भारतीय शेयर बाजार को लेकर एक ऐसी भविष्यवाणी सामने आई है जिसने दलाल स्ट्रीट पर हलचल बढ़ा दी है। CNI InfoXchange की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अगर विदेशी निवेशकों यानी FIIs की वापसी होती है और भारत में दोबारा बड़ा पैसा आता है, तो निफ्टी 50 साल 2029 तक 42,000 के मेगा लेवल को टच कर सकता है। रिपोर्ट का कहना है कि इंडिया अब सिर्फ ‘अर्निंग्स स्टोरी’ नहीं रहा, बल्कि दुनिया के सबसे मजबूत ‘फ्लो-ड्रिवन मार्केट’ में तेजी से बदल रहा है। आसान भाषा में कहें तो जहां पैसा जाएगा। बाजार वहीं भागेगा — और फिलहाल दुनिया की नजर भारत पर टिकी हुई है। रिपोर्ट के आंकड़े भी इस बुलिश कहानी को दमदार सपोर्ट देते हैं। 2019 से सितंबर 2021 के बीच करीब 54 अरब डॉलर के FIIs निवेश ने निफ्टी में 63% की जबरदस्त रैली कराई थी। इसके बाद जुलाई 2022 से सितंबर 2024 तक आए 45 अरब डॉलर के निवेश ने इंडेक्स को करीब 68' तक उछाल दिया। अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अगले कुछ वर्षों में फिर से 50 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी पैसा भारत में आता है, तो निफ्टी के लिए 40,000-42,000 का सफर मुश्किल नहीं रहेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारतीय बाजार की कहानी सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है। स्ढ्ढक्क निवेश, रिटेल इन्वेस्टर्स और घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने मार्केट की पूरी तस्वीर बदल दी है। कभी विदेशी बिकवाली से कांपने वाला बाजार अब काफी हद तक ‘आत्मनिर्भर’ बन चुका है। भारी सेलिंग के बावजूद घरेलू निवेशकों ने बाजार को गिरने नहीं दिया और यही वजह है कि हर गिरावट के बाद बाजार ने तेजी से वापसी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तेज त्रष्ठक्क ग्रोथ, सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पुश, मैन्युफैक्चरिंग बूम, क्रक्चढ्ढ की सपोर्टिव पॉलिसी और रिकॉर्ड FIIs फ्लो आने वाले वर्षों में बाजार के सबसे बड़े इंजन साबित हो सकते हैं। इतना ही नहीं, MSCI Emerging Markets Index में भारत का वेटेज FDI28 तक 25त्न के करीब पहुंच सकता है, जिससे भारत उभरते बाजारों का नया ‘पोस्टर बॉय’ बन सकता है। CNI InfoXchange का अनुमान है कि FPI27 और FDI28 के दौरान भारत में 160 से 180 अरब डॉलर तक का FDI और FIIs निवेश आ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भारतीय इक्विटी मार्केट दुनिया के सबसे हॉट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है। \हालांकि रिपोर्ट ने एक बड़ा डिस्क्लेमर भी दिया है। अमेरिका की ब्याज दरें, ग्लोबल मंदी, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और दुनिया भर की लिक्विडिटी मार्केट की चाल तय करेंगे। यानी रास्ता आसान नहीं होगा, लेकिन फिलहाल इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर दुनिया का भरोसा लगातार मजबूत होता दिख रहा है। और अगर यह भरोसा बरकरार रहा, तो आने वाले सालों में निफ्टी सिर्फ रिकॉर्ड नहीं बनाएगा, बल्कि शायद इतिहास भी लिखेगा।