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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-06-2026

पहले ताइवान, अब साउथ कोरिया से पिछड़ा इंडिया

  •  भारतीय शेयर बाजार कुल मार्केट कैप के लिहाज मंगलवार को ग्लोबल रैकिंग में फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया। एफआईआई के एक्जिट, कॉरपोरेट इनकम में स्लो ग्रोथ और एआई की लिस्टेड कंपनियों की कमी के कारण भारत को पछाड़ साउथ कोरिया आगे निकल गया। दो सप्ताह में मार्केट कैप के लिहाज भारत के मार्केट्स की रैंकिंग दो पायदान गिरी है। हाल ही ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ा था। एआई मेमोरी चिप मेकर कंपनियों में चल रही तूफानी रैली के कारण साउथ कोरिया के कोस्पी, कोसडैक और कोनेक्स एक्सचेंजों में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 5.01 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि भारत के एनएसई का कुल मार्केट कैप लगभग 4.85 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। बर्नस्टीन के एनेलिस्ट्स के अनुसार करीब 18 महीने पहले भारत का शेयर बाजार साउथ कोरिया से लगभग साढ़े तीन गुना और ताइवान से दोगुने से अधिक बड़ा था। लेकिन 2026 के पहले पांच महीनों में यह बढ़त समाप्त हो गई है। क्योंकि ग्लोबल इंवेस्टर एआई और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर दांव बढ़ा रहे हैं। भारत के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स इस वर्ष क्रमश: 10.1 परसेंट और 12.5 परसेंट तक गिर चुके हैं। वहीं आईटी इंडेक्स में लगभग 19 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है। एफआईआई ने 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से 26.4 बिलियन डॉलर निकाले हैं। यह 2025 के पूरे वर्ष के रिकॉर्ड 18.91 बिलियन डॉलर के आउटफ्लो से भी अधिक है। इसके अलावा एमएससीआई ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी सितंबर 2024 के 21 परसेंट के पीक लेवल से घटकर केवल 12.3 परसेंट रह गई है। साउथ कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स एआई मेमोरी चिप्स की बढ़ती डिमंंाड के कारण ट्रिलियन डॉलर के इलीट क्लब में शामिल हो गई हैं। इसी तरह ताइवान को भी एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के कारण बड़ा फायदा हो रहा है। फ्रांस की इंवेस्टमेंट कंपनी कार्मिन्याक की फंड मैनेजर नाओमी वेस्टेल के अनुसार साउथ कोरिया और ताइवान के उभार ने एमर्जिंग मार्केट्स के निवेश परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। लाइटहाउस कैंटन के सीआईओ (इंडिया) अभय लायजावाला का मानना है कि भारत को एआई बूम का लाभ एक अलग तरीके से मिल सकता है। उनके अनुसार भारत डेटा सेंटर, पावर जेनरेशन, कूलिंग सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क और अन्य एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार इंवेस्टमेंट आकर्षित कर रहा है जो पूरे एआई इकोसिस्टम की आधारशिला हैं। 2 जून 2026 के डेटा के अनुसार अमेरिका 70 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार है।  इसके बाद चीन 14 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत के बाद कनाडा लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर, यूके 4.1 ट्रिलियन डॉलर और फ्रांस 3.8 ट्रिलियन डॉलर के साथ टॉप10 में शामिल हैं। हालांकि साउथ कोरिया और ताइवान से पिछडऩे के कारण इंडिया स्टोरी को खत्म नहीं मान लेना चाहिए। एनेलिस्ट्स के अनुसार दुनिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी, मजबूत घरेलू डिमांड, 148 करोड़ लोगों का कंज्यूमर मार्केट, तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सैक्टर के कारण इंडिया की लॉन्ग-टर्म स्टोरी मजबूत मानी जा रही है।

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पहले ताइवान, अब साउथ कोरिया से पिछड़ा इंडिया

 भारतीय शेयर बाजार कुल मार्केट कैप के लिहाज मंगलवार को ग्लोबल रैकिंग में फिसलकर सातवें स्थान पर पहुंच गया। एफआईआई के एक्जिट, कॉरपोरेट इनकम में स्लो ग्रोथ और एआई की लिस्टेड कंपनियों की कमी के कारण भारत को पछाड़ साउथ कोरिया आगे निकल गया। दो सप्ताह में मार्केट कैप के लिहाज भारत के मार्केट्स की रैंकिंग दो पायदान गिरी है। हाल ही ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ा था। एआई मेमोरी चिप मेकर कंपनियों में चल रही तूफानी रैली के कारण साउथ कोरिया के कोस्पी, कोसडैक और कोनेक्स एक्सचेंजों में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 5.01 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि भारत के एनएसई का कुल मार्केट कैप लगभग 4.85 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। बर्नस्टीन के एनेलिस्ट्स के अनुसार करीब 18 महीने पहले भारत का शेयर बाजार साउथ कोरिया से लगभग साढ़े तीन गुना और ताइवान से दोगुने से अधिक बड़ा था। लेकिन 2026 के पहले पांच महीनों में यह बढ़त समाप्त हो गई है। क्योंकि ग्लोबल इंवेस्टर एआई और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर दांव बढ़ा रहे हैं। भारत के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स इस वर्ष क्रमश: 10.1 परसेंट और 12.5 परसेंट तक गिर चुके हैं। वहीं आईटी इंडेक्स में लगभग 19 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है। एफआईआई ने 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से 26.4 बिलियन डॉलर निकाले हैं। यह 2025 के पूरे वर्ष के रिकॉर्ड 18.91 बिलियन डॉलर के आउटफ्लो से भी अधिक है। इसके अलावा एमएससीआई ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी सितंबर 2024 के 21 परसेंट के पीक लेवल से घटकर केवल 12.3 परसेंट रह गई है। साउथ कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स एआई मेमोरी चिप्स की बढ़ती डिमंंाड के कारण ट्रिलियन डॉलर के इलीट क्लब में शामिल हो गई हैं। इसी तरह ताइवान को भी एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के कारण बड़ा फायदा हो रहा है। फ्रांस की इंवेस्टमेंट कंपनी कार्मिन्याक की फंड मैनेजर नाओमी वेस्टेल के अनुसार साउथ कोरिया और ताइवान के उभार ने एमर्जिंग मार्केट्स के निवेश परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। लाइटहाउस कैंटन के सीआईओ (इंडिया) अभय लायजावाला का मानना है कि भारत को एआई बूम का लाभ एक अलग तरीके से मिल सकता है। उनके अनुसार भारत डेटा सेंटर, पावर जेनरेशन, कूलिंग सिस्टम, ट्रांसमिशन नेटवर्क और अन्य एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार इंवेस्टमेंट आकर्षित कर रहा है जो पूरे एआई इकोसिस्टम की आधारशिला हैं। 2 जून 2026 के डेटा के अनुसार अमेरिका 70 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार है।  इसके बाद चीन 14 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत के बाद कनाडा लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर, यूके 4.1 ट्रिलियन डॉलर और फ्रांस 3.8 ट्रिलियन डॉलर के साथ टॉप10 में शामिल हैं। हालांकि साउथ कोरिया और ताइवान से पिछडऩे के कारण इंडिया स्टोरी को खत्म नहीं मान लेना चाहिए। एनेलिस्ट्स के अनुसार दुनिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी, मजबूत घरेलू डिमांड, 148 करोड़ लोगों का कंज्यूमर मार्केट, तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सैक्टर के कारण इंडिया की लॉन्ग-टर्म स्टोरी मजबूत मानी जा रही है।


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