हमारे देश में गर्मियों में बच्चों के स्कूलों की छुट्टियां होती हैं और यह सीजन हॉलीडे ट्रिप पर जाने का पीक सीजन होता है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण डोमेस्टिक ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है। पश्चिमी एशिया, मिडिल ईस्ट के देशों के लिये बुकिंग काफी कम है। इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार इस बार डोमेस्टिक डेस्टीनेशंस पर ही बुकिंग ज्यादा देखने को मिल रही है। जिस प्रकार एयर ट्रैवल प्रभावित है, देश से बाहर जाने का जोखिम ट्यूरिस्ट नहीं उठाना चाहेंगे। फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इन्डिया ट्यूरिज्म एंड हॉस्पीटेलिटी (फेथ) के अनुसार बुकिंग से यह पता चल रहा है कि इस बार घरेलू लोकेशंस पर ही ज्यादा भ्रमण देखने को मिलेगा। ठंडे स्थानों की सर्च ज्यादा देखी जा रही है। नॉर्थ ईस्ट, हिल स्टेशंस, उत्तराखंड के लिये बुकिंग अधिक रह सकती है। मेकमायट्रिप को-फाउंडर के अनुसार उत्तराखंड के कम प्रचलित, कम भीड़-भाड़ वाले लोकेशंस को सर्च किया जा रहा है। सीजन में ट्रैवलर्स हिल स्टेशंस के साथ स्प्रिच्युअल सर्किट्स का रुख कर रहे हैं। ऊटी, जैसलमेर, मनाली आदि फेवरेट स्पॉट्स में रह सकते हैं। एक और लोकेशन है जलगांव। यह भी इमर्जिंग कैटेगरी में आ रहा है। उनके अनुसार जब ग्लोबली अनिश्चितता का दौर आता है तो एविएशन सुविधा कमजोर पड़ती है, इससे भारतीय पर्यटक देश में ही ट्रेवलिंग पसंद करते हैं। हाल ही में शिमला की तस्वीरें आई थी, जिसमें भारी ट्रेफिक जाम की स्थिति बनी। इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर पूर्वी राज्य समर सीजन में मजबूत डिमांड प्रदर्शित कर सकते हैं। इसके अलावा गोवा, अंडामन एंड निकोबार द्वीप समुह, भी पर्यटकों की चॉइस बन सकते हैं। विशेष रूप से आध्यात्मिक सर्किट जैसे अयोध्या, वाराणसी, पुरी, बोधगया, प्रयागराज, हरिद्वार, ऋषिकेश, तिरुपति, रामेश्वरम् के लिये बुकिंग हाई रह सकती है। कुल मिलाकर यह अनुमान है कि इस बार समर सीजन में घरेलू स्थलों के ट्यूर ज्यादा देखने को मिलेंगे।