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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-04-2026

फ्यूल प्राइस: ईवी और हाइब्रिड ने पकड़ी स्पीड

  •  हाई ऑइल प्राइस ने ऑटो इंक में ईवी के ट्रेंड को फास्ट्रेक कर दिया है। क्रूड ऑइल की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने के कारण फ्यूल कॉस्ट  चैलेंज बन रहा है और वेस्ट एशिया क्राइसिस जल्दी हल निकलने की उम्मीद भी घटती जा रही हैं। इसका डायरेक्ट इंपैक्ट वेहीकल खरीदने के फैसलों पर पड़ रहा है। इन बदलते हालात में बायर के ट्रोल-डीजल वेहीकल्स के बजाय इलेक्ट्रिक वेहीकल्स और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ऑप्शन्स की ओर तेजी से शिफ्ट होने के संकेत मिल रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्यूल कॉस्ट बढऩे के कारण ईवी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड की वेल्यू प्रपोजिशन और अधिक आकर्षक हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त वर्ष 27 में गाडिय़ों की प्राइस बढऩे की आशंका के चलते बहुत से बायर्स ने अपनी परचेज प्रीपोन (पहले) कर ली है। गल्फ क्राइसिस के कारण इनपुट कॉस्ट बढऩे से गाडिय़ां महंगी होने की आशंका है। गाड़ी महंगी होने के साथ ही फ्यूल महंगा होना जीएसटी कटौती के बाद हाई ग्रोथ के रास्ते पर बढ़ रही ऑटो इंक के लिए डबल चैलेंज बन सकते हैं। ईवी के पक्ष में माहौल बनते देख ऑटो कंपनियों ने भी अपने ईवी मॉडलों को आक्रामक रूप से प्रमोट करना शुरू कर दिया है। ईवी का सेल्स वॉल्यूम बढऩे से ऑटो कंपनियों को कैफे-2 नॉम्र्स को पूरा करने में भी मदद मिल जाएगा। हालांकि सरकार की टू-व्हीलर पर पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत मिलने वाली सब्सिडी भले ही घटकर  केवल 5 हजार रुपये रह गई हो, लेकिन इसने एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में डिमांड को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई। ईवी सेल्स में फास्ट शिफ्ट के इस ट्रेंड का अंदाजा मार्च 26 की सेल्स से भी लग सकता है। ईवी सेल्स के मामले में यह रिकॉर्ड तोड़ महीना साबित हुआ। वाहन पोर्टल के अनुसार इस दौरान इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन 49 परसेंट बढक़र 19,711 यूनिट्स तक पहुंच गया वहीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल्स 36 परसेंट की हाईग्रोथ के साथ 1,77,485 यूनिट्स तक पहुंच गई। इस दौरान इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन दोगुना होकर 1,93,633 यूनिट्स तक पहुंच गया, जबकि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल्स 21.8 परसेंट बढक़र 14 लाख यूनिट्स हो गई। हालांकि इसका कारण वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में डीलर डिस्काउंट भी है। पैसेंजर ईवी में टाटा मोटर्स ने 8,224 यूनिट्स के साथ लीडरशिप बरकरार रखी जबकि महिन्द्रा एंड महिन्द्रा 5,217 यूनिट्स के साथ दूसरे और जेएसडब्ल्यू एमजी 5,113 यूनिट्स के साथ तीसरे पायदान पर रही। किआ ने 940 यूनिट्स बेचीं, जबकि नए खिलाड़ी भी धीरे-धीरे बाजार में जगह बना रहे हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में टीवीएस 49,453 यूनिट्स के साथ टॉप पर रही फिर बजाज 46,246, एथर 35,688 और ओला 10,117 का स्थान रहा।

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फ्यूल प्राइस: ईवी और हाइब्रिड ने पकड़ी स्पीड

 हाई ऑइल प्राइस ने ऑटो इंक में ईवी के ट्रेंड को फास्ट्रेक कर दिया है। क्रूड ऑइल की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने के कारण फ्यूल कॉस्ट  चैलेंज बन रहा है और वेस्ट एशिया क्राइसिस जल्दी हल निकलने की उम्मीद भी घटती जा रही हैं। इसका डायरेक्ट इंपैक्ट वेहीकल खरीदने के फैसलों पर पड़ रहा है। इन बदलते हालात में बायर के ट्रोल-डीजल वेहीकल्स के बजाय इलेक्ट्रिक वेहीकल्स और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ऑप्शन्स की ओर तेजी से शिफ्ट होने के संकेत मिल रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्यूल कॉस्ट बढऩे के कारण ईवी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड की वेल्यू प्रपोजिशन और अधिक आकर्षक हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त वर्ष 27 में गाडिय़ों की प्राइस बढऩे की आशंका के चलते बहुत से बायर्स ने अपनी परचेज प्रीपोन (पहले) कर ली है। गल्फ क्राइसिस के कारण इनपुट कॉस्ट बढऩे से गाडिय़ां महंगी होने की आशंका है। गाड़ी महंगी होने के साथ ही फ्यूल महंगा होना जीएसटी कटौती के बाद हाई ग्रोथ के रास्ते पर बढ़ रही ऑटो इंक के लिए डबल चैलेंज बन सकते हैं। ईवी के पक्ष में माहौल बनते देख ऑटो कंपनियों ने भी अपने ईवी मॉडलों को आक्रामक रूप से प्रमोट करना शुरू कर दिया है। ईवी का सेल्स वॉल्यूम बढऩे से ऑटो कंपनियों को कैफे-2 नॉम्र्स को पूरा करने में भी मदद मिल जाएगा। हालांकि सरकार की टू-व्हीलर पर पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत मिलने वाली सब्सिडी भले ही घटकर  केवल 5 हजार रुपये रह गई हो, लेकिन इसने एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में डिमांड को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई। ईवी सेल्स में फास्ट शिफ्ट के इस ट्रेंड का अंदाजा मार्च 26 की सेल्स से भी लग सकता है। ईवी सेल्स के मामले में यह रिकॉर्ड तोड़ महीना साबित हुआ। वाहन पोर्टल के अनुसार इस दौरान इलेक्ट्रिक कारों का रजिस्ट्रेशन 49 परसेंट बढक़र 19,711 यूनिट्स तक पहुंच गया वहीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल्स 36 परसेंट की हाईग्रोथ के साथ 1,77,485 यूनिट्स तक पहुंच गई। इस दौरान इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन दोगुना होकर 1,93,633 यूनिट्स तक पहुंच गया, जबकि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सेल्स 21.8 परसेंट बढक़र 14 लाख यूनिट्स हो गई। हालांकि इसका कारण वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में डीलर डिस्काउंट भी है। पैसेंजर ईवी में टाटा मोटर्स ने 8,224 यूनिट्स के साथ लीडरशिप बरकरार रखी जबकि महिन्द्रा एंड महिन्द्रा 5,217 यूनिट्स के साथ दूसरे और जेएसडब्ल्यू एमजी 5,113 यूनिट्स के साथ तीसरे पायदान पर रही। किआ ने 940 यूनिट्स बेचीं, जबकि नए खिलाड़ी भी धीरे-धीरे बाजार में जगह बना रहे हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में टीवीएस 49,453 यूनिट्स के साथ टॉप पर रही फिर बजाज 46,246, एथर 35,688 और ओला 10,117 का स्थान रहा।


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