अदरक की आने वाली फसल भी चौतरफा बहुत बढिय़ा बताई जा रही है, जिससे सौंठ अधिक बनेगा। दूसरी ओर इस बार पुराना स्टॉक सभी मंडियों में अधिक बचने से वर्तमान भाव में माल खरीदने की बजाय बेचते रहना चाहिए। अदरक की बिजाई सागर लाइन में बहुत बढिय़ा है, कोचीन के आस-पास उत्पादक क्षेत्रों में भी बहुत बढिय़ा है तथा इस बार पूर्वी भारत में क्वालिटी बहुत बढिय़ा आ रही है, पिछेती बिजाई वाली फसल में हल्के माल जरूर निकल रहे हैं, लेकिन चौतरफा उत्पादन में कम से कम 32 प्रतिशत की वृद्धि होने की खबरें आ रही है। गौरतलब है कि सीजन से अब तक सौंठ में भारी गिरावट आ चुकी है, जिससे कारोबारी चारों तरफ हताश बैठे हैं तथा बाहरी ट्रेड के कारोबारी अपना माल मंदे भाव में काटने लगे हैं, लेकिन सारा माल इधर से उधर घूम रहा है, खपत में नहीं जा रहा है। इस बार सर्दी देर से यानी 10 दिनों से ही पड़ रही है, इससे भी अदरक की खपत कम हुई है तथा सौंठ भी कम बिक रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि गत वर्ष 47/48 प्रतिशत सौंठ का उत्पादन अधिक हुआ था, क्योंकि अदरक सस्ती बिकने से सौंठ ज्यादा बनी थी तथा पिछले तीन वर्षों से लगातार तेजी का रुख बने रहने से कारोबारियों द्वारा सीजन में ही गले तक स्टॉक भर लिया गया था। यही कारण है की सीजन में जो 425 रुपए प्रति किलो सागर लाइन की सौंठ बिकी थी, उसके भाव आज 270 रुपए में कोई पूछने वाला नहीं है। इधर कानपुर लाइन में 250/255 रुपए का बेचू आने लगे हैं, सागर लाइन वाले एक मंडी 235/236 रुपए तक व्यापार कर चुके हैं। इसका स्टॉक उत्पादक, खपत व वितरक मंडियों में प्रचुर मात्रा में पड़ा हुआ है तथा नई फसल डेढ़-दो महीने के बाद आएगी, लेकिन स्टॉक 50 प्रतिशत बचने की संभावना है। आने वाली फसल का उत्पादन भी चौतरफा बढिय़ा बताया जा रहा है, इस तरह नए पुराने माल को मिलाकर उपलब्धि बहुत ज्यादा रहने वाली है। दूसरी ओर नाइजीरिया का चिप्स माल बहुत मंदे भाव का यहां बिक रहा है, क्वालिटी अनुसार 110/130 रुपए प्रति किलो के बीच धड़ल्ले से व्यापार हो रहा है, जो पिसाई में जा रहा है। इन परिस्थितियों में सौंठ में तेजी की धारणा नहीं है, बल्कि ऐसा आभास हो रहा है कि आने वाले समय में 20/30 रुपए का और मंदा आ जाएगा।