में 27.48 प्रतिशत घटकर 83 करोड़ 87.5 लाख डॉलर (7,798.82 करोड़ रुपये) रह गया, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 115.66 करोड़ डॉलर (10,002.52 करोड़ रुपये) था।

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‘पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण मार्च में भारत का रत्न एवं ज्वैलरी निर्यात 35% घटा’

इस साल मार्च में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 35.23 प्रतिशत घटकर 2,771.74 करोड़ डॉलर (2,44,827.26 करोड़ रुपये) रह गया। इस मुख्य कारण पश्चिम एशिया संघर्ष है। रत्न एवं आभूषण उद्योग के शीर्ष निकाय जीजेईपीसी ने मंगलवार यह जानकारी दी। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च, 2025 में कुल रत्न और आभूषण निर्यात 2,866 करोड़ 95.3 लाख डॉलर (2,42,559.39 करोड़ रुपये) का हुआ था। जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया, ‘‘पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से मार्च में रत्न और आभूषण निर्यात पर असर पड़ा, क्योंकि लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ा। हीरा निर्यात के पार्सल भी नहीं जा सके। ज़्यादा जोखिम वाली स्थिति की वजह से, बीमा प्रीमियम आसमान छू गए, जिससे निर्यात क्षेपों पर और असर पड़ा।’’हालांकि, भंसाली ने कहा कि नीतिगत समर्थन से, यह स्थिति भारत के लिए एक मौका बन सकती है, जिससे देश अनगढ़ हीरा कारोबार का केंद्र बन सकता है। भंसाली ने कहा, ‘‘संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कंपनियां भारत में अनगढ़ हीरा कारोबार शुरू करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रही हैं। मुझे लगता है कि सरकार के समर्थन से, हम भारत को एक कारोबारी केंद्र बना सकते हैं, क्योंकि हम पहले से ही पॉलिशिंग के मामले में एक प्रमुख केंद्र हैं।’’वर्ष 2020 से, संयुक्त अरब अमीरात, भारत तक आसान पहुंच की वजह से एक अनगढ़ हीरा कारोबार का मुख्य केंद्र (हब) बन गया है। इस बीच, वर्ष 2025-26 में रत्न और आभूषण का कुल निर्यात 3.32 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,771.74 करोड़ (2,44,827.26 करोड़ रुपये) रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 2,866 करोड़ 95.3 लाख डॉलर (2,42,559.39 करोड़ रुपये) था। भंसाली ने कहा कि अमेरिका के शुल्क लगाने का असर कम हो गया है, क्योंकि जीजेईपीसी ने दूसरे बाजार तलाशे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस बीच, तराशे और पॉलिश किए गए हीरों (सीपीडी) का कुल निर्यात मार्च में 27.48 प्रतिशत घटकर 83 करोड़ 87.5 लाख डॉलर (7,798.82 करोड़ रुपये) रह गया, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 115.66 करोड़ डॉलर (10,002.52 करोड़ रुपये) था।


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