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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-04-2026

हल्दी में नीचे भाव पर खरीद से सरपट तेजी जारी

  •  हल्दी में पिछले दो माह के अंतराल 15 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई थी तथा छोटे कारोबारियों के माल 90 प्रतिशत कट चुके हैं। अब इसका व्यापार अधिकतर वायदा बाजार में आ चुका है। पिछले सप्ताह के उत्तरार्ध से नीचे भाव में मांग निकलते ही 11 रुपए प्रति किलो की तेजी आ गई है तथा थोड़ा करेक्शन के बाद 20 रुपए और शीघ्र बढ़ जाने की संभावना बन गई है। नई हल्दी वारंगल कड़प्पा निजामाबाद सांगली ईरोड आदि दक्षिण भारत की मंडियों में आ रही है। वर्ष 2026 की हल्दी यहां नीचे में 140/141 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद एक सप्ताह के अंतराल छलांग लगाकर 150/151 रुपए प्रति किलो की ऊंचाई पर एज ईटीज ग_ा पहुंच गई है। इधर निजाम फली भी उत्पादक मंडियों में काफी बढ़ गई है। गौरतलब है कि पिछले दो माह से लगातार गिरावट चलने से छोटे कारोबारियों के 90-95 माल कट चुके हैं। वहीं वारंगल दुग्गीराला ईरोड एवं निजामाबाद लाइन में हल्दी का गठ्ठा एवं फली ज्यादा नहीं बैठ रही है। आप सुधी पाठकों को ध्यान होगा कि इस बार रुक रुक कर जुलाई से नवंबर तक बरसात ज्यादा हुई, जिससे हल्दी की गठों को ऑक्सीजन कम मिला था। यही कारण है कि हल्दी की बिजाई अधिक होने के बावजूद काफी सड़ गई, जिससे सकल उत्पादन 74-75 लाख बोरी से अधिक नहीं बैठने का अनुमान है। दूसरी ओर माल की कमी का सबसे मुख्य कारण यह है कि बीते वर्ष में पिछले 6-7 वर्षों की पुराने स्टॉक की हल्दी निपट चुकी है। हम मानते हैं कि 10 लाख बोरी के करीब पुराना स्टॉक बचेगा। इस तरह सकल उपलब्धि नए पुराने माल का अब तक 85 लाख का बोरी का आ रहा है, जबकि हमारी एवं निर्यात को मिलाकर खपत 140 लाख बोरी के करीब है। अब पुराना स्टॉक 5 लाख बोरी और आउटसाइडर व्यापारियों को भी मान लिया जाए, जो गिनती से बाहर हैं। इस तरह भी हम देखें तो 90 लाख बोरी की कुल उपलब्धि बैठ रही है, जबकि खपत को पूरी करने के लिए अभी 50 लाख बोरी की कमी पड़ रही है। हम मानते हैं कि अमेरिका ईरान इजरायल के युद्ध से किराना जिंसों का निर्यात अपेक्षाकृत कम हो रहा है, इन सब के बावजूद भी मंडियों में आवक नहीं है तथा अभी बिजाई एवं कुछ क्षेत्रों में गाठों की निकासी से उत्पादन अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि वहां के क्षेत्रवासी हल्दी में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बहुत कम बता रहे हैं। तथा काफी हल्दी नुकसान बता रहे हैं, इन परिस्थितियों में हल्दी में अप्रैल माह में 20 रुपये प्रति किलो की और तेजी लग रही है तथा विशेषज्ञ ऊपर में हल्दी 180 रुपए बनने की धारणा में बैठ गए हैं।

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हल्दी में नीचे भाव पर खरीद से सरपट तेजी जारी

 हल्दी में पिछले दो माह के अंतराल 15 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई थी तथा छोटे कारोबारियों के माल 90 प्रतिशत कट चुके हैं। अब इसका व्यापार अधिकतर वायदा बाजार में आ चुका है। पिछले सप्ताह के उत्तरार्ध से नीचे भाव में मांग निकलते ही 11 रुपए प्रति किलो की तेजी आ गई है तथा थोड़ा करेक्शन के बाद 20 रुपए और शीघ्र बढ़ जाने की संभावना बन गई है। नई हल्दी वारंगल कड़प्पा निजामाबाद सांगली ईरोड आदि दक्षिण भारत की मंडियों में आ रही है। वर्ष 2026 की हल्दी यहां नीचे में 140/141 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद एक सप्ताह के अंतराल छलांग लगाकर 150/151 रुपए प्रति किलो की ऊंचाई पर एज ईटीज ग_ा पहुंच गई है। इधर निजाम फली भी उत्पादक मंडियों में काफी बढ़ गई है। गौरतलब है कि पिछले दो माह से लगातार गिरावट चलने से छोटे कारोबारियों के 90-95 माल कट चुके हैं। वहीं वारंगल दुग्गीराला ईरोड एवं निजामाबाद लाइन में हल्दी का गठ्ठा एवं फली ज्यादा नहीं बैठ रही है। आप सुधी पाठकों को ध्यान होगा कि इस बार रुक रुक कर जुलाई से नवंबर तक बरसात ज्यादा हुई, जिससे हल्दी की गठों को ऑक्सीजन कम मिला था। यही कारण है कि हल्दी की बिजाई अधिक होने के बावजूद काफी सड़ गई, जिससे सकल उत्पादन 74-75 लाख बोरी से अधिक नहीं बैठने का अनुमान है। दूसरी ओर माल की कमी का सबसे मुख्य कारण यह है कि बीते वर्ष में पिछले 6-7 वर्षों की पुराने स्टॉक की हल्दी निपट चुकी है। हम मानते हैं कि 10 लाख बोरी के करीब पुराना स्टॉक बचेगा। इस तरह सकल उपलब्धि नए पुराने माल का अब तक 85 लाख का बोरी का आ रहा है, जबकि हमारी एवं निर्यात को मिलाकर खपत 140 लाख बोरी के करीब है। अब पुराना स्टॉक 5 लाख बोरी और आउटसाइडर व्यापारियों को भी मान लिया जाए, जो गिनती से बाहर हैं। इस तरह भी हम देखें तो 90 लाख बोरी की कुल उपलब्धि बैठ रही है, जबकि खपत को पूरी करने के लिए अभी 50 लाख बोरी की कमी पड़ रही है। हम मानते हैं कि अमेरिका ईरान इजरायल के युद्ध से किराना जिंसों का निर्यात अपेक्षाकृत कम हो रहा है, इन सब के बावजूद भी मंडियों में आवक नहीं है तथा अभी बिजाई एवं कुछ क्षेत्रों में गाठों की निकासी से उत्पादन अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि वहां के क्षेत्रवासी हल्दी में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बहुत कम बता रहे हैं। तथा काफी हल्दी नुकसान बता रहे हैं, इन परिस्थितियों में हल्दी में अप्रैल माह में 20 रुपये प्रति किलो की और तेजी लग रही है तथा विशेषज्ञ ऊपर में हल्दी 180 रुपए बनने की धारणा में बैठ गए हैं।


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