डाबर के तेजी से बढ़ते कदम
डाबर आज देश भर में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स यानि एफएमसीजी कम्पनियों में शामिल है। पिछले कई वर्षों से डाबर सुपरब्रांड की श्रेणी में भी शामिल है। आज एफएमसीजी उत्पादों का शायद
स्पाइस का स्पाइसी सक्सेस
1990 के दशक की शुरुआत में भारत में नरसिम्हाराव के नेतृत्व वाली सरकार ने लाइसेन्सराज की चूलें हिला दी थी। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की सफेद हाथी जैसी
मंदी और कारोबारी प्रबन्धन
यदि किसी कम्पनी की आर्थिक सेहत अच्छी है तो मंदी के इस माहौल में वर्ष 2009 काफी महत्वपूर्ण होगा। इस वर्ष कम्पनियां यदि सही अवसर तलाश कर सही निर्णय करती हैं तो आने वाले वर्षों में कम्पनी के भविष्य के निर्धारण में महत्वपूर्ण कदम साबित हो
कुछ नया नहीं बता पाये स्वामी सुखबोधानंद
जयपुर। जयपुर के बिडला ऑडिटोरियम में शुक्रवार, 3 फरवरी की सुबह स्वामी सुखबोधानंद का व्याख्यान अपने मूल विषय से जहां थोड़ा हट ...

कोटा फर्नीचर व्यवसाय को अपेक्षित जगह की जरूरत
कोटा। विकास तथा आय में सुधार के साथ लोगों की लाइफ स्टाइल में आए परिवर्तन में रहन-सहन का विशेष महत्व बढ़ा है। रहन-सहन में बदलाव में फर्नीचर अहम हुआ है और इसका आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। इन हालात में देश में आयातित फर्नीचर तक को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सका है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अकेले कोटा शहर में 5 करोड़ सालाना का ...
एकमुश्त समाधान योजना के तहत पैनल्टी ब्याज में छूट
पाली। राजस्थान अनुसूचित जाति-जनजाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से एकमुश्त समाधान योजना के तहत 100 प्रतिशत पेनल्टी ब्याज में ...
रा‌ष्ट्रीय सहकार व्यापार व मसाला मेला अप्रेल में
जयपुर। सहकारिता विभाग द्वारा रा‌ष्ट्रीय सहकार व्यापार व मसाला मेले का अप्रेल में जयपुर में आयोजन किया जाएगा। सहकारी समितियों के ...
सच में अब तो कांग्रेस का राम भी मालिक नहीं है
जिस तरह से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. चंद्रभान राजस्थान की कांग्रेस को कमजोर बता रहे हैं तथा अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस में जनार्दन द्विवेदी सरीखे जयप्रकाश-लोहियावादी लोगों को तरजीह मिल रही है, उसे देखते हुए तो यही लग रहा है कि अब तो कांग्रेस का राम भी मालिक नहीं है। वस्तुतः ये हालात बता रहे हैं कि कांग्रेस अपना मूल स्वरूप खोती जा रही है और गैर ...

‘‘यदि हमार॓ भीतर उच्च अहिंसा के भाव हों तो शेर भी अपना हिंसक भाव भूल जाता है।’’
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