सोने की कीमतें भले ही रिकॉर्ड स्तरों के आस-पास पहुंच गई हों, लेकिन ज्वैलरी बाजार की रफ्तार बनी हुई है। फर्क बस इतना है कि अब बाजार दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। एक तरफ वे लोग हैं जो बिना ज्यादा सोचे महंगे और आकर्षक डिज़ाइन वाली ज्वैलरी खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारी से पहले कई बार सोच रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, यह स्थिति K-Shape रिकवरी को दिखाती है। यानी एक वर्ग तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि दूसरा वर्ग दबाव में है। आज का संपन्न ग्राहक ज्वैलरी को सिर्फ निवेश नहीं मानता, बल्कि उसे अपनी लाइफस्टाइल और स्टेटस से जोडक़र देखता है। यही वजह है कि वह अच्छे डिज़ाइन, बेहतर क्वालिटी और भरोसेमंद नाम को ज्यादा महत्व देता है। ऐसे ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अलग और खास दिखने वाले ज्वैलरी पसंद करते हैं। वहीं, बाजार में यह भी देखा जा रहा है कि महंगे और हाई वेल्यू वाली ज्वैलरी की बिक्री बढ़ रही है। लोग अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि डिज़ाइन और गुणवत्ता को देखकर खरीदारी कर रहे हैं। यही कारण है कि औसतन एक ग्राहक जितना खर्च कर रहा है, वह भी बढ़ा है। दूसरी ओर, मध्यम वर्ग के लोग अब ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। वे हल्की और सस्ती ज्वैलरी खरीद रहे हैं या फिर खरीदारी को टाल रहे हैं। उनके लिए अब सबसे जरूरी है कि कम पैसे में ज्यादा लाभ मिले। इसलिए उनकी खरीदारी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है। इसके बावजूद, ज्वैलरी की मांग पूरी तरह कम नहीं हुई है। अब लोग सिर्फ शादी-ब्याह के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए या उपहार देने के लिए भी आभूषण खरीद रहे हैं। त्योहारों और खास मौकों पर भी खरीदारी बढ़ रही है। इससे ज्वैलरी अब धीरे-धीरे दैनिक जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। कुल मिलाकर, महंगे सोने ने बाजार को कमजोर नहीं किया, बल्कि उसे बदल दिया है। जहां संपन्न वर्ग बाजार को आगे बढ़ा रहा है, वहीं सामान्य लोग सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं। साफ है कि आने वाले समय में अच्छे डिज़ाइन, भरोसेमंद नाम और उच्च श्रेणी की ज्वैलरी की मांग और बढऩे वाली है।