सरकार ने सोमवार को रत्न और आभूषण क्षेत्र को कुछ दायित्व पूरे करने के लिए 30 और दिन दिए हैं, ताकि उन्हें पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से निपटने में मदद मिल सके। यह क्षेत्र, रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए एक प्रमुख निर्यात गंतव्य है। पश्चिम एशिया का भारत के कुल रत्न और आभूषण निर्यात में लगभग 30' हिस्सा है, जो इस वित्त वर्ष में अप्रैल-फरवरी के दौरान 26.2 अरब डॉलर का रहा। इस उपाय का उद्देश्य अनुपालन आवश्यकताओं को आसान बनाकर और मौजूदा समय में आने वाली परिचालन कठिनाइयों को दूर करके निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है। पिछले महीने अमेरिका और इजऱाइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले ने पश्चिम एशिया में हवाई व समुद्री माल की आवाजाही को प्रभावित किया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के जवाब में एचबीपी-2023 के अध्याय 4 के तहत रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए सुविधाकारी प्रावधान शामिल किए गए हैं, और विशिष्ट श्रेणियों के लिए निर्यात व आयात (जैसा लागू हो) की अवधि को बिना किसी शुल्क या आवेदन की आवश्यकता के 30 दिन के लिए बढ़ाया जा रहा है।’’ अध्याय 4 शुल्क छूट व माफी योजनाओं से संबंधित है। प्रमाणन व ग्रेडिंग उद्देश्यों के लिए आयातित हीरों के पुन: निर्यात, विदेशी खरीदार से प्राप्त कीमती धातुओं की आपूर्ति के बदले निर्यात, प्रदर्शनी उद्देश्यों के लिए विदेश ले जाए गए आभूषणों के पुन: आयात, नामित एजेंसियों के पास बुक किए गए सोने के मामलों में निर्यात, पूर्ण खरीद आधार या ऋण आधार पर प्राप्त सोने के संबंध में आभूषणों के निर्यात और पुन:पूर्ति आधार पर निर्यात के लिए समय सीमा को 30 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। इस छूट के तहत, प्रमाणन व ग्रेडिंग के लिए भेजे गए आयातित हीरों के पुन: निर्यात की अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। विदेशी खरीदार द्वारा आपूर्ति के मामलों में निर्यात की अवधि को भी 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दिया गया है। सरकार ने विदेशों में प्रदर्शनियों के आयोजन या उनमें भाग लेने के लिए निर्यात किए गए रत्न और आभूषणों के पुन: आयात की अवधि को भी, मौजूदा लागू अवधि के अतिरिक्त, 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है। इन छूटों से इस क्षेत्र को सही समय पर मदद मिलने की उम्मीद है। इससे निर्यात करने वालों पर प्रक्रिया से जुड़ा दबाव कम होगा, निर्यात से जुड़े लेन-देन आसानी से पूरे हो पाएंगे और मौजूदा वैश्विक हालात की वजह से सामान की आवाजाही में हो रही देरी को दूर करने में मदद मिलेगी। इस अतिरिक्त समय से कारोबार की निरंतरता बनी रहने और व्यापार में ज़्यादा निश्चितता आने की उम्मीद है। यह भी साफ़ किया है कि निर्यात करने वालों को कोई अलग से आवेदन करने की ज़रूरत नहीं होगी, और न ही इस एक बार की राहत का फ़ायदा उठाने के लिए कोई शुल्क देना होगा। सीमाशुल्क अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे संबंधित निर्यात व आयात लेन-देन को, जैसा भी लागू हो, संबंधित विवरणों के सत्यापन के बाद अनुमति दें। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के पूर्व चेयरमैन कोलिन शाह ने कहा कि यह इस क्षेत्र के लिए ऐसे समय में एक अच्छी राहत है, जब उन्हें पश्चिम एशियाई देशों में निर्यात करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।