देश में गन्ने की पिराई का काम अंतिम चरण पर पहुंच गया है, जिसमें अधिकतर चीनी मिले बंद हो गई है, इस स्थिति में 30 मार्च तक चीनी का उत्पादन 271.20 लाख मैट्रिक टन पर पहुंच गया है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री लिमिटेड के अनुसार गन्ना उत्पादक सभी राज्यों में पिराई का कार्य बंद होने के कागार पर पहुंच गया है। देश की 541 चीनी मिलों में 467 चीनी मिलें सीजन ऑफ होने से परिचालन बंद कर चुकी है। गन्ने की अधिक उपलब्धता एवं बेहतर परिचालन दक्षता के कारण सकल उत्पादन और उपलब्धि में वृद्धि हुई है। अब तक कुल चीनी उत्पादन 271.20 लाख मैट्रिक टन हो गया है, जबकि गत वर्ष इन दिनों तक 248.65 लाख मैट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था। चीनी की रिकवरी भी इस बार अधिक आ रही है। पिछले सीजन में 9.37 प्रतिशत रिकवरी आ रही थी, जबकि इस बार 9.56 प्रतिशत आ रही है। वर्ष 2025-26 पिराई सत्र में 541 चीनी मिलों में मिले चल रही हैं, जबकि 2024-25 पिराई सत्र में 533 चीनी मिले ही संचालित थी, यानी इस बार चीनी मिलों की संख्या भी बढ़ी है। हालांकि वर्तमान में केवल 74 चीनी मिलें ही चल रही है, बाकी सीजन ऑफ होने से बंद हो चुकी है। गत वर्ष, इस समय तक 113 चीनी मिलें चल रही थी, बाकी बंद हो चुकी थी। महाराष्ट्र में पिछले सीजन में 80.10 लाख मैट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष अब तक 98.95 लाख मीट्रिक टन हो चुका है। यूपी में 87.70 से घटकर 87.45 लाख मैट्रिक टन चीनी का उत्पादन 10 वर्ष की समान अवधि में हुआ है। कर्नाटक में चीनी उत्पादन 39.90 से बढक़र 46.75 लाख मीट्रिक टन हो गया है। पिराई का समय धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, खासकर पश्चिमी एवं दक्षिणी राज्यों में पहले ही चीनी मिलें बंद हो चुकी थी, उत्तर भारत में उसकी तुलना में अभी चीनी मिलें कुछ पिराई कर रही है। इस तरह चीनी का उत्पादन अधिक होने से लंबी तेजी की गुंजाइश नहीं है। हालांकि इस बार चीनी के भाव गत वर्ष की अपेक्षा 250/275 रुपए प्रति क्विंटल ऊंचे चल रहे हैं इस समय महाराष्ट्र के मिलन में 3900/3955 रुपए प्रति क्विंटल काटो बन रहा है, जबकि यूपी में 4000/4075 रुपए तक डीओ का व्यापार हो रहा है तथा कारोबारियों का रुझान तेजी में है, लेकिन निर्यात के अभाव में लंबी तेजी का व्यापार नहीं करना चाहिए।