सरकार ने बुधवार को दूसरी पीढ़ी के एथनॉल के निर्यात के लिए अतिरिक्त नीतिगत शर्तों को अधिसूचित किया। यह एथनॉल खोई, लकड़ी के कचरे और औद्योगिक कचरे जैसी सामग्रियों से उत्पादित किया जाता है। बयान के अनुसार, दूसरी पीढ़ी के एथनॉल को ईंधन और गैर-ईंधन उद्देश्यों के लिए ‘अनुमति’ दी गई है। इसका उत्पादन खोई, लकड़ी के कचरे, लिग्नोसेल्यूलोसिक फीडस्टॉक (कृषि और वानिकी अवशेष जैसे चावल और गेहूं के भूसे, मक्का) जैसी सामग्रियों और घास, शैवाल जैसी गैर-खाद्य फसलों के जरिये होता है। इनमें कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है या ग्रीनहाउस गैसों में उच्च कमी होती है और जो भूमि उपयोग के लिए खाद्य फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं। हालाकि, यह अनुमति संबंधित सक्षम प्राधिकारी से वैध निर्यात प्राधिकरण और कच्चे माल के प्रमाणन के अधीन है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘दूसरी पीढ़ी के एथनॉल के निर्यात के लिए अतिरिक्त नीतिगत शर्तों को तत्काल प्रभाव से अधिसूचित किया गया है।’’एक नोटिस में कहा गया, ‘‘निर्यातकों को सूचित किया जाता है कि इस अधिसूचना के अनुपालन की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारी विभिन्न खेपों की जांच करेंगे।’’