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12-06-2026

सेबी ने एएमसी कंपनियों के बड़े अधिकारियों के वेतन डिस्क्लोजर के नियम को आसान बनाने का रखा प्रस्ताव

  •  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को कहा कि उसने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के बड़े अधिकारियों के भुगतान डिस्क्लोजर के नियम को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नाम आधारित डिस्क्लोजर को कंसोलिडेटेड आंकड़ों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। सेबी ने कहा कि इस कदम से पारदर्शिता, प्राइवेसी और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनेगा। मार्केट रेगुलेटर एक नए नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत एएमसी को अपनी वेबसाइट पर सीनियर पदों — जैसे सीईओ, सीआईओ और सीओओ — के लिए कुल वेतन की जानकारी देनी होगी। अलग-अलग कर्मचारियों की वेतन बताने के बजाय, सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले शीर्ष 10 कर्मचारियों की कुल वेतन और तय सीमा से ज्यादा वेतन पाने वाले स्टाफ के कुल वेतन-भत्ते की जानकारी दी जाएगी। इस जानकारी के दायरे में वे सभी कर्मचारी आएंगे जिनकी सालाना कमाई कम से कम 1.02 करोड़ रुपए है, या अगर वे साल के कुछ हिस्से के लिए काम पर थे, तो जिनकी कमाई 8.5 लाख रुपए प्रति महीना है। एम्फी ने सेबी से मांग की है कि एएमसी अपनी वेबसाइट पर अपनी वेतन-भत्ते की नीति की जानकारी दें; साथ ही, मुख्य कर्मचारियों और उनकी संख्या से जुड़ी मौजूदा जानकारी देने की जरूरतों को मिलाकर एक ही जगह जानकारी दी जाए और फंड मैनेजरों के वेतन-भत्ते की जानकारी स्कीम के स्तर पर दी जाए, लेकिन यह जानकारी सिर्फ निवेशकों के अनुरोध पर और उन्हीं स्कीमों के लिए दी जाए जिनमें उन निवेशकों ने निवेश किया है। सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा, इससे सीनियर मैनेजमेंट के वेतन-भत्ते की पूरी और व्यवस्थित जानकारी मिलेगी, जिससे यूनिटहोल्डर सीनियर मैनेजमेंट के स्तर पर वेतन-भत्ते की कुल राशि का आकलन कर सकेंगे। एम्फी ने सेबी को बताया कि निवेश से जु?े फैसले आमतौर पर स्कीम के परफॉर्मेंस, रिस्क मैनेजमेंट, एसेट एलोकेशन, निवेश की रणनीति और खर्च के अनुपात जैसे कारकों पर आधारित होते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर मिलने वाले वेतन या पारिश्रमिक की जानकारी सार्वजनिक करने से ऐसे फैसलों पर कोई खास असर नहीं प? सकता है और न ही इससे निवेशकों को मिलने वाले नतीजों में कोई सुधार हो सकता है। इसके अलावा, किसी व्यक्ति विशेष के वेतन की जानकारी सार्वजनिक करने से कर्मचारियों के लिए निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा पैदा हो सकता है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री, टैलेंट के लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स जैसे दूसरे सेक्टर से मुकाबला करती है, जहां इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं होती है।

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सेबी ने एएमसी कंपनियों के बड़े अधिकारियों के वेतन डिस्क्लोजर के नियम को आसान बनाने का रखा प्रस्ताव

 भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को कहा कि उसने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के बड़े अधिकारियों के भुगतान डिस्क्लोजर के नियम को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नाम आधारित डिस्क्लोजर को कंसोलिडेटेड आंकड़ों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। सेबी ने कहा कि इस कदम से पारदर्शिता, प्राइवेसी और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनेगा। मार्केट रेगुलेटर एक नए नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत एएमसी को अपनी वेबसाइट पर सीनियर पदों — जैसे सीईओ, सीआईओ और सीओओ — के लिए कुल वेतन की जानकारी देनी होगी। अलग-अलग कर्मचारियों की वेतन बताने के बजाय, सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले शीर्ष 10 कर्मचारियों की कुल वेतन और तय सीमा से ज्यादा वेतन पाने वाले स्टाफ के कुल वेतन-भत्ते की जानकारी दी जाएगी। इस जानकारी के दायरे में वे सभी कर्मचारी आएंगे जिनकी सालाना कमाई कम से कम 1.02 करोड़ रुपए है, या अगर वे साल के कुछ हिस्से के लिए काम पर थे, तो जिनकी कमाई 8.5 लाख रुपए प्रति महीना है। एम्फी ने सेबी से मांग की है कि एएमसी अपनी वेबसाइट पर अपनी वेतन-भत्ते की नीति की जानकारी दें; साथ ही, मुख्य कर्मचारियों और उनकी संख्या से जुड़ी मौजूदा जानकारी देने की जरूरतों को मिलाकर एक ही जगह जानकारी दी जाए और फंड मैनेजरों के वेतन-भत्ते की जानकारी स्कीम के स्तर पर दी जाए, लेकिन यह जानकारी सिर्फ निवेशकों के अनुरोध पर और उन्हीं स्कीमों के लिए दी जाए जिनमें उन निवेशकों ने निवेश किया है। सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा, इससे सीनियर मैनेजमेंट के वेतन-भत्ते की पूरी और व्यवस्थित जानकारी मिलेगी, जिससे यूनिटहोल्डर सीनियर मैनेजमेंट के स्तर पर वेतन-भत्ते की कुल राशि का आकलन कर सकेंगे। एम्फी ने सेबी को बताया कि निवेश से जु?े फैसले आमतौर पर स्कीम के परफॉर्मेंस, रिस्क मैनेजमेंट, एसेट एलोकेशन, निवेश की रणनीति और खर्च के अनुपात जैसे कारकों पर आधारित होते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर मिलने वाले वेतन या पारिश्रमिक की जानकारी सार्वजनिक करने से ऐसे फैसलों पर कोई खास असर नहीं प? सकता है और न ही इससे निवेशकों को मिलने वाले नतीजों में कोई सुधार हो सकता है। इसके अलावा, किसी व्यक्ति विशेष के वेतन की जानकारी सार्वजनिक करने से कर्मचारियों के लिए निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा पैदा हो सकता है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री, टैलेंट के लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स जैसे दूसरे सेक्टर से मुकाबला करती है, जहां इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं होती है।


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