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25-05-2026

‘निकट अवधि में भारत का आर्थिक परिदृश्य आपूर्ति संबंधी दबावों से प्रभावित’

  •  आपूर्ति पक्ष के दबावों के कारण निकट अवधि में भारत के आर्थिक परिदृश्य को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है और पश्चिम एशिया संघर्ष का घरेलू मुद्रास्फीति पर पडऩे वाले असर को नजर में रखना जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक बुलेटिन में यह आकलन पेश किया गया। आरबीआई बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया से जुड़ी अनिश्चितताओं की छाया बनी हुई है। हालांकि इस अनिश्चितता के बावजूद अप्रैल में घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली। लेख के मुताबिक, ‘पश्चिम एशिया का संघर्ष जिंस बाजारों, वैश्विक व्यापार प्रवाह और आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव डाल रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। भारत इस चरण में मजबूत व्यापक आर्थिक आधार के साथ प्रवेश कर रहा है।’ लेख कहता है, ‘‘घरेलू मांग से वृद्धि को प्रमुख रूप से समर्थन मिल रहा है लेकिन निकट अवधि का परिदृश्य आपूर्ति पक्ष के दबावों के कारण कुछ हद तक प्रभावित है।’’ बुलेटिन में प्रकाशित लेख के मुताबिक, सकल मुद्रास्फीति संतोषजनक स्तर के दायरे में बनी हुई है, लेकिन घरेलू कीमतों पर इसके प्रभाव की निगरानी जरूरी है। अप्रैल महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढक़र 3.5 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य महंगाई रही, जबकि मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति स्थिर रही।  ईरान से जुड़े तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों और व्यापार प्रवाह में बाधाओं के कारण आपूर्ति शृंखला पर दबाव 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली वस्तुओं की कीमतें अप्रैल और मई की शुरुआत में ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। एल्युमिनियम, जिंक और निकेल जैसी आधार धातुओं की कीमतें आपूर्ति में व्यवधान और ईंधन लागत बढऩे से बढ़ गईं। लेख में कहा गया, ‘वित्तीय परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी प्रवाह बाह्य क्षेत्र के परिदृश्य के लिए चुनौती बने हुए हैं।’ अप्रैल 2026 में व्यापार घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल और सोने के आयात बढऩे के कारण मार्च के मुकाबले बढ़ा। हालांकि, मजबूत सेवा निर्यात, एफडीआई का शुद्ध सकारात्मक प्रवाह, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और सरकार एवं आरबीआई के सक्रिय नीतिगत कदम बाहरी झटकों के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं। लेख में कहा गया कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत का व्यापार ढांचा पुनर्गठित हो रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए व्यापार अप्रैल 2026 में बढ़ा जबकि मार्च में इसमें गिरावट आई थी। इसके मुताबिक, ईंधन खपत, व्यापार और लॉजिस्टिक जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों से अप्रैल में आर्थिक गतिविधियों का मिश्रित रुझान सामने आया। जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने से ई-वे बिल में दहाई अंकों की वृद्धि बनी रही। पेट्रोल और डीजल की खपत बढऩे के बावजूद अप्रैल में नैफ्था, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में तेज गिरावट आने से कुल पेट्रोलियम खपत में कमी आई। वहीं, तापमान बढऩे से बिजली की मांग में तेज वृद्धि हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और केंद्रीय बैंक के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

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‘निकट अवधि में भारत का आर्थिक परिदृश्य आपूर्ति संबंधी दबावों से प्रभावित’

 आपूर्ति पक्ष के दबावों के कारण निकट अवधि में भारत के आर्थिक परिदृश्य को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है और पश्चिम एशिया संघर्ष का घरेलू मुद्रास्फीति पर पडऩे वाले असर को नजर में रखना जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक बुलेटिन में यह आकलन पेश किया गया। आरबीआई बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया से जुड़ी अनिश्चितताओं की छाया बनी हुई है। हालांकि इस अनिश्चितता के बावजूद अप्रैल में घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली। लेख के मुताबिक, ‘पश्चिम एशिया का संघर्ष जिंस बाजारों, वैश्विक व्यापार प्रवाह और आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव डाल रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। भारत इस चरण में मजबूत व्यापक आर्थिक आधार के साथ प्रवेश कर रहा है।’ लेख कहता है, ‘‘घरेलू मांग से वृद्धि को प्रमुख रूप से समर्थन मिल रहा है लेकिन निकट अवधि का परिदृश्य आपूर्ति पक्ष के दबावों के कारण कुछ हद तक प्रभावित है।’’ बुलेटिन में प्रकाशित लेख के मुताबिक, सकल मुद्रास्फीति संतोषजनक स्तर के दायरे में बनी हुई है, लेकिन घरेलू कीमतों पर इसके प्रभाव की निगरानी जरूरी है। अप्रैल महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढक़र 3.5 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य महंगाई रही, जबकि मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति स्थिर रही।  ईरान से जुड़े तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों और व्यापार प्रवाह में बाधाओं के कारण आपूर्ति शृंखला पर दबाव 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली वस्तुओं की कीमतें अप्रैल और मई की शुरुआत में ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। एल्युमिनियम, जिंक और निकेल जैसी आधार धातुओं की कीमतें आपूर्ति में व्यवधान और ईंधन लागत बढऩे से बढ़ गईं। लेख में कहा गया, ‘वित्तीय परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और पूंजी प्रवाह बाह्य क्षेत्र के परिदृश्य के लिए चुनौती बने हुए हैं।’ अप्रैल 2026 में व्यापार घाटा मुख्य रूप से कच्चे तेल और सोने के आयात बढऩे के कारण मार्च के मुकाबले बढ़ा। हालांकि, मजबूत सेवा निर्यात, एफडीआई का शुद्ध सकारात्मक प्रवाह, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और सरकार एवं आरबीआई के सक्रिय नीतिगत कदम बाहरी झटकों के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं। लेख में कहा गया कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत का व्यापार ढांचा पुनर्गठित हो रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए व्यापार अप्रैल 2026 में बढ़ा जबकि मार्च में इसमें गिरावट आई थी। इसके मुताबिक, ईंधन खपत, व्यापार और लॉजिस्टिक जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों से अप्रैल में आर्थिक गतिविधियों का मिश्रित रुझान सामने आया। जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने से ई-वे बिल में दहाई अंकों की वृद्धि बनी रही। पेट्रोल और डीजल की खपत बढऩे के बावजूद अप्रैल में नैफ्था, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में तेज गिरावट आने से कुल पेट्रोलियम खपत में कमी आई। वहीं, तापमान बढऩे से बिजली की मांग में तेज वृद्धि हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और केंद्रीय बैंक के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।


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