गत सप्ताह उत्तर भारत की मंडियों में कच्चे दूध की आपूर्ति में कमी रही, जिससे अब गिने-चुने प्लांट ही उत्पादन कर रहे हैं। यही कारण है कि ग्राहकी का सन्नाटा होने के बावजूद भी देसी घी, दूध पाउडर एवं मक्खन में अकड़ बरकरार रही। आलोच्य सप्ताह कच्चे दूध की आपूर्ति औसतन पाउडर प्लांटों में कुल 55-60 लाख मैट्रिक टन के करीब रह गई। यही कारण है की देसी घी, दूध पाउडर एवं मक्खन का उत्पादन काफी कम हुआ तथा स्टॉक भी इस बार गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में सभी प्लांटों में कम है। उधर सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में भी इस बार ज्यादा माल नहीं है। यही कारण है कि फेडरेशने भी टेंडर में ज्यादा माल नहीं बेच पा रही हैं। उधर तमिलनाडु एवं महाराष्ट्र के कोआपरेटिव्स में भी इस बार ज्यादा माल नहीं है। वहां के प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में भी लिक्विड दूध कम आने से ऊंचे पड़ते का माल बन रहा है, जिस कारण निर्यातकों को भी दूध पाउडर महंगा खरीदना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार साउथ का दूध पाउडर, उत्तर भारत की मंडियों में आकर सस्ते भाव में बिक रहे थे तथा उत्तर दक्षिण का अंतर 55-60 रुपए प्रति किलो का हो गया था, जिससे उसके पड़ते लग रहे थे। इस बार मुश्किल से 10/15 रुपए प्रति किलो का उन मालो में अंतर है। यही कारण है की बिक्री में कमजोरी के बावजूद भी देसी घी प्रीमियम क्वालिटी के 9550/9750 रुपए प्रति टीन एवं दूध पाउडर 315/328 रुपए प्रति किलो के बीच चल रहे हैं। मिलावटी देसी घी एवं दूध पाउडर के फिक्स भाव नहीं है, जिस भाव के ग्राहक मिल रहे हैं, मिलावट करने वाले ठिकाना पहुंच में उसी तरह भेज देते हैं। हालांकि पिछले सप्ताह मधुसूदन सीएफएल ने 15 रुपए प्रति किलो दूध पाउडर के भाव बढ़ाने की घोषणा किया था, लेकिन बाजार में उसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला, क्योंकि मधुसूदन सीएससी ने पूर्व भाव पर व्यापार किया। अन्य कंपनियां भी बाजारों में रुपए की तंगी होने एवं ग्राहकी के अभाव में पूर्व भाव पर माल बेच रही है, लेकिन माल का प्रेशर नहीं होने से आगे चलकर देर सवेर 20 रुपए प्रति किलो की तेजी की संभावना दिखाई दे रही है।