ईरान में केसर का स्टॉक नगण्य रह जाने तथा युद्ध से वहां की स्थिति बेहद खराब हो जाने से भारतीय बाजारों में माल की शॉर्टेज बनने लगी है, युद्ध शुरू होने से अब तक यानी लगभग 100 दिनों में 20 रुपए प्रति ग्राम की तेजी आ चुकी है तथा अगले 2 माह के अंतराल ही 20/25 रुपए और बढ़ जाने की संभावना दिखाई दे रही है। केसर का सीजन 7 महीने से चल रहा है, जिससे कारोबारी दिसंबर माह से ही खरीद करने लगे थे। गौरतलब है कि अगस्त-सितंबर तक पुराने माल औने-पौने भाव में कारोबारियों 90 प्रतिशत कट गए थे, लेकिन अक्टूबर के मध्य से केसर के फूल में कारोबारियों को माल कम मिलने उसके बाद फरवरी के अंत से ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध छिड़ जाने से ईरानी माल का आना बंद हो गया घरेलू फसल पहले से ही काम आई थी यही कारण है कि जो कश्मीरी केसर 170 रुपए प्रति ग्राम बिका था, उसके भाव बढक़र 255 रुपए प्रति ग्राम हो गए हैं। कुछ प्रसिद्ध ब्रांड के केसर 270 रुपए तक बिक रहे हैं। वर्तमान में अधिकमास चल रहा, आगे एक सप्ताह बाद से शादियां शुरू होने वाली है। वर्तमान में फिर से ईरान इजरायल अमेरिका का जंग छिड़ गया है, जिस कारण यह 300 रुपए बनने की स्थिति में पहुंच गया है। आगे शादियां अगले सप्ताह से चलने वाली है, इस वजह से केसर की खपत बढ़ जाएगी। दूसरी ओर ग्रीस अफगानिस्तान ईरान से केसर नहीं आ पाएगा। इसका निर्यात व्यापार यूएसए यूएई सहित सभी देशों के लिए व्यापार हो रहा है। इधर डॉलर, रुपया की तुलना में महंगा हो गया है, इसका भी निर्यात में समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान से पिछले दिनों की लड़ाई से उत्पादन कम हुआ है, ईरान में केसर अस्सी प्रतिशत नष्ट हो गया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। कुछ विशेषज्ञ प्रतिकूल मौसम से कश्मीर की घाटियों में इस बार भी केसर के फूल की उपलब्धि कम की बात बोल रहे हैं। जिस कारण उत्पादन करने वाले मंडियों में माल, अपेक्षाकृत भाव बढ़ाकर बोलने लगे हैं। इधर पाइप लाइन में माल नहीं होने के साथ-साथ लंदन सहित दूसरे देशों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक निर्यात मांग चल रही है। अभी कुछ दिन ठहर कर बाजार में अभी और तेजी का अंदेशा बन गया है। अमृतसर लुधियाना श्रीनगर पामपुरम बद्दी सोलन आदि क्षेत्रों में गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 64-65 प्रतिशत ही स्टाक कम रह गया है तथा अब कारोबारियों को माल खरीदने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, क्योंकि ईरान का माल नहीं आ रहा है। अभी तक की प्रतिस्पर्धात्मक खरीद को देखते हुए शॉर्टेज में आ गया। इसमें तेजी का एक और कारण यह है कि अफगानिस्तान तालिबान वाले क्षेत्रों से भी इस बार केसर की निकासी कम हो रही है।